वैलेंटाइन डे

हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते,

वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते.

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक ,

कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक.

जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन,    

ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते.

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना,

दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना .

लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो,

ऐसी दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते.

मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का ,

उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले .

अगर तुम्हारी अना ही का है सवाल तो फिर ,

चलो मैं हाथ बढ़ाता हूँ दोस्ती के लिए.

शाम से आँख में नमी सी है,

आज फिर आप की कमी सी है.

दफ़्न कर दो हमें कि साँस मिले,

नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है.

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