महक प्रवाह

प्रिय पाठको ,

अक्टूबर के महीने में आप सभी का स्वागत एवं अक्टूबर की बधाई, बधाई किसलिए ?  ये हम सभी भारत वासियों की खुशकिस्मती ही तो है कि यहां महात्मा गांधी जैसी महान आत्मा ने जन्म लिया और वो आत्मा अपने विचारों के रूप में आज भी हमारे साथ मौजूद है. महात्मा गांधी ‘भारत के महान सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक नेता थे और जो इतिहास की सबसे सम्मानित हस्तियों में से एक हैं ‘ .

गांधी एक नाम नहीं एक विचारधारा है जो गांधी से युगों पूर्व से अनहद रूप से बहती आ रही है और इसी रूप से वह युगों तक बहती रहेगी क्यूंकि ये प्रकृति के मूलभूत रूप की पहचान है प्रकृति अशांति से शांति की ओर, विध्वंस से निर्माण की ओर सदैव प्रवाहित होती रही है अपने प्रवाह में आने वाली  रूकावटों को भी अपने में घोलकर, अपने ही जैसा रूप दे देना इस शांत गंभीर प्रवाह का गुण है

गांधी के विचार सिर्फ गांधीवादी समझ सकें या विश्लेषित कर सकें, ऐसा नहीं है, सरलता के साथ जीवन जीना, जीव मात्र से प्रेम करना, सदैव सत्य का साथ देना, अहिंसा जीवन का परम् धर्म होना ध्यान से देखिये प्रकृति के शाश्वत मूल्य ही तो गांधीवाद है.

गांधी ने अपने विचार दर्शन का निर्माण प्रयोगों के आधार पर एक सशक्त धरातल पर किया था जिसे  समय के आंधी तूफ़ान भी विचलित नहीं कर सकते.  गांधी द्वारा प्रतिपादित सत्याग्रह की तकनीक ने विशाल भारतीय भू क्षेत्र के नागरिकों को सरकार से अहिंसात्मक प्रतिरोध करना सिखाया.

गांधी के सत्याग्रह का अर्थ है सत्य पर अडिग रहना. उनके मत में सभी प्रकार के अन्याय, उत्पीड़न और शोषण के विरुद्ध आत्मबल का प्रयोग ही सत्याग्रह है सत्याग्रही विरोधी का न तो अहित करता है न अहित चाहता है, बल्कि वह अपनी अंहिंसात्मक और सत्य की प्रचंड शक्ति से उसे भी अपनी तरह बना देता है महात्मा गांधी टॉलस्टॉय की इस विचारधारा से बहुत अधिक प्रभावित थे कि जिस प्रकार हिंसक युद्ध के लिए योद्धाओं को प्रशिक्षित किया जाता है उसी प्रकार अहिंसक युद्ध के लिए भी योद्धाओं को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए इसीलिए गांधी ने दक्षिण अफ्रीका और भारत में विभिन्न आश्रमों की स्थापना करके उनमें सत्याग्रहियों को कठोर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की टालस्टाय ने गांधी को लिखे पत्रों में कहा था अंहिंसा स्वयं सत्य है.

गांधी का अहिंसा का सिद्धांत शाश्वत और सार्वदेशिक है और आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक और सार्थक भी है वर्तमान में अधिकाँश वैश्विक समस्याओं का निराकरण करने में अहिंसा सक्षम है गांधी जी इस तथ्य को भली भांति जानते थे कि वर्तमान समाज में हिंसा की जिस घातक प्रवृति ने विस्तार पाया है उससे मानव जाति के बचाव का एक मात्र मार्ग सत्य और अहिंसा की शरण लेना है.

गांधी सिद्धांत बहुत ही सीधा और सरल है उनके अनुसार पृथ्वी पर मानव का विकास क्रम हिंसा से अहिंसा की ओर जाना ही है अहिंसा,  शांति और प्रेम ही मनुष्य के मूलभूत गुण हैं सिर्फ मनुष्य ही नहीं ईश्वर निर्मित सम्पूर्ण समष्टि का यही गुण है जब भी प्रकृति विकराल रूप धारण करती है विनाश की छाया फैल जाती है ठीक इसी प्रकार मनुष्य भी जब अपनी मूलभूत प्रवर्तियाँ छोड़कर क्रोध, हिंसा, नफरत की तरफ जाता है मनुष्यत्व घायल होता है गांधी कहते थे इंसान शांति, प्रेम अहिंसा के साथ पूरा जीवन रह सकता है लेकिन लगातार हिंसा , झगड़ा,  मारपीट करते हुए पूरी जिंदगी नहीं जी सकता है.

गांधी का शांति और अहिंसा का संदेश भारत से बाहर काफी आगे गया है. वर्ष 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाना निर्धारित किया. ‘आज के अशांत विश्व में गांधी का साम्प्रदायिक सौहार्द्र और सहिष्णुता का संदेश पहले की तरह ही प्रासंगिक है.

इसी महीने आदि शक्ति मां भगवती की अभ्यर्थना का उत्सव भी है नौ दिन तक सभी भारतवासी भक्ति रस में सराबोर रहेंगे,  मां भगवती का आशीर्वाद आपके जीवन में खुशियां लाए,

इसी शुभकामना के साथ,

डॉ. किरन संजीव 

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