महात्मा गांधी : बन्दे में था दम, वंदे मातरम्

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आदर्श विचारों का चलता फिरता सूरज थे. गांधी ने दुनिया को बताया की प्रेम, शान्ति और अहिंसा ही जीवन का अंतिम उद्देश्य है सभी समस्याओं का हल भी यही तीन शब्द हैं सत्य की विशाल ताकत का परिचय गांधी ने हमें दिया , गांधी जिनकी स्वयं की ताकत सत्य और अहिंसा ही थी .

न ही किसी बड़े राजनीतिक पद पर था, न ही किसी विशेष धर्म का नेता था वह, न ही अपनी  खूबसूरती की वजह से वह जाना जाता था, न ही किसी शाही परिवार से सम्बंधित था, न ही कहीं का राजा था, न ही वह कोई कलाकार था ! सामान्य सा दिखने वाला, कमजोर काया का वह पुरुष, अपने उच्च आदर्शों की वजह से पूरे देश का बापू कहलाया और दुनिया ने उसके सिद्धांतों को अपनाकर अपने नए रास्तों का निर्माण किया ऐसे बापू के जन्म को आज 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं. सिर्फ जन्म ! क्यूंकि उनकी मृत्यु तो हुई ही नहीं है, न ही कभी कोई उन्हें मार सकता है,  “ बापू तुम आत्मा ही थे , जो विचार बनकर पूरे विश्व को रास्ता दिखा रहे हो “.

महात्मा गांधी के विचार सिर्फ गांधीवादी समझ सकें या विश्लेषित कर सकें, ऐसा नहीं है, सरलता के साथ जीवन जीना, जीव मात्र से प्रेम करना, सदैव सत्य का साथ देना, अहिंसा जीवन का परम् धर्म होना, जरा ध्यान से देखिये ,  प्रकृति के शाश्वत मूल्य ही तो गांधीवाद हैं !

गांधी के नामों में ही उनके जीवन का सार भी छुपा है बापू “कमजोर और निर्बल का आधार बनने वाला बापू ही तो हो सकता है “ .

आत्मा से महान आत्मा तक की यात्रा ही उन्हें महात्मा बनाती है अपने किसी भी निजी स्वार्थ की पूर्ती किये बिना समग्र के लिए सोचना ! वह समग्र ही  गांधीवाद है समग्र अर्थात सम्पूर्ण फिर वह चाहे मानवता के लिए हो चाहे क्रांति के लिए या फिर आज़ादी के लिए, अधूरा कुछ भी नहीं , प्रेम भी नहीं ! उनके समग्र प्रेम में ईश्वर निर्मित सम्पूर्ण समष्टि थी उसमें मानव , पशु , पक्षी , हवा , मिटटी पानी सभी समान थे. कटटर हिन्दू होने के बाद भी सभी धर्मों की प्रार्थना सभा में शामिल होना , सभी धर्मों को समान रूप से आदर देना, जाति और धर्म एवं जाती को स्वीकार करते हुए प्रत्येक धर्म से प्रेम करना यही तो एक महात्मा की पहचान हो सकती है महात्मा अर्थात साधू ? नहीं , कर्मयोगी ! ठीक गीता के कृष्ण की तरह , अदम्य साहस और वीरता के धनी ! गांधी कहते थे “कांग्रेस मुझे अपने साथ रखती है क्योँकि उन्हें मेरे रूप में लगातार लड़ने वाला व्यक्ति मिल गया है “ मजबूत जीवट के धनी बापू लाखों लोगों के पथप्रदर्शक यूँ ही नहीं बन सके थे, निज का हर रूप त्यागा , सर्व का हर रूप अपनाया , विरोध का कितना नया रूप था वह ! जहां न तलवार थी, न गोली , थी तो सिर्फ एक कृशकाया , जो निर्बल होकर भी आत्मबल की ताकत से भरपूर थी .

गांधी के विचार और आदर्श गांधी के समय में ही नहीं बल्कि हमेशा ही लोगों को प्रेरित करते रहे हैं वे इतने ऊँचे आदर्श वाले व्यक्ति थे कि दुनिया के प्रत्येक सफल व्यक्ति की प्रेणा रहे . पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से एक बार वर्जीनिया प्रांत के एक हाई स्कूल छात्र ने पूछा कि “आप जीवित या गुजर चुकी किस हस्ती के साथ डिनर करना चाहेंगे” ? ओबामा ने जवाब दिया “महात्मा गांधी” . गांधी के प्रशंसकों और उनके आदर्शों से प्रभावित होने वाले लोगों में महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन भी थे. आधुनिक तकनीकी की दौड़ को अपनाने वाले स्टीव जॉब्स तो गांधी से इतने प्रभावित थे की एप्पल कम्पनी के कम्प्यूटरों के विज्ञापन में उन्होनें चरखे के साथ बापू की तस्वीर लगाई थी और लिखा था ‘ अलग सोचो ‘ . नेल्सन मंडेला ने गांधी के पदचिन्हों पर चलते हुए दक्षिण अफ्रीका को रंग भेद और नस्लवाद से आज़ादी दिलाई. दक्षिण अफ्रीका  में महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका का दादा कहा जाता है.

भारतीय नोटों पर उनकी जो तस्वीर है वह 1946 में लॉर्ड फ्रेडरिक पेथिक लॉरेंस विक्ट्री हॉउस में खींची  गई थी. ब्रिटेन ने महात्मा गांधी की मृत्यु के बाद उनके नाम से डाक टिकट जारी किया , जबकि  गांधी ने उसी देश के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी.

गांधीजी की शव यात्रा ८ किलोमीटर लंबी थी जिसके साथ करीब १० लाख लोग चल रहे थे और करीब १५ लाख लोग रास्ते में खड़े थे, जबकि महात्मा गांधी किसी राजनितिक पद पर नहीं थे न ही विशेष धार्मिक या राजनीतिक समूह से जुड़े हुए थे,  वे तो पूरे देश के बापू थे !  बरबस ही एक गीत के बोल होठों पर आ जाते हैं बन्दे में था दम, वंदे मातरम् .

4 thoughts on “महात्मा गांधी : बन्दे में था दम, वंदे मातरम्

  • October 1, 2018 at 7:30 am
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    Gandhiji has done so much to our country he has done the welfare of the all human beings and even for the animals

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  • October 1, 2018 at 1:57 pm
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    आत्मा से महान आत्मा तक की यात्रा ही उन्हें महात्मा बनाती है
    Superb defination of mahatma..
    सही है महत्मा एक पूरी यात्रा का नाम है
    … कोई मंजिल नही..कोई पदनाम नही कोई उपलब्धी नही।

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