महक प्रवाह

 उल्लास से भरकर आई दिवाली,
तम में भी उजियारा फैलाने आई दिवाली,
सूनी आँखों में खुशियों का उजाला फैलाती आई दिवाली,
घर घर दीपों को रोशन करती आई दिवाली,
प्रिय पाठको ,
जब आप ये पढ़ रहे हैं तब आपके चरों ओर दिवाली का उल्लास फ़ैल चुका है. दिवाली यानि खुशियों का त्योहार, लेकिन ख्याल रखें ये सिर्फ ऊपरी खुशियों का त्योहार बनकर ना रहे इस दिवाली अपने मन का दिया जलाएं, अपने चारों और देखिये सड़क के किनारे बैठे छोटे छोटे बच्चे, दिए बेचते, पूजा का सामान बेचते , फूल माला बेचते जरा सोचिये, इनकी दिवाली कहाँ है ? इस दिवाली कुछ ऐसा करें जिससे इनके घरों तक भी दिवाली का उजाला पहुँच सके.

दिवाली के दिन आप अपने आप को वचन दें भारतीय मूल्यों की रक्षा करते हुए जीवन को विकास के पथ पर ले जाएंगे, पहले देश समाज का सोचेंगे और फिर अपने बारे में निरर्थक कार्यों में प्रकृति के दिए इस अमूल्य जीवन को नष्ट नहीं करेंगे प्रकृति के साथ चलेंगे.

दिवाली पांच दिनों का ये त्योहार पंचोत्सव है हर दिन प्रकृति के साथ जुड़े रहने का सन्देश लेकर आता है. धनतेरस से स्वास्थ्य धन की कामना के साथ प्रारम्भ हुआ ये त्योहार दुष्ट दलन करने वाली काली को छोटी दिवाली के दिन याद करके जीवन में बुराइयों के विनाश को खत्म करने का संकेत देता हुआ दिवाली की मुख्य पूजा में जीवन के पांच तत्वों मिट्टी, अग्नि, जल, वायु और आकाश की पूजा करते हुए प्रकृति के महत्व को तो बताता ही है साथ ही हमें उससे जुड़े रहने का आग्रह भी करता है.

अन्नकूट, फिर से प्रकृति के महत्व को बताता है पर्वतों की पूजा के द्वारा जीवन में उनके महत्व को रेखांकित करता है साथ ही इस दिन से बदलते मौसम के कारण प्रकृति और किसानों के सम्मिलित प्रयास से तरह तरह की ढेरों सब्जियों के आने और उन्हें भोजन में शामिल करने का आमंत्रण देता है. भैया दूज बचपन के रिश्तों और भाई बहन के रिश्तों की गरिमा समझाते हुए गरिमामय समाज की स्थापना पर जोर देता है.
पांच हज़ार वर्ष पूर्व से चल रहे ये त्योहार किसी अंधविश्वास या बोझिल परम्परा का नहीं, वरन प्राकृतिक, दार्शनिक सामाजिक और वैज्ञानिक मूल्यों का प्रतीक हैं गर्व कीजिये की आप ऐसी परम्परा के प्रतिनिधि हैं.
इस परम्परा को आगे बढ़ाएं इसी रूप में, इसे किसी धार्मिक या अंधविश्वास का प्रतीक नहीं बनाइये खुशियां सबके साथ बढ़ती हैं. ये किसी एक परिवार, समाज या धर्म के साथ नहीं प्रकृति की हर समष्टि के साथ मनाइये फिर देखिये किस प्रकार आपके जीवन से अन्धकार विलुप्त होने लगता है और उसकी जगह एक उजाला फैलने लगता है. ये उजाला बाहर का नहीं आपके मन के दिए से आता है और आपका पूरा अंतस उससे आलोकित हो उठता है.
दिवाली आपके लिए शुभ हो, प्रकाश से आपका जीवन आलोकित हो,
शुभ कामना के साथ,                                                                   ,
डॉ. किरन संजीव

 

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