विरोध के रूप में मेरा उपवास

कानूनों के तहत उपवास, स्वास्थ्य के लिए हो सकता है, इन उपवासों को अहिंसा से जोड़ कर वे नहीं देख सकते हैं इन उपवासों में किसी भी व्यक्ति को अहिंसा में विश्वास करने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, एक उपवास जो अहिंसा का एक प्रतीक होता है, उसे करने वाला इसे कभी-कभी समाज द्वारा किए गए कुछ गलत कामों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का तरीका भी बनाता है, और यह वह तब करता है जब उसके पास कोई दूसरा उपाय नहीं बचता है.  इस तरह का एक अवसर मेरे सामने भी आया है.

9 सितंबर को जब मैं कलकत्ता से दिल्ली लौट रहा था और मुझे पश्चिम पंजाब की ओर बढ़ना था. लेकिन दिल्ली से गुजरते हुए मुझे गहरा सदमा लगा   दिल्ली मृतकों का शहर दिखता था. मैंने ट्रेन से जो भी चेहरा देखा, वह उदास था. यहां तक कि सरदार, जिनका हास्य और आनंद कभी ख़त्म नहीं होता था , वे भी इस का अपवाद नहीं थे. इसका कारण मुझे नहीं पता था.

वे मुझे लेने के लिए स्टेशन पर आये थे. महानगर में हुई गड़बड़ियों की दुखद खबर देने में उन्होंने कोई समय नहीं गंवाया. मैंने देखा और सोचा कि ‘करो या मरो’ के साथ मुझे दिल्ली में रहना है.  

शीघ्र सैन्य और पुलिस कार्रवाई के द्वारा एक स्पष्ट शांति लाई गई है.  लेकिन लोगों के दिलों के भीतर तूफान दबा हुआ है. जो किसी भी दिन फट सकता है.  मैं हिंदुओं, सिखों और मुसलमानों के बीच दिल की दोस्ती के लिए तरस रहा हूं.  जो कि पहले थी और आज अस्तित्वहीन है. यह एक ऐसी स्थिति है कि कोई भी भारतीय देशभक्त समभाव से विचार नहीं कर रहा है. उपवास, तलवार के स्थान पर उसका अंतिम उपाय है अंतिम निष्कर्ष लेने का भार मुझ पर आया है और इससे मैं खुश हूँ कोई भी आदमी, अगर वह शुद्ध है, तो उसके जीवन से ज्यादा कीमती कुछ भी नहीं है. मैं आशा करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि मेरे  कदम को सही ठहराने के लिए मुझमें वह पवित्रता हो.

नेहरू और गाँधी

आशीर्वाद के योग्य

मैं आप सभी से मेरे इस प्रयास को आशीर्वाद देने और मेरे लिए प्रार्थना करते हुए मेरे साथ रहने के लिए कहता हूं. व्रत की शुरुआत कल पहले भोजन के समय से होगी. अवधि अनिश्चित है और मैं इस उपवास के दौरान नमक और  नींबू के साथ या उसके बिना पानी पी सकता हूं और यह तब समाप्त होगा जब मैं पूरी तरह संतुष्ट हो जाऊंगा कि सभी समुदायों के दिलों का पुनर्मिलन हो चुका है और वह बिना किसी बाहरी दबाव के किया गया है, लेकिन कर्तव्य की जागृत भावना से. इसका इनाम वह पुनर्जीवन होगा जो दुनिया में भारत की घटती प्रतिष्ठा और उसकी एशिया में तेजी से लुप्त होने वाली संप्रभुता है.मैं अपने आप को विश्वास दिलाता हूं कि जल्द ही दुनिया से दर्द, तूफान और भूख   खत्म हो जायेगी. मेरे कोई दोस्त, या दुश्मन नहीं हैं जो मुझसे नाराज हो.  ऐसे  कोई दोस्त नहीं हैं जो मानव मन की पुनरावृत्ति के लिए उपवास की विधि में विश्वास नहीं करते हैं.  वे मेरे साथ सहन करेंगे और मेरे लिए कार्रवाई की उसी स्वतंत्रता को सीमित करेंगे जो वे खुद के लिए चाहते हैं. ईश्वर मेरे सर्वोच्च और एकमात्र परामर्शदाता के रूप में हैं इसलिए मुझे लगा कि मुझे किसी अन्य सलाहकार के बिना निर्णय लेना चाहिए. यदि मैं कोई गलती करता हूँ और मुझे इसका पता चलता है, तो मुझे इसे मानने और अपने दोषपूर्ण कदम को वापस लेने में कोई संकोच नहीं होगा. स्पष्ट संकेत है, और मैं मानता हूँ की यह मेरे अंतर्मन की आवाज है यदि पूरा भारत प्रतिक्रिया देता है या कम से कम दिल्ली भी ऐसा करता है, तो उपवास जल्द ही समाप्त हो सकता है.

     कोई नरमी नहीं

लेकिन यह जल्द या देर से समाप्त होता है या कभी भी समाप्त नहीं होता है, तो इसे संकट के रूप में करार दिया जा सकता है.आलोचकों ने मेरे पिछले कुछ उपवासों को जबरदस्ती माना है और यह माना है कि मैं उपवासों को दबाव के लिए करता हूँ. जब उद्देश्य पवित्र हो तो प्रतिकूल निर्णय का क्या मूल्य हो सकता है? एक शुद्ध उपवास,  कर्तव्य की तरह होता है और स्वयं अपने आप में अपना इनाम होता है. मैं इससे परिणाम नहीं ला सकता. मैं ऐसा इसलिए करता हूं क्योंकि मुझे ऐसा करना चाहिए.    इसलिए, मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वे उद्देश्य की जांच करें और मुझे उपवास करने दें, यदि मेरी मृत्यु शांति के लिए, (जो कि मुझे आशा है कि यह सुनिश्चित है) होगी, तो मेरे लिए यह मृत्यु शानदार होगी, बजाय इसके कि मैं भारत को, हिंदू धर्म, सिख धर्म और इस्लाम में बंटता देखकर उसके विनाश का एक असहाय गवाह बनूं. यह विनाश निश्चित है अगर पाकिस्तान दुनिया के विभिन्न धर्मों के सभी लोगों के लिए जीवन और संपत्ति की सुरक्षा और उनकी  समानता सुनिश्चित नहीं करता है, और अगर भारत भी उसकी नकल करता है तो इस्लाम भारत में मर जाएगा लेकिन दुनिया में नहीं. लेकिन भारत के बाहर हिंदू धर्म और सिख धर्म की कोई दुनिया नहीं है. जो लोग मुझसे अलग सोचते  हैं, मैं उनके विरोध का सम्मान करता हूँ, मेरे व्रत को अंतरात्मा का व्रत रहने दो, इसे मृत मत करो. उस बुराई को देखो जो हमारे प्यारे भारत में आ रही है   आप यह सोचकर खुश होंगे कि यहां एक विनम्र बेटा है जो काफी मजबूत है और यह कदम उठाने के लिए पर्याप्त शुद्ध और प्रसन्न है. यदि वह ऐसा नहीं है, तो वह पृथ्वी पर बोझ है. जितनी जल्दी वह चला जाए भारतीय माहौल को साफ कर दे, उसके लिए बेहतर होगा. मैं भगवान के हाथों में हूं. बल्कि, उन्हें इस प्रकाश को अंदर की ओर मोड़ना चाहिए, क्योंकि यह अनिवार्य रूप से हम सभी के लिए परीक्षण का समय है. जो लोग अपने कर्तव्य के पद पर बने रहते हैं और इसे पूरी लगन से और अच्छे तरीके से निभाते हैं, अब इससे कहीं ज्यादा, मेरी हर तरह से मदद करेंगे. व्रत आत्म शुद्धि की एक प्रक्रिया है.

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