दशहरा 2018: शिव तांडव स्तोत्र के रचयिता थे रावण, जानें 10 हैरान कर देने वाली बातें

Dusshera 2018: इस वर्ष दशहरा 19 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. दशहरा को हम बुराई पर अच्छाई की जीत और अहंकार का वध मानते हैं. हर वर्ष रावण दहन के साथ ही हम समाज में इस सीख को स्थापित रखने की कोशिश करते हैं लेकिन रावण के बारे में कुछ बाते ऐसी भी है, जिन्हें जानने के बाद आप हैरान हो जाएंगे.
वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण पुलस्त्य मुनि का पोते अर्थात उनके पुत्र विश्वश्रवा के पुत्र थे. विश्वश्रवा की वरवर्णिनी और दैत्य सुमाली पुत्री कैकसी से विवाह किया. वरवर्णिनी और विश्वश्रवा के पुत्र कुबेर थे तथा विश्वश्रवा और कैकसी के पुत्र रावण और कुम्भकर्ण थे.


रावण काफी मायावी थे और इंद्रजाल (जादू), तंत्र, सम्मोहन और तरह-तरह की विद्या जानते थे.
रावण छह दर्शन और चारों वेद के ज्ञानी थे, जिस वजह से उन्हें दसकंठी भी कहा जाता था.
रावण ने अमृत्व प्राप्ति के उद्देश्य से भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या कर वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा ने उनके इस वरदान को न मानते हुए कहा कि तुम्हारा जीवन नाभि में स्थित रहेगा.
रावण ने सुंबा और बालीद्वीप को जीतकर अंगद्वीप, मलयद्वीप, वराहद्वीप, शंखद्वीप, कुशद्वीप, यवद्वीप और आंध्रालय पर विजय प्राप्त की. इसके बाद रावण ने अपने सौतेले भाई धनपति कुबेर से उसकी लंका भी जीत ली.
वर्तमान के हिसाब से रावण का राज इंडोनेशिया, मलेशिया, बर्मा, दक्षिण भारत के कुछ राज्य और श्रीलंका पर था. कुबेर से लंका छीनने के साथ ही रावण ने उसके मायावी पुष्पक विमान को भी छीन लिया. जो कि आकार में छोटा या बड़ा और मन की गति से उड़ सकता था.


रावण प्रकांड विद्वान थे और शिव तांडव स्तोत्र, अरुण संहिता, रावण संहिता और लाल किताब (जन्म कुण्डली, सामुद्रिक शास्त्र, हस्तरेखा का मिश्रण) की रचना की.
एक बार रावण ने कैलाश को उठाना चाहा, लेकिन भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से दबाव बनाकर कैलाश को वहीं पर स्थित कर दिया, जिस वजह से रावण का हाथ कैलाश पर्वत के नीचे आ गया. उस समय भगवान शिव से माफी मांगते हुए उन्होनें शिव तांडव स्तोत्र का पाठ किया.
रावण में कुछ विनम्रता और अच्छाई के गुण भी थे. जो कि राम द्वारा रामेश्वरम् में शिवलिंग स्थापना के समय पूजा करने का आमंत्रण स्वीकार करने और लक्ष्मण के मूर्छित होने पर लंका के विख्यात आयुर्वेदाचार्य सुषेण को इलाज करने की अनुमति देने से देखा जा सकता है.
रावण बलशाली होने के साथ स्त्री आदर भी जानते थे. सीता माता को बंधक बनाकर रखने के बावजूद उनकी इच्छा के विरुद्ध छूने की भी कोशिश नहीं की. रामायण में वर्णित श्लोकों के आधार पर ऐसा मान्यता है कि रावण का शव श्रीलंका की रानागिल की गुफा में सुरक्षित रखा गया है. हालांकि इस बात की अभी पुष्टि नहीं हुई है.

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