हेला रे हेला ,गोविंदा आला.



हेला रे हेला ,गोविंदा आला.
हेला रे हेला ,गोविंदा आला,
मटकी फोड़ो, माखन चोरो,
आज बाल दल आया है,
श्याम टोली लड़कों की मस्त बनी,
गोविंदा आला की गूंज तनी,
पवन में मुरली की धुन बजी,
पैरों में लेज़म की ताल बजी,
हेला रे हेला ,गोविंदा आला.
दूर -दूर मटकी है, ऊँची- ऊँची मटकी है,
जोश भी कम नहीं,शोर भी कम नहीं,
यही है मस्त धुन का हेला,
झट बन गई टोली,
रंगों ने सजाई होली,
उपर से रंग है,
नीचे से चंग है,
बीच में बाल ग्वाल,
मस्तों की टोली है,
हेला रे हेला ,गोविंदा आला.
आज मटकी फोड़ेंगे, बस यही बोली है,
झटपट एक चढ़ा, एक के ऊपर,
ऊपर है श्याम,हाथ में श्रीफल,
एक दिया,दो दिया,
मटकों का हुआ हाल बेहाल,
फूट गई मटकी, चुरा लिया माखन,
गूंज फिर से उठी है,
हेला रे हेला ,गोविंदा आला
…..डॉ. किरन


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