हिंदी दिवस

हिंदी दिवस

हिंदी दिवस पर बात शुरू करते हुए सबसे पहले समझना होगा कि कोई  भाषा केवल संचार का माध्यम मात्र  ही नहीं होती है. एक भाषा अपने आप में एक पूरी संस्कृति समेटे हुए होती है और सभ्यताओं के परिवर्तन के साथ साथ, जब जब सांस्कृतिक परिवर्तन दृष्टिगोचर होता है तो  यह परिवर्तन भाषा में उसके विकास और संवर्धन में देखा जा सकता है.

आजकल जहां भी कोई भी हिंदी से सम्बंधित गतिविधि होती है या कोई हिंदी सम्मलेन ! वहाँ हिंदी को लेकर चिंता व्यक्त की जाती है लेकिन हमें समझना होगा कि हिंदी  करीब ७७% भारतीयों द्वारा बोली और समझी जाने वाली भाषा है इसकी जड़ें जनमानस में गहरी हैं.  यह एक ऐसी भाषा है जो वर्तमान  परिस्थितियों के साथ और मज़बूत हो रही है. पूरी दुनिया की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में चतुर्थ स्थान रखने वाली हिंदी देवनागरी लिपि है. हिंदी ने अंग्रेजी की दीवारों में तो सेंध लगाई ही है साथ ही प्रादेशिक भाषा भाषियों में भी जनसम्पर्क की भाषा बनकर तेजी से उभर रही है.

जिस देश केप्रधानमंत्री गुजराती मातृभाषा के होने के बावजूद हिंदी पर अपना पूर्ण अधिकार रखें, राष्ट्रीय वार्ताओं और सम्मेलनों में हिंदी को ही अपनी बात कहने का माध्यम बनाएं, वहाँ हिंदी किस रूप में स्थापित है और हिंदी का क्या महत्व है आसानी से समझा जा सकता है.

गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने एक प्रश्न के जवाब में प्रसिद्ध लेखक श्री जैनेन्द्र से कहा था हिंदी को पूरी तरह से समझ न पाने के कारण मुझे संस्कृत के शब्दों का प्रयोग करना पड़ा. आपके पास हिंदी का विशाल भण्डार है और देश के लोगों के करीब भी यही भाषा है. आप इसी भाषा का प्रयोग करें”. हिंदी विश्व की एकमात्र उन भाषाओँ में शामिल है जिसका शब्दकोष अत्यंत विस्तारित है. किसी भी प्रकार की भावना या विचारों को व्यक्त करना हो, यहां शब्दों का अतुलनीय  भण्डार उपलब्ध है.

अद्भुत वैज्ञानिक भाषा है यह. देवनागरीलिपि से उत्तपन्न इस भाषा का अपना ध्वनि शास्त्र भी उपलब्ध है. किस शब्द को किस प्रकार बोलना है, उसका उच्चारण कहाँ से तथा किस प्रकार से  किया जाना है, यह भाषाई बोध हिंदी को उच्चतम स्तर पर पहुंचाता है तथा इसकी लिपि देवनागरी है यही कारण है कि इस भाषा के उच्चारण के समय अंग्रेजी की तरह कोई शब्द साइलेंट नहीं होता है. सभी अक्षरों का उच्चारण घोष स्पष्ट्तः सुनाई देता है.

 भारतेन्दु हरिश्चंद्र , महावीर प्रसाद द्विवेदी हज़ारी प्रसाद द्विवेदी, मैथिलीशरण गुप्त प्रेमचंद जयशंकर प्रसाद , जैनेन्द्र , अज्ञेय, निराला , माखनलाल चतुर्वेदी , महादेवी , सुभद्रा कुमारी  चौहान , हरिवंश राय बच्चन , धर्मवीर भारती ने भी अपने लेखन और पठन – पाठन से हिंदी के गौरव को बढ़ाया. हिंदी को लेकर कई बार सुनने में आता है कि हिंदी अति साहित्यिक भाषा है वास्तविक रूप में देखा जाए तो हिंदी का  शब्दकोष अति विशाल होने के कारण   यह अलग अलग स्तरों पर कार्य करने में सक्षम भाषा है. साहित्यिक भाषा होने के साथ साथ यह कार्यालयी और आम जन की भाषा भी है.  मीडिया भी हिंदी प्रभाव से अछूता नहीं रहा है किसी भी भाषा का व्यक्ति हो उसे फिल्में हिंदी में ही देखकर संतुष्टि मिलती है. यहां तक की प्रादेशिक भाषाई फिल्मों में कार्य करने वाले कलाकार भी बॉलीवुड से जुड़कर अपने आप को देश की अधिकतम जनता में अपनी  पहचान बनाना चाहते  हैं.
    हिंदी दिवस गर्व से न केवल मनाएं वरन इस पर गौरवान्वित होने का कोई अवसर न छोड़ें.  इसी लिए हिंदी हिन्दुस्तान की धड़कन कहलाती है.
डॉ.किरन संजीव


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