स्वप्निल परमार

अभी जमीन पर हवा से बातें करने वाले स्वप्निल भविष्य में आसमान में रहकर हवाओं का सीना चीरते हुए उन पर अपना नाम लिखना चाहते हैं–अविनाश मिश्रा
हवा से बातें करना , हवा की तेज़ तरंगों को चीरते हुए आगे बढ़ना यही है हमारे इस बार के बातचीत के बच्चे स्वप्निल का शौक.
गुजरात में जन्मे और सूरत में रहने वाले स्वप्निल के पिता एस्सार कंपनी में नौकरी करते हैं उनकी माता गृहिणी है स्वप्निल बताते हैं बचपन से ही उन्हें सभी खेलों में सर्वाधिक तौर पर दौड़ना पसंद था. जब सभी बच्चे अलग अलग खेलों को खेलने की बात करते वे दौड़ने को ही अपने प्रिय खेल के रूप में चुनते. जब स्कूल में पढाई के दौरान खेलों को लेकर थोड़ी समझ बनी तब उन्होंने देखा कि कई विद्यार्थी दौड़ की प्रतियोगिता में भाग लेते हैं ये देखकर उनकी भी इच्छा हुई और उन्होंने भी ऐसी एक प्रतियोगिता में अपना नाम लिखा दिया इस प्रतियोगिता में प्रथम आने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और आखिरकार वे दौड़ की उस प्रतियोगिता में प्रथम आये बस तभी से वे दौड़ रहे हैं.
 सर्वप्रथम विद्यालय से उनका चयन जिला स्तर की  दौड़ प्रतियोगिता के लिए हुआ यहाँ भी वे पूरे सूरत जिले में प्रथम आए इसके बाद उन्होंने राज्य स्तर प्रतियोगिता में चयनित होने पर सूरत का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रथम स्थान ग्रहण किया.
अंततः उनके सपनों को सोपान मिला और उनका चयन राष्ट्रीय स्तर पर गुजरात का प्रतिनिधित्व करने के लिए हुआ है आज वो इसी के लिए कड़ी मेहनत और परिश्रम कर रहे हैं स्वप्निल के भविष्य के सपने के बारे में पूछने पर वे कहते हैं  वे वायुसेना में जाना चाहते हैं उन्हें पॉयलट बनकर हवा से बातें करना है अभी जमीन पर हवा से बातें करने वाले स्वप्निल भविष्य में आसमान में रहकर हवाओं का सीना चीरते हुए उन पर अपना नाम लिखना चाहते हैं वे वायुसेना के पॉयलट के रूप में देश सेवा को अपना सबसे बड़ा लक्ष्य बताते हैं वे अपना खाली समय किताबें पढ़कर बिताते हैं टी. वी. देखना उन्हें बिलकुल पसंद नहीं है वे इसे समय की बर्बादी मानते हैं गुजराती खाने के शौक़ीन स्वप्निल स्वभाव से गम्भीर और शिक्षकों के पसंदीदा विद्यार्थियों में शामिल हैं
स्वप्निल को अपना आसमान अवश्य मिले वे जीवन में आसमान की ऊंचाइयों को छुएँ इस शुभकामना  के साथ हमने उनसे बातचीत समाप्त की.

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