सीख

पूरे दिन खेलने के शौकीन विभु को खेल के सामने कुछ भी दिखाई नहीं देता था ,लेकिन एक छोटी सी घटना ने उसे सीख दे दी. – डॉ. डी. एन . गुप्ता

विभु , रोता हुआ घर में आया, माँ मेरे पैरो में बहुत दर्द हो रहा है. ठीक है, अब घर में आ जाओ , थोड़ा आराम से बैठो, फिर हाथ मुँह धोकर खाना खाकर सो जाना, माँ बोली,
इतनी जल्दी माँ ?
जल्दी कहाँ बेटा, 7 बज रहे हैं 9 बजे तक तुम्हें सो जाना चाहिए.
विभु ने कोई उत्तर नहीं दिया वह चुपचाप टी.वी. के सामने बैठ गया. अभी उसे बैठे हुए मुश्किल से पांच मिनट का समय हुआ होगा तभी उसके दोस्त बेटू ने दरवाजे पर आकर पूछा, विभु खेलेगा ?
माँ, मैं खेलने जा रहा हुँ कहकर विभु तुरंत दरवाजे की तरफ चल पड़ा माँ ने कहा बेटा, अभी तो आपके पैरों में दर्द हो रहा था. ठीक है, मैं नहीं जा रहा, बस, अब नहीं जा रहा, विभु थोड़ा गुस्से में आकर बोला,
ठीक है थोड़ी देर खेल आओ, जल्दी आ जाना, माँ बोली.
नहीं, नहीं जा रहा मैं, बेटू मैं नहीं आ रहा, तू जा, विभु बोला.
बेटा, इसमें नाराज होने की क्या बात है. आपके पैरों में दर्द हो रहा था इसलिए मैं कह रही थी.
चल न प्लीज, बेटू भी बोला.
ठीक है जा रहा हुँ, विभु बोला. ये रोज की समस्या थी विभु पूरे दिन खेलता. स्कूल से आकर फटाफट अपना होमवर्क पूरा करता और खेलने चला जाता.
वो शाम को नाश्ता भी नहीं करता था. रात को आठ बजे से पहले वह घर नहीं आता था स्कूल के दिनों में तो ठीक था. लेकिन कोई छुट्टी का दिन हो तो वह सुबह नौ बजे से खेलने चला जाता दिन में कई बार आवाज देने पर, गुस्सा होकर खाना खाने आता और जल्दी-जल्दी थोड़ा सा खाकर भाग जाता. पूरे दिन खेलता रहता, उसके कुछ दोस्त सुबह खेलते, कुछ दोपहर को और कुछ सिर्फ शाम को. लेकिन वह सबसे साथ पूरे दिन खेलता जिससे वह बहुत थक जाता रात को उसके पैरों में बहुत तेज दर्द भी होता.
माँ को कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करे ? ऐसे ही एक दिन शुक्रवार को स्कूल से आते ही विभु बोला कल और परसों दोनों दिन मेरी छुट्टी है. आपको होमवर्क तो मिला होगा माँ ने पूछा.
हाँ , लेकिन मैं कर लुगां. अभी मैं खेलने जा रहा हुँ .
अभी तो आप स्कूल से आए हैं पहले कुछ खा पी लो, कपड़े बदलो फिर खेलना. मैं कपड़े बदल लेता हुँ लेकिन मुझे भूख नहीं है इसलिए मैं कुछ खाऊंगा नहीं, विभू ने माँ की बात का उत्तर दिया.
फिर जल्दी -जल्दी कपड़े बदले.
आपके साथ कौन खेलेगा ? माँ ने पूछा
रघु घर पर है वही खेलेगा, कहता हुआ विभु नीचे सीढिय़ों से उतर गया.
विभु पांचवी कक्षा में पढऩे वाला विद्यार्थी था वह पढ़ाई में होशियार था और अपना होमवर्क भी नियमित करता था और एक नौ मंजिला इमारत में रहता था जहाँ उसकी आयु के बहुत से बच्चे थे.
रघु तीन बजे तक विभु के साथ खेला फिर अपने घर चला गया. तब तक खुशी, गार्गी और नीरद भी  स्कूल से आ गए थे विभु अब उनके साथ खेलने लगा. थोड़ी देर देर बाद माँ ने खाना खाने को आवाज लगाई तो उसने घर आकर जल्दी से थोड़ा बहुत खाना खाया और चला गया. विभु रात आठ बजे खेलकर घर आया. अगले दिन शनिवार को वह सुबह से ही खेलने चला गया माँ ने होमवर्क की याद दिलाई तो बोला माँ कल कर लुंगा. इसी प्रकार रविवार को भी विभु खेल में व्यस्त रहा रात आठ बजे जब वह घर आया तब खाना खाते हुए रात के 9.30 बज गए थे विभु के पैरों में बहुत दर्द हो रहा था तभी उसे याद आया कि उसका होमवर्क बाकी था.
अब होमवर्क करने बैठा तो उसे रात के बारह बज गए. जब वो सोने गया तो पैर दर्द की वजह से वह कराह रहा था. अगले दिन सुबह उससे उठा ही नहीं जा रहा था. जबकी आज उसके स्कूल में उसके मनपसंद खेल दौड़ प्रतियोगिता का सलैक्शन था. वह स्कूल जा नहीं पाया और उसका सलैक्शन नहीं हुआ. उसे बहुत दुख का अनुभव हो रहा था. माँ ने उसे प्यार से समझाया खेलना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है लेकिन पूरे दिन खेलना नुकसानदायक हो सकता है. समय से खाना और आराम भी शरीर के स्वस्थ रहने और पढ़ाई में आगे रहने के लिए आवश्यक है. विभु को माँ की बात अच्छी तरह समझ आ गई थी उसने माँ से प्रॉमिस किया अब वो समय से खेलगा, खाएगा और पढ़ेगा.
माँ ने उसे प्यार से गले लगा लिया.

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