सही लक्ष्य – कहानी


प्रतीक बहुत खुश था. आज विद्यालय में शहर के विद्यालयों के मध्य होने वाली अंर्तविद्यालय प्रतियोगिताओं के रिएलिटी शो के लिए प्रतिभागियों के नाम की उदघोषणा की गई थी. उसके नाम को भी चुना गया था. यह उसके लिए बहुत ही खुशी की बात थी. उसने इसके लिए खूब मेहनत की थी. वह नृत्य प्रतियोगिता के लिए चुना गया था. वह अपने विद्यालय की तरफ से इस प्रतियोगिता के लिए चुना जाने वाला अकेला प्रतिभागी था. वह दौड़ता हुआ घर पहुंचा और अपनी मां अनीता को ये खुशखबरी सुनाई. मां ने खुशी से उसे प्यार किया और खाना परस दिया. प्रतीक दाल और सेम आलू की सब्जी देखकर बोला मैं ये नहीं खाऊंगा. मां ने उसे समझाया अगर तुम अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखोगे तो कैसे परफॉर्म करोगे.

प्रतीक को मां की बात समझ में आ गई.उसने हाथ मुंह धोकर घर के कपड़े पहने और अच्छी तरह से खाना खाया. खाना खाकर वह अपनी दीदी के पास बैठकर उनसे बात करने लगा. दीदी मेघना अपना विद्यालय का गृहकार्य कर रही थी. वह बोलने लगा-”दीदी, देखना मैं एक बड़ा डांसिंग स्टार बनुंगा. फिर मैं दूसरों को सिखाने लगूँगा. मैं अपनी एक डांस एकेडमी खोलुंगा, मै सबसे छोटा कोरियोग्राफर टीचर बन जाऊंगा. पूरी दुनिया में मेरा नाम होगा.
उसकी बातें सुनकर दीदी मुस्कुराने लगी, बोली-‘पहले आज की पढ़ाई करो. आपकी परीक्षाएं आने वाली हैं.लेकिन प्रतीक ने इसे अनसुना कर दिया. वो शाम को इंतजार करने लगा, जब वो ये बात अपने सभी दोस्तों को जाकर बताएगा.
अब घर पर हर समय डांस शो की बातें होने लगीं. पढ़ाई और होमवर्क को बिल्कुल भुला दिया गया. डांस टीचर के अलावा सभी टीचर उसकी स्कूल डायरी में उसकी शिकायत लिखकर घर भेजने लगे. उसकी सभी विषयों की नोटबुक में टीचर लाल स्याही से नोट डालने लगीं थीं.
प्रतीक इस सबसे उदासीन रहता और विद्यालय से आने के बाद वह अपने ही कमरे में रहता था. उसका पढ़ाई का कमरा अब डांस रिहर्सल रूम में बदल गया था. यहां से उसने पढ़ने की मेज भी हटा दी थी ताकि नृत्य के अभ्यास के लिए उसे और अधिक जगह मिल सके.वह आइने के सामने नाचता और स्वयं को निहारता रहता.
२० दिनों के पश्चात, प्रतीक की मम्मी अनीता के पास प्रतियोगिता के आयोजकों का फोन आया. उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि राहुल को इसके लिए कैम्प में कम से कम एक माह रहना होगा. उन्होंने सोचा था कि ये कार्यक्रम एक दिन का होगा. विद्यालय में वार्षिक परीक्षाएं आने वाली थीं. मां सोच में डूब गईं. प्रतीक को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए मना करना आसान नहीं था. ऐसा करना उसके हौसले को तोड़ सकता था और उसकी संवेदनाओं को चोट पहुंचा सकता था. आखिरकार उन्होंने एक योजना बनाई. अगले दिन प्रतीक के विद्यालय से आते ही मां ने उन्हें पानी का गिलास देते हुए पूछा-”तुम्हारी वार्षिक परीक्षा कब है बेटा ?
”अप्रैल में,प्रतीक लापरवाही से बोला.
”इस का मतलब है हमारे पास केवल डेढ़ माह हैं, तुम अच्छी तैयारी कैसे करोगे?
”आप परेशान मत होओ मां, मैं पास हो जाऊंगा.
”सिर्फ पास, बेटा! तुम तो हमेशा अपनी कक्षा के अव्वल विद्यार्थियों में जगह बनाते हो?
”मां, आप तो जानती हैं कि मैं प्रतियोगिता के लिए कितनी मेहनत कर रहा हूं. इस लक्ष्य के सामने कक्षा में रैंक लाना या अव्वल आना व्यर्थ है. आपको मालूम है मां ? प्रतियोगिता का प्रथम इनाम पांच लाख रूपए नगद और एक कार है. मां, देखना जल्दी ही हम अमीर हो जाएंगे और हमारे पास कार भी होगी.
”तुम कैसे जानते हो कि तुम्हें प्रथम पुरस्कार ही मिलेगा ?
”प्रत्येक प्रतियोगी ऐसा ही सोचता है. यदि तुम्हें पहला इनाम नहीं मिला, तो तुम क्या करोगे ? प्रतीक सोचने लगा, बोला-”मैं अगले वर्ष फिर प्रयास करूंगा .
”अच्छी बात है, मम्मी बोली. लेकिन यदि तुम विद्यालय की परीक्षा में फेल हो जाओगे तो क्या करोगे?
”फेल, ये कैसे हो सकता है?
”मैंने तुम्हारी सभी विषयों की नोटबुक देखी है. तुम्हारी परफॉरमेंस से टीचर खुश नहीं है. ” अगर अब तुम खूब मेहनत नहीं करोगे तो निश्चित ही फेल हो जाओगे.
”जरा सोचो, पूरे एक वर्ष तक एक ही कक्षा में अपने से एक वर्ष छोटे बच्चों के साथ बैठने में कैसा लगेगा? क्या तुम्हें शर्म महसूस नही होगी? जब तुम्हारे साथ के सभी दोस्त तुम से एक कक्षा आगे चले जाएंगे. प्रतीक घबरा गया. वो थोड़ा डरकर बोला-”मम्मी, क्या ऐसा हो जाएगा? ”हां, बेटा ऐसा हर उस विद्यार्थी के साथ होता है जो पढ़ाई में मेहनत नहीं करते हैं. प्रतियोगता में भाग लेना अच्छी बात है लेकिन अपनी पढ़ाई की कीमत पर नहीं. ये रियलिटी शो हर वर्ष होते हैं. क्या तुम इनके लिए अपने विद्यालय का एक साल बरबाद कर सकते हो? ”लेकिन मम्मी, पांच लाख रूपए और कार? ” नृ़त्य प्रतियोगिता तुम्हारी परफॉरमेंस पर निर्भर है. तुम जितना ज्यादा अभ्यास करोगे, जीतने का तुम्हारे पास और ज्यादा बढिय़ा अवसर आएगा.
”लेकिन यदि तुम पढ़ाई में कठिन मेहनत नहीं करोगे तो अगले वर्ष नई कक्षा में नहीं जा पाओगे और अपने साथियों से बिछड़ जाओगे इसी कक्षा में रह जाओगे. ”बेटा, हमें उस पांच लाख रूपयों की जरूरत नहीं है.”ज्यादा महत्वपूर्ण है पढ़ाई. रूपए तो खर्च हो जाते हैं. लेकिन ज्ञान कोई नहीं छीन सकता है.
”तुम अगले वर्ष की नृत्य प्रतियोगिता के लिए तैयारी करो. तुम्हारी वार्षिक परीक्षा समाप्त होने के बाद मैं तुम्हें स्वयं डांस एकेडमी में ले जाऊंगी. तुम्हारे पास तैयारी के लिए पूरा एक वर्ष रहेगा और अभी तुम वार्षिक परीक्षा की तैयारी करो.
राहुल अपनी मां के गले लग गया. वह समझ गया था कि अभी उसका सही लक्ष्य क्या है—-
डा. डी.एन.गुप्ता

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