श्रृंगार आभूषणों से

है ये रूत मुहब्बत की या मेरे ख्यालों का है कारवां
कि नजरें तुझसे हटती नहीं और खामोश है ये जुबां…
चुपके से हाल-ए-दिल तुजे सुनाना चाहता हूं….है
कितनी कशिश तुझमें ये तुझे बताना चाहता हूं… 
आभूषणों में तूने जो पहना है सितारों का नूर, इनमें जो बात है, वो किसी में नहीं हुजूर… है इन्हीं से रौशन मेरी चाहत का जहां, है तेरे चेहरे का ये श्रंृगार या तेरे आभूषणों में ही सिमट आई है ये कहकशां….
आभूषणों को पहनना सिर्फ परंपरा ही नहीं वरन श्रृंगार भी है. सदियों से चला आ रहा आभूषणों का क्रेज महिलाओं में आज भी बरकरार है.
आभूषणों की खरीदारी दीवाली की तैयारी का महत्वपूर्ण अंग है. यूं तो बाजार में आभूषणों की बड़ी श्रृंखला मौजूद है जिसमें सोने के आभूषणों के साथ चांदी एवं इमिटेशन आभूषण भी शामिल हैं परंतु दीवाली पर सोने की खरीदारी शुभ मानी जाती है. इसलिए इस समय स्वर्णाभूषणों की मांग बाजार में बढ़ जाती है. वैसे भी सोना कीमती वस्तुओं में शामिल है इसलिए इसकी खरीदारी इन्वेस्टमेंट के तौर पर की जाती है. साथ ही इसे पहनकर महिलाएं सामाजिक तौर पर संतुष्टि महसूस करती हैं. सोने के आभूषणों में जहां पारंपरिक, भारी और जड़ाऊ गहने अभी भी अपना स्थान बनाए हुए हैं. वहीं डिजाइनर ज्वेलरी भी अपनी जगह बना रही है इस प्रकार के आभूषणों में आधुनिकता का टच भी आ गया है. आज हल्की फुल्की ज्वेलरी पहनने का फैशन जोरों पर है. इसमें कई नए प्रयोग भी किए जा रहे हैं. ये मूल्य में पारंपरिक भारी गहनों से सस्ते होते हैं. हल्के और डिजाइनर होने के कारण ये प्रत्येक अवसर पर पहने जा सकते हैं फिर चाहे शादी का मौका हो या दीवाली पूजन या पार्टी का अवसर, हर मौके पर खूबसूरत लगते हैं. ये गहने हल्के फुल्के नजर आने के कारण हर आयु की महिला पर सुंदर लगते हैं. चाहे इन्हें कोई लड़की पहने या नवविवाहिता या चालीस की आयु के पास की महिला, ये सभी की आयु की अनुरूप उन पर सजते हैं. मोती और नगों का प्रयोग इन आभूषणों को खूबसूरत बनाता है. रंगीन मोतियों और नगों का प्रयोग इन्हें सभी वस्त्रों के साथ मैचिंग भी बनाता है. ये ज्वेलरी पारंपरिक डिजाइनों एवं प्राकृतिक डिजाइनों से प्रेरित होती है. इनमें फ्लोरा, फ्लॉवर और लैंडस्केप की डिजाइनें उकेरी जाती हैं.
स्वर्णाभूषण के साथ साथ चांदी के आभूषण भी महिलाओं में लोकप्रिय है. इन पर सोने की पॉलिश करके इन्हें और आकर्षक बनाया जाता है. ये दिखने में सोने जैसी लगती हंै साथ ही इनकी कीमत कम होने के कारण ये आभूषणों के संग्रह को बढ़ाने में महत्वपूर्ण होती हैं.
इमिटेशन ज्वेलरी भी अपनी आधुनिक डिजाइनों और कम मूल्य के कारण काफी लोकप्रिय हो रही है. इनमें कई नए प्रयोग भी किए जा रहे हैं. इनमें नगों और मोतियों के साथ साथ लकड़ी के मोती भी प्रयोग किए जाते हैं. इनको पारंपरिक आदिवासी एवं प्राकृतिक डिजाइनों से सजाया जाता है.
आभूषण कोई भी पहने जाएं परंतु उन्हें खरीदते समय उपयुक्त सावधानी बरतनी अति आवश्यक है. सोने के आभूषण खरीदते समय उसकी गुणवत्ता का ध्यान जरूर रखें. हॉलमार्क वाली ज्वेलरी ही
खरीदें. इन्हें प्रतिष्ठित दुकानों से ही खरीदें. कोशिश करें कि उनकी डिजाइन आप अपने अनुकूल चयन करें. कई बार विक्रेता की बातों में आकर वो डिजाइन भी खरीद लेते हैं जो बाद में परेशानी का कारण बन जाती है. रोजमर्रा में पहनने वाले आभूषण सामान्य डिजाइन के होने चाहिए उसमें नगों का प्रयोग न हो या कम हो तो बेहतर होता है साथ ही ये आभूषण एक तरफ से खोखले हो तो इनमें लाख भरवा लें जिससे कि उनकी मजबूती बनी रहेगी. जन डिजाइनों में बारिक नक्काशी हों फूल पत्तियां हों, गढ्ढे हों उन्हें रोजमर्रा में न पहनें. इनमें गंदगी भर सकती है ये टूट भी सकते हैं. इमिटेशन ज्वेलरी खरीदते समय ध्यान रखें कि वह आपकी त्वचा को एलर्जी न पहुंचाती हो.
इस दीवाली कोई भी आभूषण पहनें और अपने श्रृंगार को पूर्ण करें. जन डिजाइनों में बारिक नक्काशी हों फूल पत्तियां हों, गढ्ढे हों उन्हें रोजमर्रा में न पहनें. इनमें गंदगी भर सकती है ये टूट भी सकते हैं. इमिटेशन ज्वेलरी खरीदते समय ध्यान रखें कि वह आपकी त्वचा को एलर्जी न पहुंचाती हो.
इस दीवाली कोई भी आभूषण पहनें और अपने श्रृंगार को पूर्ण करें.

  
परेश

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