विश्वनाथ गौरीशंकर पचेरिया

मानव एक सामाजिक प्राणी है वह जहां भी रहता है. एक समाज की बगिया का निर्माण अपने चारों ओर कर लेता है. देश भर के भिन्न भिन्न क्षेत्रों से आए लोग सूरत में स्थापित हो चुके हैं. उन्होंने सूरत को अपनी कर्म भूमि बना लिया है लेकिन साथ में जुड़े रहे हैं अपने समाज, अपनी संस्कृति से. ऐसे समाजों में एक बड़ा और उल्लेखनीय नाम है अग्रवाल समाज का. मूल रूप से वैश्य पृष्ठभूमि पर आधारित ये समाज और इसके सदस्य सूरत में एक वटवृक्ष की तरह पल्लवित हो चुके हैं. यह समाज अपनी समाजिक गतिविधियों के कारण सूरत वासियों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है. इन सामाजिक गतिविधियों में अग्रणी नाम है विश्वनाथ गौरीशंकर पचेरिया का.

वे मूल रूप से राजस्थान के झुंझनू जिले के सूरजगढ़ गांव के निवासी हैं. बचपन से ही शिक्षा के साथ वे सहशैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय थे, कॉलेज शिक्षा के दौरान वे राजनीति में सक्रिय हो गए और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला अध्यक्ष बनाए गए. 1992 में वे सूरत आए यहां के शांत और व्यवसायिक वातावरण ने उन्हें इसे अपनी कर्मभूमि बनाने के लिए प्रोत्साहित किया. पवन कूरियर की स्थापना और सफलता उनकी व्यवसायिक सफलता रही. व्यवसाय में व्यस्तता के बावजूद उन्होंने अपने आप को समाज में सक्रिय रखा. 1994 में वे अग्रवाल समाज से एक सदस्य के तौर पर जुड़े और उनकी सामाजिक सक्रियता को देखते हुए उन्हें 1998 में कोषाध्यक्ष पद पर चयनित किया गया. इस पद पर उन्होंने सतत रूप से तीन वर्ष तक कार्य किया. इसके साथ वर्ष 2000 में उन्हें अग्रवाल विद्या विहार के ट्रस्टी के तौर पर चयनित किया गया. वर्तमान में वे अग्रवाल समाज ट्रस्ट के मंत्री हैं. वर्ष भर ये ट्रस्ट कई सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों संचालित करता है जिसमें निशुल्क नेत्र परीक्षण, रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच शिविर, सामाजिक मेले, उत्सव, खेल एवं अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन, शहर के विकास में सरकार के साथ सहयोगी गतिविधियां शामिल हैं. वे राजस्थानी युवा संघ के साथ मिलकर कई सामाजिक गतिविधियों को संचालित करते हैं. छायड़ों के साथ मिलकर अग्रवाल समाज ने परवत पाटिया क्षेत्र में अस्पताल प्रारंभ किया है जहां जरूरतमंद लोगों का इलाज किया जाता है. अपने राष्ट्रीय दृष्टिकोण के तहत इनके कार्यकाल में समाज ने प्रधानमंत्री की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना का साथ देने के लिए अग्रवाल विद्या विहार में 127 बालिकाओं को निशुल्क शिक्षा देने का निर्णय किया है. जिसकी शुल्क राशि लगभग 35 लाख रूपए है.

वे समय नियोजन किस प्रकार करते हैं. पूछने पर बताते हैं परिवार का सहयोग उनके कार्यों की सफलता का बड़ा कारण है. उनकी मां और पत्नी राजश्री भी समाज के कार्यक्रमों में उत्साहपू्र्वक भाग लेते हैं. पत्नी सभी कार्यक्रमों में उनके कार्य संपादन में भी सहयोग देती हैं और उत्साह वर्धन करती हैं. पुत्र दिव्येश जो कि बीबीए की पढ़ाई कर रहा है वो भी सामाजिक कार्यक्रम और गतिविधियों में बढ़चढक़र सक्रिय सहयोग देता है. उनका दूसरा पुत्र अभी विद्यालय में अध्ययनरत है. पचेरिया जी राजनीति में भी सक्रिय है. भारतीय जनता पार्टी के वे सक्रिय कार्यकर्ता हैं और समय समय पर उसकी सभी गतिविधियों में सक्रिय सहयोग प्रदान करते हैं. पचेरिया जी के सामाजिक, राजनीतिक जीवन के लिए हमारी महक की ओर से ढेरों शुभकामनाओं के साथ हमने उनसे विदा ली.

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