रिया पटेल

ना रूक कभी, ना थम कभी,कांटों को पार कर, बस चल यूँ हीं, बस चल यूँ ही,

राहों में आए जो भी कठिनाई, हौंसलों की उड़ान भर यूँ ही, बस चल यूँ ही,

लड़की हो या लड़के, जीवन के सभी क्षेत्र, सभी के लिए खुले हुए हैं. सिर्फ लड़की हैं इसलिए उड़ान छोटी नहीं रहेगी. ऊंची उड़ान भरना है. आसमान को छूना है. यही जज्बा है प्रवीणा और दिनेश पटेल की पुत्री रिया पटेल का.

सोलह वर्षीय रिया डिवाइन चाइल्ड स्कूल में पढ़ती हैं. पढ़ाई के साथ उनकी रूचि है कराटे में.अपने विद्यालय के कोच मिहिर गिलिटवाला के मार्गदर्शन और माता पिता के सहयोग से कराटे प्रतियोगिताओं में अपनी सफलता के सफर का प्रारंभ रिया ने तकरीबन दो वर्ष पूर्व किया.इसकी शुरूआत उन्होंने सूरत की जिला स्तरीय कराटे प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर की और फिर ये सफर न रूकने वाला सफर बन गया. पिछले दो वर्षों में उन्होंने अनगिनत प्रतियोगिताओं में पदक अपने नाम किए. राज्यस्तरीय कराटे प्रतियोगिता में सिल्वर मैडल जीतने के दौरान उनके हाथ में फ्रक्चर भी हुआ परंतु रिया इससे घबराई नहीं वरन ठीक होने के पश्चात दुगुने उत्साह से पुन: इसमें जुट गई.

रिया को वर्ल्ड शॉटगन फैडरेशन डो, इंडिया के टूर्नामेंट मे भी चयनित किया गया. जहां उन्होंने भिन्न भिन्न प्रतियोगिताओं में तीन कांस्य पदक जीते. रिया कराटे या खेलों में ही नहीं बल्कि वाद विवाद प्रतियोगिताओं में भी रूचि रखती हैं. साथ ही अपनी पढ़ाई को भी पूरा समय देती हैं.

रिया को गुजराती खाना बहुत पसंद है. वे पूरा भोजन लेती हैं. कम से कम दो घंटे वे नियमित रूप से कराटे का अभ्यास करती हैं. भविष्य में डॉक्टर बनने की इच्छा रखने वाली रिया कराटे में यलो और ब्लैक बेल्ट पाना चाहती हैं.

रिया अपने जीवन में अपनी मंजिल जरूर पाएं. एक दिन हर बच्चे की तरह उन्हें अपना आसमान अवश्य मिले. महक की शुभकामनाएं उनके साथ हैं.

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