रंग में भंग : होली के रंग बरतें सावधानी

रंगों का त्योहार होली, मौज मस्ती का त्योहार है लेकिन कैमिकल और मिलावटी रंग इस त्योहार का मजा किरकिरा कर देतें हैं. जिनके प्रयोग से कई प्रकार की एलर्जी और हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं जो कि होली को बदरंग कर देती हैं. इस होली आप रंगों का मजा पूरी तरह उठा सकें इसके लिए कुछ सावधानियां बरतें , जानिए इस लेख से.

चंग की थाप पर बजते होली के गीत फागुन के आने की सूचना देते हैं. जाती हुई ठंड और आती हुई गर्मी का स्वागत फागुन माह में आने वाली होली के साथ किया जाता है. नई फसल का स्वागत और दिवाली से होली के बीच के समय की सफाई होली दहन के रूप में मनाई जाती है. होली की मस्ती में पूरा वातावरण रंगीन हो जाता है. बच्चों से लेकर बूढ़े तक इस मस्ती में डूब जाते हैं. चुहलबाजी और छेड़छाड़ का मजा इस त्योहार पर जमकर लिया जाता है.

30-35 वर्ष पूर्व होली खेलने के लिए रंग प्राकृतिक रूप से बनाया जाता था जो कि त्वचा के लिए लाभदायक होते थे और किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाते थे. टेसू और हरसिंगार के फूलों को मिट्टी के बर्तनों में रात भर भिगो दिया जाता था और अगले दिन उन रंगों से होली खेली जाती थी.

समय के साथ लोगों की प्राथमिकताएं बदल गई हैं. आज लोगों के पास न तो इतना समय है न ही घरों में इस प्रकार रंगों को बनाने की जगह और सुविधा. इसलिए बिना वक्त गंवाए लोग बाजार से रंग खरीद लेते हैं. तरह तरह के रंग बाजार में उपलब्ध हैं. जरूरत है रंग खरीदते समय थोड़ी सी सावधानी बरतने की. जल्दबाजी में रेग न खरीदें, उनका चयन देखभाल कर करें.

सिर्फ ये न देखें कि वे रंग चटख और असरदार है ये भी देखें कि वे रंग कैमिकल व सीसा युक्त तो नहीं हैं. इस प्रकार के रंगों का प्रयोग करने का सीधा असर त्वचा पर पड़ता है.

हर्बल रंगों का प्रयोग करें

सीनियर फिजिशियन डॉ दीपा शाह बताती हैं जो रंग या गुलाल ज्यादा चमकदार नजर आता है उसमें कैमिकल ज्यादा मात्रा में मौजूद होता है. ऐसी मिलावट असली रंग की मात्रा कम करने के लिए की जाती है. आयुर्वेदिक चिकित्सक दीनानाथ गुप्ता बताते हैं एक समय था जब सिंधाड़े के आटे से गुलाल बनाया जाता था. आज तो घटिया अरारोट के अलावा अबरक पीस कर मिला दिया जाता है ताकि वह चमकीला लगे. इसक अतिरिक्त भी कई पकार के कैमिकल को रंगों में मिलाया जाता है.

कैमिकल रंगों में पेंट व सीसा भी मिलाया जाता है , जिससे त्वचा पर बुरा असर पड़ता है.

कैमिकल रंगों में हरे व लाल रंग रंग में सीसा मिलाया जाता है जो कि आंखों के लिए खतरनाक होता है यह त्वचा के साथ सेहत के लिए भी नुकसानदायक है यदि यह मुंह में चला जाए तो पेट के लिए हानिकारक है.

होली पर बाजारों में बिकने वाले ज्यादातर रंग ऑक्सीडॉइज्ड मैटल होते हैं या इंजन ऑयल के साथ इंडस्ट्रियल ड्राइ को मिक्स करके तैयार किए जाते हैं. हरा रंग कॉपर सल्फेट से, बैंगनी क्रोमियम आयोडाइज्ड से , सिल्वर एल्यूनिमियम ब्रोमाइड और काला रंग लेड ऑक्साइड से तैयार किया जाता है. रंग को चमकदार बनाने के लिए कई बार रंग में कांच का चूरा भी मिलाया जाता है ऐसे सभी रंग विषैले होते हैं. इनसे त्वचा पर एलर्जी , आंखों मे जलन यहां तक कि अंधेपन जैसी परेशानी भी हो सकती है.सिविल हॉस्पिटल सूरत के सीनियर त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ योगेश पटेल ने पाउडर एवं तरल रंगों से होने वाली परेशानियों के बारे में बताया कि इन रंगों को अत्यधिक सक्रिय रायासनिक पदार्थों से बनाया जाता है जो त्वचा की गंभीर बीमारियों को जन्म देती है.जिनमें एक्जिमा , डर्मेटाइटिस , अस्थमा , न्यूमोनिया शामिल है.तो इस होली रंगों की खरीद में रखें थोड़ा सा ध्यान और होली का भरपूर मज़ा उठायें.

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