योगी आदित्यनाथ चार सिर वाले ब्रम्हा


उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ चार सिर वाले ब्रम्हा, मुख्यमंत्री बन रहे हैं. बीजेपी ने बडी ही मशक्कत के बाद उनके नाम का एलान किया है .भले ही बीजेपी ने सत्ता संतुलन और राज्य की राजनीति की जातिवाद अवधारणा को साधने के लिए दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य को भी उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी है लेकिन यह सत्य और सांविधानिक है कि मुख्यमंत्री ही सर्वोपरि है.योगी आदित्यनाथ को सीएम चुनकर बीजेपी ने पूर्व उत्तर प्रदेश के साथ साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भी साधने का काम किया है. योगी आदित्यनाथ चार सिर वाले ब्रम्हा का गोरखपुर से लेकर मेरठ,मुजफ्फरनगर तक के मतदाताओं को खुश करने के लिए चयन हुआ है.

गेरूवा वस्त्रधारी योगी आदित्यनाथ भले ही मुख्यमंत्री का चेहरा हो लेकिन उनके साथ दिखने वाले दो चेहरे दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य के अलावा एक और चेहरा है जो ब्रह्मा के चार मुख वाले चित्र में अद्रश्य रहता है.कहते हैं कि ब्रह्मा के पाँच सिर थे जिसमें से एक सिर शिव ने क्रोधित होकर काट दिया था.लेकिन उत्तर प्रदेश में सत्ता के लिए बनाए इस चार सिर वाले योगी को अब राजसत्ता और शासन की जिम्मेदारी के साथ ही प्रदेश के विकास का एक मॉडल खडा करना है जिसे केन्द्र की मोदी और राज्य की योगी सरकार का मॉडल कहा जा सके.

योगी आदित्यनाथ गोरखपुर की सबसे प्रसिद्ध पीठ के महंत हैं.उन पर हमेशा से यह आरोप लगता रहा है कि वह राजनीति और धर्म को मिलाकर चलते हैं.वह अकसर अपने भाषणों में कहते हैं कि बिना धर्म के राजनीति नहीं हो सकती है.राजनीति धर्म का एक छोटा सा हिस्सा मात्र हैं लेकिन अब योगी आदित्यनाथ राज्य के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. जिसके बाद राजनीती और धर्म को समझने का दारोमदार उनके सामने होगा.राज्य का अल्पसंख्यक वर्ग उनकी ऐसी बातों को लेकर चिंता में है.वहीं,यह चुनौती खुद योगी आदित्यनाथ की है कि अब वह कैसे राज्य के अल्पसंख्यक वर्ग की चिंता को दूर करते हैं और उनके विश्वास को जीतते हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने गुजरात के बिगड़ते हालात के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राजधर्म के पालन की बात कही थी.योगी एक समझदार युवा के साथ ही पाँच बार के सांसद भी है उन्होनें उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में प्रशासनिक और राजनीतिक कार्य के लिए दो साथियों को चुना है जो उपमुख्यमंत्री होगें जिन पर सत्ता और प्रशासन का जिम्मेदारी निभाने का दायित्व होगा.उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी तीन सिर वाले ब्रह्मा के रूप में तो दिखेगें लेकिन चौथा सिर जो नहीं दिखेगा वह केन्द्र की सत्ता से होगा.

2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने का सबसे बड़ा कारण उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 72 पर पार्टी और समर्थकों की जीत रही.अब 2019 में फिर चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने का जिम्मा योगी आदित्यनाथ पर होगा.इसके लिए योगी आदित्यनाथ के पास दो साल से भी कम समय है.इसी समय में योगी आदित्यनाथ को ऐसे काम करने हैं ताकि अगले आम चुनाव में पार्टी को राज्य में फिर सफलता मिले.इसके लिए योगी आदित्यनाथ को अभी से रोडमैप तैयार करना होगा जिससे राज्य की अल्पसंख्यक समुदाय से लेकर बहुसंख्यक समुदाय तक,एक जाति से दूसरी जाति तक की जमीनी समस्याओं का समाधान हो सके.

देश में उत्तर प्रदेश हमेशा से जातिगत राजनीति का गढ़ माना जाता रहा है.यहां पर जाति आधारित राजनीति के वर्चस्व की वजह से विकास की राजनीति हमेशा नीचले पायदान पर रही है.राजनीतिक तौर विकसित राज्य विकास के मामले में अभी तक बीमारू राज्य की श्रेणी में आता है.योगी आदित्यनाथ विज्ञान के छात्र रहे हैं और पढ़ने में काफी अच्छे रहे हैं. योगी आदित्यनाथ चार सिर वाले ब्रम्हा से राज्य की जनता को अपेक्षा है कि वह राज्य को बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकाले और राज्य के बेरोजगार युवाओं को रोजगार मुहैया कराएं ताकि युवा अपने घरों में रहकर रोजगार करें और लाखों की संख्या में पलायन रुके. योगी आदित्यनाथ चार सिर वाले ब्रम्हा अगर उत्तर प्रदेश में अपनी छवि राजऋषि जनक की बनाते है तो वह वास्तविक ब्रह्म योगी साबित हो सकते है.

एमपी हेडलाइन से साभार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *