मूर्तिकार स्वपन मित्रा

गणेश उत्सव में सभी रंग बिरंगी, विभिन्न आकृतियों की मूर्तियों की चर्चा करते हैं इन खूबसूरत मूर्तियों को आकर देने वाले मूर्तिकारों में से एक स्वपन मित्रा से हमने अपने स्तम्भ उड़ान के लिए बातचीत की –प्रस्तुत हैं उसके अंश –

मूल रूप से आप कहाँ  के निवासी हैं ?

मूल रूप से मैं कलकत्ता  (बंगाल) का रहने वाला हूँ पिछले ११ वर्षों से सूरत में रहकर मूर्तियां बनाने के कार्य में लगा हुआ हूँ मेरे साथ जितने कारीगर हैं वे सभी बंगाल से ही आये हैं.
आप लोग समूह को किस प्रकार संचालित  करते हैं ?
बंगाल से आये हुए सभी कारीगरों ने अपना एक समूह बनाया है जिसके मुखिया जीबन सिंह हैं जो की हमारे हितों की रक्षा करते हैं और हमारी समस्याओं का समाधान ढूढ़ने की कोशिश करते हैं.
किस समय में आप की मूर्तियां ज्यादा बिकती हैं ?

दशा माँ , औरजन्माष्टमी के समय कृष्ण की मूर्तियां बिकती हैं लेकिन सर्वाधिक मूर्तियां गणेश महोत्सव के समय बिकती हैं इसकी तैयारी हम लगभग चार महीने पहले से कर देते हैं.
प्रशासन से आपको किस प्रकार की सहायता मिलती है?
सूरत का प्रशासन काफी सहयोग करता है सूरत मनपा हमारे कारीगरों के नए और आधुनिक प्रशिक्षण के लिए शिविर लगाती है हमें कम कीमत पर मूर्ति बनाने की सामग्री भी उपलब्ध कराती है गणेश समिती हमारा पूरा सहयोग करती है पुलिस विभाग का भी बहुत सहयोग रहता है मूर्ति ले जाते समय हुई भीड़ को सँभालने और हमारी लोगों से रक्षा करने में काफी सहायता करते हैं इस बार पुलिस कमिशनर ने हर मूर्तिकार की जगह पर दो दो पुलिस के सिपाही भेजे थे जिससे मूर्तियों के वितरण का कार्य शांति के साथ सुचारू रूप से संभव हो पाया.
 प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की मूर्तियों की इस समय कितनी मांग है?
पिछले कुछ वर्षों से सरकारी पाबन्दी के कारण इस की मांग में काफी कमी आ गयी है लोग भी जागरूक हो गए हैं लेकिन फिर भी कुछ लोग इन्हें बनाते और कुछ खरीदते हैं.
इसको पसंद करने के क्या कारण हैं ?
प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की मूर्ति, मिट्टी की मूर्ति की तुलना में मजबूत ज्यादा होती है जिससे उसके खंडित होने का डर नहीं रहता है.
ये मूर्तियां मिट्टी की मूर्ति की तुलना में आधी कीमत से भी कम की होती हैं जिससे ग्राहक इन्हें पसंद करता है.
ये मूर्तियां मिटटी की मूर्ति की तुलना में जल्दी बनती हैं इसलिए कुछ कारीगर ज्यादा मात्रा में इन्हें बनाते हैं जिनसे वे ज्यादा मुनाफा कमा सकें.
इस वर्ष किस डिजाइन की मांग मूर्ति में ज्यादा है?

इस वर्ष सामान्य आकृति के साथ बाहुबली , अन्य देवी देवताओं की डिजाइन की मांग ज्यादा है ?
इन्हें बनाने का आइडिया कहाँ से लेते हैं ?
इसके लिए हमें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पढ़ती है लोग स्वयं ही डिजाइन देते हैं.
इस वर्ष रेस्पॉनस कैसा रहा ?
हमेशा की तरह बहुत अच्छा . मूर्तियां खूब बिकी हैं .
 सूरत के लोग कैसे लगे हैं ?
सूरत के लोग बहुत अच्छे हैं वे अपने पराये में भेद भाव नहीं करते हैं हम बंगाल से आये हैं फिर भी कभी हमें बाहरी होने का अहसास नहीं हुआ है सभी का पूरा सहयोग मिलता है.
धन्यवाद के साथ हमने स्वपन मित्रा से अपनी मुलाकात समाप्त की .
अविनाश मिश्रा

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