माटी मूर्ति मेला-विशेष मुलाकात


गुजरात प्रशासन गणेश उत्सव को सफल और कानूनी रूप से अदालत और प्रशासन के आदेशों का सही पालन हो सके इसके लिए कई प्रयास करता है लोगों को मूर्ति निर्माण का प्रशिक्षण देने के लिए शिविर लगाना भी इसी तरह का उसका अपना एक अनूठा प्रयास है इस वर्ष सूरत में लगे माटी मूर्ति मेला एवं प्रशिक्षण शिविर में हमारे प्रतिनिधि अविनाश मिश्रा ने भ्रमण किया और वहाँ प्रशिक्षकों से विशेष मुलाकात की —प्रस्तुत है अंश –

आप अपने बारे में महक के पाठकों को परिचय दें.

मेरा नाम सुरेश डी. यादव है जूनागढ़ से यहाँ आया हूँ.मैं इस मेले में सरकार और प्रशासन की तरफ से प्रशिक्षक की तरह कार्य कर रहा हूँ,मेरा मुख्य कार्य मेले में आयी महिला प्रशिक्षु की सहायता करना और उन्हें प्रशिक्षण देना है.

इस मेले का उद्देश्य क्या है ?

इस मेले का आयोजन पिछले वर्ष पहली बार गुजरात सरकार द्वारा किया गया था जो की काफी सफल रहा था. इस वर्ष भी उसी क्रम में इस मेले का दूसरी बार आयोजन किया गया है.यह मेला तीन जगह अहमदाबाद , बड़ोदा और सूरत में लगाया गया है.

इस मेले का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाना, उन्हें स्वावलंबी बनने में, इसकार्य को सीख कर आगे बढ़ना, प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की मूर्तियों को बंद करना है इस मेले में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर आगे लाया जा रहा है जिससे वे भविष्य में एक कौशल में निपुण हो सकें.

इस कार्य में सरकारी सहायता किस प्रकार होती है ?

यह सरकारी कार्यक्रम ही है ,इसके आयोजन के लिए जगह , आयोजन का खर्च सभी सरकार के द्वारा वहन किया जाता है. इसके अतिरिक्त इससे जुड़ी प्रत्येक महिला को सरकार 100 रूपये रोज देती है साथ ही सीखने के समय और उसके पश्चात् अपने व्यवसाय के लिए सामग्रीनिःशुल्क रूप से देती है. प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक महिला को 6000 रूपये की सामग्री किट भी निःशुल्क प्रदान की जाती है जिससे वे कार्य शुरू करकेआय कर सकें.

इस मेले में लगभग कितनी महिलाये जुड़ी हुई हैं?

इस वर्ष मेले में 70 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं.

उनके कार्य की सराहना करते हुए हमने उन्हें बातचीत के लिए धन्यवाद दिया.

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