महिला दिवस : सशक्तिकरण

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महिला दिवस : सशक्तिकरण का सही अर्थ उन्हें  उनके जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेने में आत्मनिर्भर बनाना है इन निर्णयों को लेते वक़्त वे समाज और परिवार के दबाव से मुक्त हों । वर्तमान में  महिलाओं की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ रही है और उन पर  कम ध्यान दिया जाता है । यद्यपि महिला दिवस : सशक्तिकरण पर महिलाओं के सशक्तिकरण के बारे में बहुत कुछ कहा जा रहा है लेकिन  तुलनात्मक रूप से कुछ भी नहीं किया गया है यही कारण है कि महिलाएं  की स्थिति समाज में  कमजोर होती जा रही है  
यह सही समय है की हम महिलाओं की शक्ति को पहचानें और महिला दिवस : सशक्तिकरण उन्हें उनके वास्तविक रंगों के साथ उनकी उड़ान भरने में उनकी मदद करें अगर हम उनका सम्मान करते हैं, तो  निश्चित रूप से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा . महिलाओं के सशक्तिकरण का अर्थ है कि महिलाओं के  सामाजिक अधिकार, राजनीतिक अधिकार, आर्थिक स्थिरता, न्यायिक शक्ति और अन्य सभी अधिकार पुरुषों के समान होना चाहिए उन्हें उनके मौलिक और सामाजिक अधिकार मिलने चाहिए ।


महिला दिवस : सशक्तिकरण
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महिलाओं के प्रति गरिमा और सम्मान होना चाहिए।
घर के अंदर और बाहर अपने कार्य स्थल पर उन्हें अपने जीवन और जीवन शैली के लिए  पूर्ण स्वतंत्रताएं मिले ।
वे  अपनी पसंद के आधार पर अपने  निर्णय लें सकें ।
उन्हें  समाज में सर्वोच्च  सामाजिक सम्मान मिलना  चाहिए।
उनके पास समाज और अन्य न्यायिक कार्यों में समान अधिकार हों ।
किसी भी प्रकार की शिक्षा प्रदान करते समय उनके साथ  भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
वे स्वयं अपने आर्थिक और वित्तीय विकल्पों का चयन कर सकें ।
रोजगार और नियुक्ति  देने के दौरान महिला और पुरुष के बीच कोई भी भेदभाव नहीं होना चाहिए।
उचित गोपनीयता के साथ उनके पास सुरक्षित कार्य स्थान होना चाहिए।

महिला सशक्तिकरण का महत्व
बेहतर निर्णय लेने की शक्ति
अपनी स्वयं की छवि स्थापित करने में सहायता
वे अपने जीवन में आगे बढ़ें
समाज की एक मजबूत नींव रखना
राष्ट्र के  मामलों में सक्रिय भागीदारी
महिलाओं का  सशक्तिकरण उन्हें सभी क्षेत्रों मेंआर्थिक जीवन में पूरी तरह से भाग लेने के लिए तैयार करता है  जो की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण , विकास और स्थिरता के लिए, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए  और महिलाओं, पुरुषों, परिवारों और समुदायों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए आवश्यक है

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रमुख ऐतिहासिक कदम
दहेज निषेध अधिनियम
घरेलू हिंसा अधिनियम
कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न
पंचायती राज संस्थान अधिनियम
महिला आरक्षण विधेयक: यह भारत में एक लंबित विधेयक है जो लोकसभा ,सभी राज्य विधान सभाओं में  सभी सीटों  में 33% आरक्षित करने का प्रस्ताव करता है। पारित होने पर, यह विधेयक राजनीति में महिलाओं की स्थिति को महत्वपूर्ण बढ़ावा देगा।
विभिन्न सरकारी नीतियां और योजनाएं-

महिला सशक्तिकरण – चुनौतियां
परिप्रेक्ष्य–
पुरुषप्रधान-व्यवस्था–
आर्थिक पिछड़ापन –-
कार्यान्वयन अंतर–
कानूनी ढांचे में लूप होल्स –-
राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव—
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समाधान
पितृसत्ताकी जगह समानता की सोच
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण और अपरिहार्य उपकरण है
राजनीतिक इच्छाशक्ति
कार्यान्वयन अंतराल समाप्त करना
न्याय में देरी  न्याय से वंचित करने के सामान है यह समझना
भारत के महानतम व्यक्तित्वों  में से एक स्वामी विवेकानंद ने उद्धृत करते हुए कहा, “दुनिया के  कल्याण के लिए कोई अवसर नहीं है जब तक महिलाओं की स्थिति में सुधार नहीं होता है, केवल एक पंख पर उड़ना पक्षी के लिए संभव नहीं है। “

निष्कर्ष: महिला दिवस : सशक्तिकरण के विचार के साथ महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक रूप से राजनीतिक और कानूनी तौर पर सशक्त बनाने के लिए  पूरी मजबूती के साथ कदम उठाने होंगे । भारतीय समाज में महिलाओं के लिए उपेक्षा की संस्कृति को बदलना आसान नहीं है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि यह असंभव है।  आज महिला दिवस : सशक्तिकरण पर समझना होगा क्रांतियां एक दिन में बदलाव लाती हैं, लेकिन सुधारों में  समय लगता है। समय के साथ महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव आ रहा है यह निश्चित रूप से और बदलेगा ।

डॉ.किरन संजीव

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