महक रिश्तों की

) बात उन दिनों की है जब मेरी छोटी बेटी पहली कक्षा में पढ़ती थी. एक दिन उसके स्कूल में टीचर ने श्रवण कुमार की कहानी सुनाई. उस दिन वह स्कूल से आकर बाली, माँ आप अंधी कब होंगी ? मैं आश्चर्य से उसका चेहरा देखती रह गई और कहा, जबमैं बूढ़ी हो जाऊँगी तो आप बूढ़ी कब होंगी ? उसने फिर से पूछा ?
मैनें पूछा आप ये क्यूँ पूछ रहीं हैं बेटा ? माँ, जब आप अंधी होंगी तभी तो मैं आपको कावड़ में बैठाकर तीर्थयात्रा पर ले जाऊंगी, मैं आश्चर्य से उसका चेहरा दखती रह गई उसकी मासूम बातें सुनकर मैं  हँसते हँसते बेहाल हो गई ..
२) मेरी तीन वर्षीय बेटी अम्बी बहुत ही चंचल स्वभाव की और हाजिर जवाब है. मैं अक्सर घर में बोलता हूँ कितनी बार कहा है ध्यान रखा करो .एक दिन रात को सोते समय उसने बिस्तर गीला कर दिया. सुबह मैं उसे समझाने लगा आप को उठकर टॉयलेट जाना चाहिए अब नए गद्दे गन्दे हो गए हैं. इस पर वह तपाक से बोली कितनी बार कहा है आप ध्यान रखा करो. नए की जगह पुराने गद्दे रखो. उसकी बात पर हम सभी हँसने लगे.
३)बात उन दिनों की है  जब मेरी नई शादी हुई थी और मेरी बड़ी ननद मेरे पास आई हुईं थीं. उनके दो बच्चे हैं. तरंग और पलक जो कि उस समय काफी छोटे थे जब ननद वापस जा रहीं थीं तो हम उन्हें छोड़ने स्टेशन गए. वहाँ मैं दोनों बच्चो को सफर के लिए कॉमिक्स दिलाने लगी. इस पर बड़े लड़के तरंग ने एक कॉमिक्स पसंद की तभी छोटी पलक बोली, दादा ये दूसरी कॉमिक्स लो, नहीं, इसमें अक्षर छोटे हैं और चित्र भी कम, तरंग बोला. तो क्या हुआ भैया ये ज्यादा मंहगी है उसपर मूल्य दिखाते हुए वह बोली उनकी ये बातें सुनकर मुझे हँसी आ गई और मैं नें दोनो कॉमिक्स उनको दिला दिए.

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