महक रिश्तों की

मेरी बेटी बहुत ही शरारती है वो चाहती है कि सभी सिर्फ उससे ही बात करें. उसकी आयु तीन वर्ष है. हम पति पत्नी को जब आपस में बात करना होता है तो हम उसकी तरफ देखकर बातें करते हैं जिससे उसे लगता है कि हम उससे बात कर रहे हैं. एक बार हमारे घर मेरे पति की दूर की बहन आई हुई थीं. वे पहली बार मुझसे मिल रही थीं और पहली बार ही हमारे घर आई थीं. मेरे पति उनसे बात कर रहे थे. तभी मेरी बेटी नीचे से खेलकर घर में आ गई. तब तक मैंने चाय नाश्ता लगा लिया था. मैं उसे लेकर सबके बीच में आ गई और मैं बहनजी से बात करने लगी लेकिन मेरा चेहरा बेटी की तरफ था. बहनजी को ये बडा अटपटा लग रहा था. कुछ देर बाद मैं उठकर गई तो उन्होंने मेरे पति से सवाल किया भाभी को कोई समस्या है क्या? मेरे पति ने कहा नहीं तो आप ऐसा क्यूं कह रही हैं? बहनजी बोली वो मुझसे बात कर रही थी पर देख कहीं और रही थी. बड़ा अजीब लग रहा था ये सुनकर मेरे पति जोर जोर से हंसने लगे और फिर उन्होंने बहनजी को पूरी बात बताई तो वे भी खूब हंसी. बुलबुल

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बात मेरे विवाह के तुरंत बाद की है. सभी महिलाएं मुझे घेरकर बैठी हुई थीं. उसमें कुछ रिश्तेदार थीं तो कुछ पास पड़ोस की महिलाएं.इतने में वहां बैठी मेरे पति की बड़ी बुआजी ने मुझसे प्रश्र किया आज क्या गाएगी? तभी वहीं बैठी पति की दूसरी बुआ जो बिल्कुल मेरे सामने बैठीं थी बोली कोई फिल्मी गाना गाओगी क्या? मैंने धीमे से बोला “हां”. अब बड़ी बुआजी जोर से गुस्से में बोली पहले सवाल मैंने किया था तो जबाव पहले मुझे देना चाहिए . अब तेरी सजा है कि तू फिल्मी गाना नहीं गाएगी. तू भजन गाएगी. मैं बड़ी दुविधा महसूस करने लगी फिर मैंने सीमा फिल्म का भजन तू प्यार का सागर है गाया. ये सुनकर दोनो बुआ बहुत खुश हुई.

प्रीति गुप्ता

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बात उन दिनों की है. जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी और कॉलेज के पश्चात कोचिंग में पढऩे जाया करती थी. हम उन दिनों जयपुर में रहते थे. हमारा घर अम्बाबाडी क्षेत्र में था और मेरी कोचिंग अजमेरी गेट पर थी. वहां से पैदल सहेलियों के साथ चांदपोल आते थे और वहां से टैम्पो में अम्बाबाडी आती थी. चांदपोल पर रहने वाले और टेम्पो चलाने वाले ज्यादातर लोग मुस्लिम थे. उन्हीं दिनों एक लडक़ा मुझे बहुत परेशान करने लगा. वो टेम्पो में मेरे साथ चढ़ता और परेशान करता. मैं रूआंसी हो जाती थी मैंने ये बात अपनी मां को बताई. वे बोलीं आज जब वो लडक़ा वहां दिखे तो जोर जोर से ये वहां खड़े लोगों से कहना. उस दिन जेसे ही वो लडक़ा वहां आया मैंने जोर से चिल्लाकर सभी को बता दिया. वहां खड़े टेम्पो चालकों ने उस लडक़े को पकड़ लिया और मुझे एक टेम्पो में जाने को कहा. अगले दिन वो लडक़ा मेरे घर आया और मुझसे माफी मांगी.

बाद में पता लगा कि उस दिन उन टेम्पो वालों ने उसे मारा और समझाया, धमकी भी दी. मैं हैरान रह गई, आज जब हिंदू मुस्लिम भेदभाव के बारे में पढ़ती हूं तो उन मुस्लिम युवकों के बारे में सोचती हूं जिन्होंने एक हिंदू लडक़ी की सहायता की थी. रजनी बारेठ

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