महक प्रवाह


फागुन की बयार चल रही है. प्रकृति रंगों में रंगने की मस्ती में है. चारों ओर बसंती पुरवाई चल रही है. पलाश खिल उठे हैं. रंगों का त्योहार होली आ रहा है. देश भर में मनाया जाने वाला ये त्योहार रंगों के माध्यम से हमें प्रेम के रंग में रंगने का संदेश देता है.

विद्यार्थियों के लिए ये मौसम है, परीक्षओं की तैयारियों का. इन सभी के बीच आ रहा है अंतरराष्ट्रीय क्षय रोग दिवस. दिखने सुनने में सामान्य परंतु वास्तविकता में जानलेवा बीमारी का नाम है क्षय रोग. क्षय रोग लाइलाज नहीं है परंतु उसका बिगड़ा रूप इंसान को जीवित क्षय रोग वाहक बम बना देता है इसी पर केन्द्रिंत है हमारा ये अंक.

आप सभी स्वस्थ रहें, फागुनी रंगों में सराबोर हो जाएं. तन और मन प्रकृति के रंगों में रंगकर प्र्रेम की सुगंध फैलाएं.

शुभकामना के साथ

किरन संजीव

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