महक प्रवाह

महक प्रवाह

वो बदल सकते हैं एक जीवन को , एक समाज को और पूरी दुनिया को, सिर्फ एक चॉक और कुछ शब्दों के द्वारा, आज का दिन उनको समर्पित किया है उनके ही जैसे एक शिक्षक और भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन ने.

मनुष्य समाज कई अंगों से मिलकर पूर्ण होता है और उसके सभी अंग समानन्तर महत्वपूर्ण होते हैं सभी अंग अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें इसके लिए शिक्षक ही वह अंग है जो बाकी अंगों को न केवल अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करता है बल्कि उनमें सामंजस्य भी बैठता है शिक्षक वह सूरज है जो सम्पूर्ण मानवता को सही पथ दिखता है उसके विकास के लिए उसे नेतृत्व प्रदान करता है शिक्षक केवल स्कूल , कॉलेज या यूनिवर्सिटी तक ही सीमित नहीं होते हैं जीवन पथ पर आपको रास्ता दिखाने वाला हर प्राणी आपका शिक्षक होता है समाज को आगे और आगे बढ़ने के लिए, उनके छुपे हुए पंखों को खोलने और उनमें उड़ने की क्षमता देने वाले सभी शिक्षकों को महक का शत शत नमन.

सितम्बर का महीना आ चुका है , भारत में वर्षा काल के समाप्त होते होते त्योहारों की झड़ी लग जाती है जो की ग्रीष्म की प्रचंड धूप के साथ ही रूकती है इन त्योहारों का आनन्द लीजिये , उत्सव मनाइये, खुशियों का और आपका साथ हमेशा बना रहे ,

शुभ कामना के साथ

 किरन संजीव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *