महक प्रवाह – मई २०१८

मई का महीना यानी कि ग्रीष्म का प्रचंड स्वरुप  इस प्रचंडता में भी भारतीय मन आनंद ढूंढ़ ही लेता है

इन दिनों विद्यालयों , महाविद्यालयों में ग्रीष्मावकाश घर के सदस्यों को अपनी वर्ष भर की एकरसता से मुक्ति का अवसर देते हैं घर में रहे या फिर घर से दूर , कुछ नया करना ही इन अवकाशों की सार्थकता होती है। नानी  के घर जाना तो जैसे ग्रीष्मावकाश का पर्याय ही है बदलते समय में लोग ग्रीष्मवकाश को यात्रा के रूप में भी देखने लगे हैं विविधता से भरे भारत की यात्रा सच ही भारत की खोज की तरह होती है पहली बार किसी स्थान पर जाने वाला पक्षी कोलंबस ही तो होता है फर्क है तो सिर्फ देखने  के अंतर का  . ऊँचे पहाड़ , बहती नदी , हरे भरे जंगल , रेतीले मैदान , झरने आपको एक ऐसा यात्री होने का अहसास कराते हैं जहां मन के पांवों की यात्रा अनंत हो जाती है।  कालिदास के मेघदूत की तरह।  ग्रीष्म का होना बाहरी यात्रा का ही नहीं मन की यात्रा का भी मौसम है दूर तक फैले रेगिस्तान अथाह प्यास की कहानी कहते हैं तो कोशिश करें इस मई के महीने में किसी प्यासे कंठ की प्यास बुझा कर, जल की बूंदों को बचाकर , रेगिस्तान में थोड़ी हरियाली फैलाने की कोशिश , छोटी ही सही लेकिन एक छोटी सी कोशिश जरूर करें

  स्नेह के साथ,किरन संजीव

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