मदर इंडिया

60 का दशक जब भारतीय सिनेमा धार्मिक और पौराणिक कहानियों को अलविदा कह रहा था. सामाजिक पृष्ठभूमि की फिल्में भी प्रेम की हवाओं से आच्छादित थीं. तभी अचानक हिन्दी के रूपहले पर्दे ने दुनिया भर के सिने जगत में एक हलचल मचा दी. भारतीय ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित मदर इंडिया भारतीय नारी के असीम साहस और शक्ति की परिचायक फिल्म बनकर सामने आई.

फिल्म में नारी की कर्मठता, धीरज, साहस, समस्याओं का सामना और ,अंत तक संघर्ष के जज्बे जैसे मानवीय गुणों को उभारा गया था. महबूब खान के निर्देशन में, नौशाद के संगीत से सजी मदर इंडिया सिर्फ महबूब खान के कैरियर की ही नहीं वरन भारतीय सिने जगत का अविवादित मास्टर पीस है. मदर इंडिया महबूब खान की 1940 में निर्मित फिल्म औरत का रीमेक थी. मदर इंडिया न केवल 1957 के दौर में दुनिया भर की बेहतरीन फिल्मों में शामिल हुई वरन इसे आज भी विश्व की बेहतरीन फिल्मों में शुमार किया जाता है. बिना शहरी चमक दमक और भव्य सैट के किस प्रकार एक बेहतरीन सामाजिक फिल्म का निर्माण किया जा सकता है, मदर इंडिया इसका अनूठा उदाहरण है.

अपने दौर के बेहतरीन अदाकारों और बड़े सितारों से सजी, मदर इंडिया में नरगिस, राजकुमार, सुनील दत्त, राजेन्द्र कुमार ने अभिनय किया था. महबूब खान के निर्देशन, कसी हुई कहानी और कलाकारों के बेहतरीन अभिनय से सजी दर्शकों को एक बेजोड़ फिल्म देखने को मिली. कंधो पर हल उठाए, गहरे लाल और संतरी रंग के आसमान के नीचे नरगिस, इस फिल्म का पोस्टर दृश्य था.

फिल्म का फिल्मांकन महबूब स्टूडियो एवं महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तरप्रदेश के गांवों में किया गया था. फिल्म की कहानी नरगिस और उसके परिवार के ईद गिर्द घूमती है.फिल्म में गरीबी, अशिक्षा, सामाजिक कुरीतियों, जमींदारी प्रथा, किसानों की समस्याओं केा बहुत ही प्रभावी तरीके से दर्शाया गया है. समस्याओं से संघर्ष, हार न मानने की शक्ति, जीवन के प्रति जीजिविषा को इतने भावपूर्ण तरीके से प्रदर्शित किया है कि दर्शक उस रूपहले पर्दे से अपने आप को जोड़ लेता है.

25 अक्टूबर 1947 को जब यह फिल्म प्रदर्शित हुई, भारत का ग्रामीण इलाका अशिक्षा, जमींदारी प्रथा, महिला उत्पीडऩ और डाकुओं की समस्याओं से जूझ रहा था. तत्कालीन परिस्थितियों का सही प्रदर्शन इस फिल्म की सफलता का बड़ा कारण रहा. फिल्म के मुख्य किरदार राधा को नरगिस ने अभिनीत किया था. राधा जो भारतीय समाज में देवी का स्थान रखती हैं और जहां एक तरफ उच्च नैतिक चारित्रिक मूल्यों के कारण जानी जाती हैं, वहीं वे दुर्गा और काली की पर्याय भी हैं.

महबूब खान ने इस नाम को प्रेम के साथ शक्ति के सांकेतिक रूप में प्रयोग किया है जो कि दर्शकों तक आसानी से पहुंचा है इसी प्रकार राधा के बेटों के नाम रामू ,जो कि भगवान राम से और बिरजू, कृष्ण के नाम से संबंधित हैं.

इस फिल्म के द्वारा महबूब खान ने महिला सशक्तिकरण का विचार समाज में उस समय प्रत्यारोपित किया, जब आम आदमी द्वारा महिला से दोयम दर्जे के प्राणी की तरह व्यवहार किया जाना सर्वमान्य था.

फिल्म के द्वारा उन्होंने समाज के विचारों में, धारा में एक बदलाव लाने का प्रयास किया और काफी हद तक वे इसमें कामयाब भी रïहे फिल्म को कालजयी कृति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिïका निभाई थी इसïके गीत संगीत ने. संगीत निर्देशïक नौशाद का हृदय के तारों से लेकर आत्मा तïक को छू लेने वाला संगीत और यादगार गीतों से सजी फिल्म के गीत सदैव के लिए भारतीय संगीत में अमर हो गए.

नौशाद ने इस फिल्म में पाश्चïत्य सुगम संगीत का भी प्रयोग किया था, साथ ही पाश्र्वसंगीत के लिए हालीवुड स्टाइल का सिम्फोनिïक ऑरकेस्ट्रा का प्रयोग किया था, जोकि फिल्म के दृश्यों के मूड को प्रभावी ढंग से उभारने में सफल रïहा. फिल्म में कुल बारïह गाने हैं जोïकि फिल्म की कïहानी को प्रभावी तौर पर दिखाने और उसे आगे बढ़ाने मेंï महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जैसे, दुख भरे दिन बीते रे भैया और दुनिया में हम आए हैं तो …..भारतीय गायकी के महागायकों मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर , मन्ना डे और शमशाद बेïगम ने अपनी आवाजों से इन्हें सजाया.

मदर इंडिया भारतीय सिनेमा जगत की पहली फिल्म थी जिसे ऑस्कर अवार्ड के लिए वर्ष 1958 में नामांकित किया गया था. 1957 की सर्वश्रेष्ठ फिल्म, नरगिस को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री एवं महबूब खान को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्मफेयर अवार्ड मदर इंडिया के लिए दिया गया था.

फिल्म के बारïह गीतों में मन्ना डे ने दो गीत गाए थे, उमरिया कटती जाए रे …… और दुख भरे दिन बीते रे भैया……. आशा भोंसले ने इस फिल्म में केवल एक गीत में अपनी आवाज दी थी दुख भरे दिन बीतेरे भैया…….

जबकि लता मंगेशकर ने नगरी नगरी, दुनिया में हम आए, मतवाला जिया डोले पिया, जैसे गीतों में अपनी आवाज दी. मोहम्मद रफी की आवाज से ओ गाड़ी वाले…., मतवाला जिया…., दुख भरे दिन…. ना मैं भगवान हूं जैसे गीत सजे थे.

शमशाद बेगम की आवाज के गीतों में होली आई रे कन्हाई.. फिल्म का रस और उत्साह से भरा गीत था.

नदीम परमार.

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