मदर्स डे

मई माह का दूसरा रविवार यानि मदर्स डे. सुनते ही सभी की निगाहों में अपनी मां की छवि तैर जाती है, जो मां के साथ हैं, उनके भी और जो मां के साथ नहीं हैं उनके भी. वैसे तो भारतीय परंपरा में मां का स्थान सर्वोच्च है और उनके सम्मान को प्रदर्शित करने के लिए किसी विशेष दिवस की आवश्यकता भी नहीं है. मां के प्रति सम्मान मन में और व्यवहार में जीवन के अभिन्न रूप में होताï है और होना भी चाहिए.

परंतु समय परिवर्तनशील होता है, संस्कार वही हैं पर उनमें समय के साथ-साथ परिवर्तन आना लाजिमी है. मदर्स डे भी इसी बदलते समय का एक रूप है ‘मदर्स डे पर सभी बिना किसी झिझक और संकोच के मां से अपने दिल की बात कर सकते हैं. बचपन में जिस तरह मां से लिपट कर ‘मां तू कितनी प्यारी है कह पाते थे अब बड़े होने पर उसे व्यक्त करने में एक संकोच आड़े आ जाता है. मदर्स डे इस संकोच और झिझक के परदे को खींचकर दूर कर देता है और आप अपने मन की बात अपने मनपसंद तरीके से मां से व्यक्त कर सकते हैं.

चाहें तो सूरज की पहली किरणों के साथ शब्दों में ‘मां तुम बहुत अच्छी हो या न भी बोल पाएं तो एक प्यारा सा ग्रीटिंग कार्ड देकर या कोई सुंदर सा तोहफा मां को भेंट करके आप अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं. बच्चे अपनी रचनात्मकता का प्रयोग करके अपनी मां के लिए अपने हाथों से कार्ड या तोहफे बनाकर मां को भेंट कर सकते हैं.

इंजीनियरिंग छात्रा सेजल धवल पटेल ने बताया कि उन्होंने अपनी मम्मी की कुछ फोटो इकठ्ठी करके एक कार्ड बनाकर साथ में चॉकलेट मां को तोहफे में दिया था.

ब्यूटीशियन वाजिदा ने अपनी फेसबुक और व्हाट्सएप डीपी अपनी मां के साथ रखी और अपने हाथों से मां को बिरयानी बनाकर खिलाई, जबकि उनके पापा ने उनकी मां को एक रिंग तोहफे में दी थी. यहां पर एक मां प्रीती जयेश मेहता ने भी पत्रिका को बताया कि मेरे बच्चों ने मुझे साड़ी दी जिसे मैने मदर्स डे के दिन ही पहन ली. बच्चों ने ऑनलाइन केक ऑर्डर किया था और फूलों के गुलदस्त क साथ उसे मुझे तोहफे में दिया.

अनीता वरहाडे जो कि महाराष्ट्रीयन पृष्ठभूमि से हैं अपनी मां को महाराष्ट्र की पारंपरिक साड़ी भेंट की.

इसी सिलसिले में कुछ छोटे बच्चों से भी बात की तो एसवीएनआईटी कैंपस में रहने वाली स्नेहा जो कि आठवीं कक्षा में पढ़ती हं ने अपनी मम्मी को सुबह उठकर विश किया और पहले से अपने हाथों से बनाया हुआ कार्ड तोहफे में दिया, मम्मी के काम पर जाने के पश्चात उसने अपनी मां का मनपसंद चॉकलेट केक बनाया जिसे मां के घर वापस आने के बाद सभी ने मिलकर खाया.

राजवी जो कि आयु में छोटी है ने सुबह उठते ही अपनी मां को शुभकामना दी और दिनभर मां के कार्यों में सहायता की. शाम को घर के सभी सदस्य इक_ होकर घूमने गए और सबने साथ में बहुत मजे किए.

आठवीं कक्षा की छात्रा पूनम ने भी ‘मदर्स डे के लिए हफ्ते भर पहले से ही मां को शुभकामना देने के लिए अपने हाथों से कार्ड बनाया था, जो उसने उस दिन मां को भेंट किया.

आठवीं की ही छात्रा ओशीन हर वर्ष अपनी मां को ‘मदर्स डे पर अपने हाथों से बनाया हुआ कुछ तोहफा देती है इस बार भी उसने मां को अपने हाथों से रंगों से भरा कार्ड बनाकर भेंट किया और उसके भाई ने कुछ जादू दिखाकर मां को हंसाया.

इस बार मदर्स डे पर जहां रचनात्मकता नजर आई, वहीं स्टोर्स की भी इस सिलसिले में बिक्री ज्यादा हुई.

घोड़दौड़ रोड स्थित आर्चीज के मालिक जेम्स ने बताया कि यूं तो ग्रीटिंग्स और फोटोफ्रेम की मांग सामान्य थी परंतु इस मदर्स डे पर ब्राउन कोको से बनी डार्क चोकलेट की मांग सर्र्वाधिक थी.

घोड़दौड़ रोड पर ही स्थित ‘मोमेन्टो के मालिक रवि ने बताया कि इस बार ऑनलाइन कोलॉज, मल्टी कोलॉज फ्रेम की मांग बहुत थी, इसमें ब्लैकवुड और फाइबर ब्लैकवुड फ्रेम की मांग सर्वाधिक थी. ऑनलाइन कोलॉज में 15 से ज्यादा फोटो शामिल किए जा सकते हैं. इस तोहफे की कीमत 800 से 5000 रुपए के आसपास थी.

कुल मिलाकर इस बार ‘मदर्स डे पर मां और बच्चों दोनों ने ही इसका जमकर लुत्फ उठाया और इस दिन को अपने अनोखे अंदाज से सेलिब्रेट किया.

चाहें तो सूरज की पहली किरणों के साथ शब्दों में ‘मां तुम बहुत अच्छी हो या न भी बोल पाएं तो एक प्यारा सा ग्रीटींग कार्ड देकर या कोई सुंदर सा तोहफा मां को भेंट करके आप अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं बच्चें अपनी रचनात्मकता का प्रयोग करके अपनी मां के लिए अपने हाथों से कार्ड या तोहफे बनाकर मां को भेट कर सकते हैं.

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