भारतीय चुनौतियां : टेबल टेनिस में

सूरत के पंडित दीनदयाल इंडोर स्टेडियम को दिसंबर २०१५ में बीसवीं कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप की मेजबानी करने का अवसर प्राप्त हुआ है.खेल विशेषज्ञ आरिफ अंसारी, इसी संदर्भ में में टेबल टेनिस के खेल मे भारतीय चुनौतियों और उसकी वर्तमान स्थिति का विश्लेषण कर रहे हैं.

अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टेबल टेनिस का इतिहास कोई खास सुनहरे अक्षरों में नहीं लिखा गया है. परंतु वर्तमान में खेलों के बदलते परिपेक्ष्य में जबकि भारतीय दर्शकों से लेकर खिलाडिय़ों तक का रूख क्रिकेट के साथ साथ अन्य खेलों की तरफ भी होने लगा है इस खेल में भारतीय युवा चुनौती का विश्लेषण आवश्यक हो गया है.

भारत में टेबल टेनिस के खेल का विकास एवं नियमन टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया की देखरेख में होता है. इसकी राज्य एवं जिलास्तरीय शाखाएं इस खेल के विकास को ग्रामीण अंचल तक विकसित करने के उद्देश्य से कार्य करती हैं.

विश्व पटल पर टेबल टेनिस के खेल में चीन,कोरिया, जापान और हांगकांग जैसे देशों का दबदबा है. पहला प्रश्र यही उठता है कि इन देशों की गैर मौजूदगी में क्या इन कॉमनवेल्थ खेलों में तिरंगा लहराएगा? वर्तमान की नई खेप में भारत में कई बेहतर खिलाड़ी मौजूद हैं.

पुरूष वर्ग में शरत कमल, सौम्यजीत घोष, साथियन,एंथोनी अमलराज, हरमित देसाई एवं सोनिल शेटटी जैसे खिलाडिय़ों के साथ भारत की उम्मीदे जुड़ी हैं.

वहीं महिला वर्ग में ममता प्रभु, पोवलीना घातक, महिमा दास, अंकित दास, मौसमी पोज, पूजा एवं मोनिक वर्ता जैसी बेहतर खिलाड़ियो से भी अपनी छाप छोडऩे की पूरी संभावना है.

इनमें से शरत कमल एवं महिमा दास जैसे अनुभवी खिलाडिय़ों ने इससे पूर्व कॉमनवेल्थ खेलों में तीन तीन मैडल अपने नाम किए हैं. कॉमनवेल्थ खेलों में भारत का मुकाबला आस्ट्रेलिया, न्यूजीïलैंड, कनाडा, स्कॉटलैंड, नाइजीरिया, मलेशिया, सिंगापुर जैसे देशों से होना है परंतु भारत में खेलों के विकास के लिए खेल मंत्रालय और खेल प्राधिकरण की स्थिति, उनमें पहुंची हुई राजनीति किसी से छुपी नहीं हैं. यही कारण है कि खिलाडिय़ों का जल्दी ही देश के लिए खेलने की भावना से मोहभंग होने लगता है. खेल कोई भी हो उसका लंबे समय तक अभ्याïस और उसमें अपनी क्षमता, योग्यता बढ़ाने के लिए बड़े आर्थिक संबल की जरूरत पड़ती है. यूं तो खेलों के विकास के लिए भारत सरकार द्वारा कई योजनाएं बनाई गई हैं परंतु वे कागजों पर ज्यादा और मैदानों में कम नजर आती हैं. यही कारण है कि भारत में क्रिकेट के अतिरिक्त अन्य खेलों के खिलाड़ी उस मान सम्मान और आर्थिक मजबूती के लिए तरस जाते हैं जिसके वे उतने ही अधिकारी हैं जितने कि क्रिकेट खिलाड़ी.

हालांकि यहां यह भी उल्लेखनीय है कि नब्बे के दशक से आज के भारत के युवा की सोच में खेलों को लेकर काफी बदलाव आया है. आज खिलाडिय़ों से लेकर दर्शक तक क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में रूचि लेने लगे हैं.

परंतु व्यवसायिक चमक से सिर्फ क्रिकेट ही नहीं वरन अन्य खेल भी अछूते नहीं रहे हैं. इन सभी से टेबल टेनिस का खेल भी अछूता नहीं रहा है खेल मंत्रालय और टेबल टेनिस प्राधिकरण की नीति व्यवसायिक न होने की वजह से विदेशी लीग हमारे खिलाडिय़ों को आकर्षित कर रहीं हैं. इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि जहां भारत के बड़े टेनिस स्टार के नाम भी भारत में लोकप्रिय नहीं हैं वहीं वे विदेशी लीग से जुडक़र विदेशी क्लबों की तरफ से खेलते हैं और लाखों कमाते हैं.सौम्यजीत घोष ने १४ वर्ष की आयु में शरत कमल को हराकर नेशनल चैम्पियन बनने का गौरव प्राप्त किया था.

यहां तक कि ये खिलाड़ी अपने खेलों की कोचिंग भी विदेशों में रहकर विदेशी कोचों की मदद से लेते हैं.इधर भारतीय टेबल टेनिस प्राधिकरण (टीटीएफïआई) ने भारत के लिए विदेशी कोच नियुक्त नहीं करने का फैसला किया है ये अगले वर्ष अगस्त माह में रियो डि जिनेरियो में होने वाले ओलंपिक खेलों में भारत के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण फैसला साबित हो सकता है. टीटीएफआई का कहना है कि भारत सरकार की तरफ से मिलने वाली आर्थिक सहायता के चलते वे सिर्फ जूनियर खिलाडिय़ों के लिए ही विदेशी कोच की व्यवस्था करवा सकते हैं. साथ ही हमारे देश के खिलाडिय़ों को अंतराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रशिक्षण शिविरों और प्रतियोगिताओं में भाग न ले सकने की कमी का भी सामना करना पड़ता है.जिसकी जिम्मेदार सीधे तौर पर टीटीएफआई है.

खिलाडिय़ों को बेहतर प्रतियोगी स्थितियों के अवसरï नहीं मिलने की वजह से भारतीïय खिलाड़ी देश के लिए खेलने में अपना संपूर्ण ध्यान और शक्ति न खर्च कर यूरोप के देशों में लीग और क्लब से खेलने को प्राथमिकता देने लगे.

पिछले ओलंपिक में भारत के लिए खेल चुकी महिमा दास का मानना है कि टीटीएफआई ने जब कोच पीटर एंजेल को २०१४ के एशियाई खेलों के पहले नियुक्त किया था तो उनके प्रशिक्षण काल के दौरान उनके खेलों में काफी सुधार परिलक्षित हुआ था लेकिन २०१४ के एशियाई खेलों के पश्चात पीटर को हटा देना भारतीय टेबल टेनिस खिलाडिय़ों के लिए नुकसानïदायक रहा.

लेकिन इधर एक नई संभावना भी नजर आ रही है. आईपीएल की तर्ज पर शुरू होने जा रही प्रोफेशनल टेबल टेनिस लीग भारत के खिलाडिय़ों में नई उम्मीद, उमंग भर सकती है और भारतीय दर्शकों को भारतीय खिलाडिय़ों के साथ एशिया और यूरोप के सभी बेहतर खिलाडिय़ों को साथ साथ खेलते हुए देखने का अवसर प्राप्त होगा.

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