बेहद खूबसूरत और प्राकृतिक नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर देश ब्राज़ील


“देश दुनिया घूमने के शौकीन अपने पाठकों के लिए इस बार हमने मुलाक़ात की साधना गुप्ता से और जाने उनकी ब्राज़ील यात्रा के संस्मरण”

भारत जैसा खूबसूरत और प्रकृति के ढेरों रंगों से सजा, प्रकृति के हर ताहफे से परिपूर्ण दूसरा कोई देश दुनिया के नक्शे पर नहीं है. लेकिन प्रकृति की अनमोल सौगात, इस दुनिया को देखना और घूमना मेरा सपना और इच्छा दोनो ही है. इसे पूरा करने के लिए हमने कई देशों की यात्रा भी की है,उन्हें घूमा है. उन्हीं में से एक, मेरी ब्राजील देश की यात्रा के अनुभव मैं आपसे साझा कर रही हूं.

ब्राजील एक बेहद खूबसूरत और प्राकृतिक नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर देश है. एक बार मुझे अपने पति राकेश गुप्ता जो की रिलायन्स कंपनी में कार्य करते थे, के साथ ब्राजील घूमने का अवसर प्राप्त हुआ. कई वर्षों से मेरी ब्राजील घूमने की इच्छा थी. वहां के प्रसिद्घ उत्सव कॉर्निवाल के बारे में टीवी और पत्रिकाओं में काफी देखा था साथ ही हमारे वे मित्र जो ब्राजील घूम चुके थे उनसे भी कॉर्निवाल के बारे में काफी कुछ सुना था जिससे उसे देखने की इच्छा और भी बलवती हो गई थी. इसलिए जब पति ने ब्राजील घूमने के कार्यक्रम के बारे में बताया तो मन खुशी से झूम उठा. मै जाने की तैयारियों में लग गई. हमने ब्राजील घूमने के लिए ब्राजील के टूर एंड ट्रेवल कंपनी से सारी बुकिंग करवा ली थी. हमारी ब्राजील यात्रा चार रात व पाचं दिन की थी. ब्राजील का मौसम भारत की तुलना में बिल्कुल उल्टा होता है. ब्राजील में दिसंबर जनवरी में गर्मी व मई व जून में ठंड का मौसम होता है. फरवरी माह का मौसम काफी खुशनुमा और घूमने के लिए सबसे बेहतर होता है. हमने अपनी ब्राजील यात्रा के लिए फरवरी के महीने को ही चुना था. मन में ढेरों जिज्ञासाएं व उत्सुकता लेकर आखिरकार हम ब्राजील पहुंच गए. ट्रेवल एजेंसी वालों ने हमारा एयरपोर्ट पर स्वागत किया. वहां से सीधे होटल ले गए. वहां थोड़ी देर आराम करके हमने दोपहर का भोजन किया और वहां के प्रसिद्घ बीच कोपाकवाना घूमने के लिए गए. यूँ तो ब्राजील में कई दर्शनीय स्थल हैं कहीं पर्वत तो कहीं खूबसूरत नीले समंदर हैं. कोपाकवाना बीच भी इन्हीं दर्शनीय स्थलों में से एक है. समुद्र तट पर लोगों की भीड़ लगी हुई थी. कॉर्निवाल उत्सव के कारण दुनिया भर से लोग ब्राजील आए हुए थे. लोग सजसंवर कर घूम रहे थे और वे समुद्र की लहरों के उतार चढ़ाव के दृश्यों का आनंद ले रहे थे. वहां काफी तेज संगीत बज रहा था. संगीत की धुन पर लोग झूम रहे थे कुछ लोग समुद्र के पानी से खेल रहे थे. ऐसा लग रहा था सभी अपने बचपन में लौट गए हैं. इस समुद्र तट की विशेषता यहां किया गया सैंड वर्क था. यहां थोड़ी थोड़ी दूर पर रेत पर रेत से ही यहां की प्रसिद्घ मूर्तियों को बनाया गया था. बेहद खूबसूरत और लाजबाव था ये सैंड वर्क जिसने मेरा मन मोह लिया था.

हमने रात का खाना खाया और होटल में आराम किया. अगले दिन सुबह हमारा शहर भ्रमण का कार्यक्रम था. टूर संचालक की बस सुबह ९ बजे होटल पर आ गई और हमें सबसे पहले वहां का प्रसिद्घ चर्च दिखाया. यहां पूरे शहर में बहुत सारे पार्क बने हुए थे. इन सभी पार्कों की विशेषता ये थी कि वहां व्यायाम करने के उपकरण मौजूद हैं और कोई भी उन्हें मनचाहे तरीके से प्रयोग कर सकता है. इसके बाद हम सभी शुगर लॉफ पहुंचे जहां एक पवर्त से दूसरे पर्वत जाने के लिए ट्रॉली चलती है. हम भी उस ट्रॉली में बैठ गए. ऊंचाई का रोमांच और मनोरम दृश्य की यादें आज भी मुझे अपनी ओर खींचती हैं. हमने वहां के सभी खूबसूरत दृश्यों को तस्वीरों में कैद कर लिया और होटल वापस आ गए. मन ही मन सोच रहे थे कि काश ! इन दृश्यों की तरह ही यहां के मौसम को भी कैद कर सकती और जब चाहे तब इसको महसूस कर सकती.

तीसरे दिन हमने वहां की प्रसिद्घ मूर्ती “स्टैच्यू ऑफ क्राइस्ट” देखने का कार्यक्रम रखा. यह मूर्ति पहाड़ की चोटी पर थी. मूर्ति की ऊंचाई समुद्र तल से ३० मीटर की थी. चोटी तक जाने के लिए एक छोटी रेलगाड़ी चलती है. रेलगाड़ी में से दोनो तरफ की हरियाली व सौंदर्य देखते ही बनता है. ऊपर चोटी से देखने पर क्राइस्ट की मूर्ति जितनी खूबसूरत है उतना ही खूबसूरत है यहां से दिखाई देने वाला शहर का नजारा. यहां से देखने पर पूरे रियो डि जेनेरियो शहर का नजारा नजर आता है.

चोटी से नीचे आते आते शाम ढल चुकी थी. सुंदर व मनोरम दृश्य न तो पीछा छोड़ रहे थे ना ही हमें थकावट महसूस हो रही थी बल्कि आंखें पहले की तरह स्वस्थ व मन तरोताजा महसूस कर रहा था. शाम को हम आई पनामा बीच गए,यहां आगे समुद्र और पीछे ऊंचे पर्वतों के बीच समुद्र में नहाने का आनंद उठाया. पानी हल्का ठंडा था लेकिन उस मनोरम प्राकृतिक दृश्य के बीच समुद्र की लहरों से अठखेलियां करने का अहसास आज भी मन को रोमांचित कर जाता है.

अंतत: वो दिन भी आ गया जिसके लिए हम विशेष तौर पर ब्राजील आए थे.

आज कॉर्निवाल उत्सव मनाया जाना था. दिन में हमने थोड़ी बहुत खरीदारी की. वहां हाथ के बने सामान से पत्थर के विंड चाइम व क्ले से बने शोपीस बहुत ही सुंदर मिलते हैं. हमने अपने मित्रों व परिवार के सदस्यों के लिए तोहफे खरीदे , इसके पश्चात होटल पहुंचकर थोड़ा आराम करके तरोताजा हो गए. शाम सात बजे कॉर्निवाल देखने जाने का कार्यक्रम था. कॉर्निवाल में विश्व के प्रसिद्घ विषयों, संस्कृतियों, इतिहास पर झांकियां निकलती है. हम ठीक ६ बजे सामाडोर स्टेडियम की ओर निकल गए. लगभग डेढ़ घंटे यानि की शाम साढ़े सात बजे वहां पहुंच गए. भीड़ के बावजूद सभी को बैठने का स्थान मिल गया था. यह एक ओपन एयर स्टेडियम है जिमसें दोनो तरफ बैठने के लिए सीढिय़ां हैं बीच में से कॉर्निवाल की झांकियां निकलती हैं.

स्टेडियम में लगभग सत्तर हजार दर्शक एक साथ बैठ सकते थे. आज भी ये स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था. ठीक ९ बजे आतिशबाजी के साथ कॉर्निवाल शुरू हुआ.

पूरी रात चलने वाले इस कॉर्निवाल में भारत की झांकी आते ही हमारा उत्साह दुगुना हो गया. पूर्ण आनंद के साथ हमने कॉर्निवाल का मज़ा लिया. झांकी का उत्सव सुबह सात बजे पूर्ण हो गया. हम होटल वापस आ गए. थोड़ा आराम किया और वहां के खूबसूरत पलों को अपनी स्मृतियों में संजोकर मैं और मेरे पति भारत वापस आ गए.

गरिमा सिंह

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