प्रॉमिस

अमित उठो ! कितनी देर तक सोओगे. ग्यारह बज रहे हैं, परदा हटाते हुए मां ने कहा. ओ हो मां, सोने दो न मां, आज इतवार है छुट्टी का दिन.

बेटा, इतवार का मतलब ये नहीं है कि तुम दोपहर तक सोते रहोगे, उठो अपने बैग को खाली करके साफ करो. सप्ताह भर तक तुम उसमें बेकाम की चीजें भी डालते रहते हो. अपनी पुस्तकों की आलमारी भी ठीक करो. सप्ताह भर तुम उसे बिखेरते रहते हो, कम से कम इतवार को तो अपनी पुस्तकें और पढ़ाई का सामान ठीक कर लिया करो.

ओ हो मां. आप तो सुबह से ही काम बताने लगीं हैं. कहते हुए अमित ने तकिए से चेहरे को ढक लिया. मां झुंझलाते हुए बाहर चली गई. अमित उठा, फ्रेश होते हुए उसे एक घंटा लगा गया. जब वह नहाकर आया तब घड़ी में दोपहर का एक बजने वाला था. मां से उसने नाश्ता मांगा. मां बोली- अब नाश्ता क्या करोगे ? दोपहर के खाने का समय हो रहा है, अब सीधे खाना ही खाना.

लेकिन मुझे भूख लग रही है.

थोड़ी देर रूको, खाना तैयार होने में थोड़ी सी ही देर है.

अमित टीवी चलाकर उसके सामने बैठ गया. जब उसने खाना खा लिया तब पापा ने कहा “आज इतवार है. मैं तुम्हें सुबह पढ़ाना चाहता था तुम सो रहे थे कोई बात नहीं, अब पढ़ा देता हूं”.

शाम के चार बजने वाले थे. अमित के दोस्त उसे खेलने बुलाने के लिए आए पर वो जा नहीं सका क्योंकि पापा उसे पढ़ा रहे थे. दरअसल अमित आलसी और प्रत्येक कार्य को टालने वाला बच्चा था.

रात को बड़े भाई सुमित ने उससे पूछा तेरे नए वर्ष के प्रॉमिस का क्या हुआ. अमित चुपचाप रहा. कहता भी क्या? नए वर्ष पर जब सभी लोग कुछ न कुछ नया करने का सोच रहे थे तब उसने सबके सामने कहा था- नए वर्ष में मैं जल्दी उठूंगा, सभी कार्य समय से करूंगा, आलस्य छोड़ दूंगा. परंतु नए वर्ष को आए एक माह से ज्यादा समय हो गया है और उसने अपना वादा एक दिन भी पूरा करके नहीं दिखाया. घर में सभी उसकी इन आदतों से परेशान थे.

कल नीला का जन्मदिन है. मां ने अमित से आज ही नीला के जन्मदिन का तोहफा ले आने के लिए कह दिया था ठीक है कल स्कूल से आकर ले आऊंगा. अमित बोला-नीला अमित की कक्षा में पढ़ती है और कल उसने अपने जन्मदिन की पार्टी में अपने दोस्तों को घर पर बुलाया है.

अमित स्कूल से आने के बाद टीवी चलाकर बैठ गया. मां ने उसे याद दिलाया जल्दी खाना खा लो फिर नीला के लिए उपहार ले आओ.

ठीक है- अमित बोला.

खाना खाने के बाद वह सोने चला गया. मां से बोला जल्दी उठ जाऊंगा फिर ले आऊंगा.

मां ने शाम को अमित को कई आवाजें दीं वह नहीं उठा.शाम छह बजे उसकी नींद खुली वह जल्दी जल्दी पार्टी में जाने के लिए तैयार हुआ. फिर बोला मां मेरे पास नीला को देने के लिए कोई उपहार नहीं है. तभी अमित के दोस्त उसे आवाज देते हुए आ गए. वे सब पार्टी में जा रहे थे. अमित उनके साथ चला तो गया पर उसे बहुत शर्म आ रही थी.

उसके सभी दोस्त नीला के लिए उपहार लाए थे परंतु वह कुछ भी नहीं लाया था. उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था. ये सब उसके आलस्य और समय पर कार्य न करने की वजह से हुआ था. तभी अमित को अपने बड़े भैया सुमित की आवाज सुनाई दी. वे नीला को जन्मदिन की बधाई दे रहे थे. उन्होंने नीला को तोहफा देते हुए कहा ये अमित घर पर ही भूल गया था.

अमित ने आज मन ही मन दृढ़ निश्चय कर लिया था. अब आलस्य को वह कल से——नहीं आज से ही छोड़ देगा और समय पर कार्य करेगा. उसका नया वर्ष आज आ गया था.

डॉ.डी.एन गुप्ता

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