प्राची सोलंकी


बहुमुखी प्रतिमा की धनी प्राची खेल के मैदान के साथ अपनी रूचियों को भी बखूबी पूरा कर रहीं हैं-अविनाश मिश्रा
एस्सार इंटरनेशनल विद्यालय की छात्रा प्राची सोलंकी सेजब मैं मिलने पहुँचा तो मुझे बताया गया कि वे बॉस्केटबॉल मैदान पर अपना अभ्यास कर रहीं हैं. वहाँ देखा तो मेरी पलकें झपकना भूल गईं, एक बच्ची जो कि बारह वर्ष के आसपास की होगी उसने एक ऊंची उछाल ली बॉल को उछाला और बॉल, बॉस्केट के अंदर थी.

अपने कोच से अनुमती लेकर वे हमसे बातचीत करने लगीं. प्राची ने बताया उनका जन्म गुजरात सूरत का ही है और यहीं वे बड़ी हुई हैं. उनके पिता एस्सार में ही कार्यरत हैं. प्राची बताती हैं उनके शिक्षकों और कोच ने उन्हें विद्यालय के खेल कालांश में खेलते देखकर उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें खेलने के लिए प्रोत्साहित किया. प्राची एथलेटिक्स एँव बॉस्केट बॉल दोनों में ही राष्ट्रिय स्तर की टीम का हिस्सा रह चुकी हैं. प्राची को खेलों के अतिरिक्त चित्रकला में बहुत ज्यादा रूचि है. उन्हें चित्र बनाना अच्छा लगता है और इससे उन्हें खुशी मिलती है, साथ ही संगीत सुनना भी उन्हें काफी पसंद है आजकल वे संगीत की शिक्षा भी ले रहीं हैं.


गुजराती खाने की शौक़ीन प्राची को शाकाहारी खाना पसंद है उन्हें घूमना भी बहुत अच्छा लगता है वे प्रतिवर्ष दीवाली अवकाश में अपने परिवार के साथ घूमने जातीं हैं लेकिन अपनी रूचियों के साथ जीवन के महत्वपूर्ण कार्य पढ़ाई को वे भूली नहीं हैं और उसमें पूरा ध्यान देती हैं. उन्हें रूडयार्ड किपलिंग की पुस्तकें पढ़ना अच्छा लगता है.

उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामना के साथ हमने उनसे विदा ली.


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