पाखी- संध्या राठौड़

मेरा मानना है कि लड़कियों के लिए सर्वाधिक आवश्यक है सही और पूरी शिक्षा एवं उनका आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सक्षम होना.

ऐसे विचार रखने वाली, महिला आजादी, स्वाबलंबन, समान सामाजिक महिला अधिकारों की पक्षधर संध्या राठौड़ सूरत के सार्वजनिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एवं टैक्नॉलोजी (स्कैट) में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्य करती हैं और पुरूष वर्चस्व के क्षेत्र माने जाने वाले इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एवं मशीन डिजाइन जैसे विषयों को पढ़ाती हैं.

संयुक्त परिवार में इनका जन्म हुआ. माता पिता के सहयोग से विवाह पूर्व इंजीनियरिंग से स्नातक एवं स्नातकोत्तर (बीईएवं एमई) किया. उनके पिता एम एस राठौड़ केन्द्रीय विद्यालय में प्रधानाध्यापक थे. अपनी शिक्षा का पूरा श्रेय वे अपने पिता को ही देती हैं. विवाह को लेकर उनका नजरिया विवाह पूर्व पूरी तरह स्पष्ट था वे अपने पति की शिक्षा को लेकर किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं करना चाहती थीं. उनके पति प्रवीण प्रसाद एक प्रशासनिक अधिकारी हैं और सूरत में ही कार्यरत हैं. उनके दो बच्चे हैं. एक पुत्री और पुत्र की मां होने की व्यस्त दिनचर्या में से वे अपने लिए भी समय निकाल लेती हैं. संध्याजी कहती हैं मैं अपने सास ससुर की इस बात के लिए ऋणी हूं कि उन्होंने अपने बच्चों को सिखाया है कि बच्चे और परिवार किसी एक की जिम्मेदारी नहीं है. जब कभी मुझे देर होती है या थकान महसूस होती है तो मेरे पति जिम्मेदारी के साथ खाना भी बना देते हैं. मेरे बच्चे भी घर के कार्यों व खाना बनाने में मेरी सहायता करते हैं. मेरे पति ने अपना सरनेम भी मुझ पर कभी नहीं थोपा. मैं अपने विवाह पूर्व सरनेम का ही उपयोग करती हूं.

वे बताती हैं मैंने दहेज न देने की शर्त रखी थी जो मेरे पति ने पूरी तरह मानी और किसी भी प्रकार का किसी भी रूप में दहेज नहीं लिया. सबसे महत्वपूर्ण यह कि मेरे माता पिता को अहसास नहीं होने दिया कि उनकी बेटी उनसे दूर चली गई है.

छुट्टी का दिन संध्या जी अपने परिवार के साथ बिताना पसंद करती हैं. संध्या जी तकनीकी क्षेत्र की शिक्षक होने के बावजूद साहित्य में रूचि रखती हैं. कविता एवं कहानी लेखन उन्हें बहुत प्रिय हैं. स्पष्ट विचार एवं उच्च दृष्टिकोण की स्वाभिमानी संध्या राठौड़ के जीवन के लिए महक की ओर से ढेरों शुभकामनाएं.
– गरिमा सिंह

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