पंडित राजन – साजन की सुर-यात्रा

पंडित राजनसाजन की सुर-यात्रा

पद्मभूषण पंडित राजन-साजन मिश्र का अनोखा विश्व-दौरा 18 नवंबर से शुरू हो चुका है पेश है 

हमारी महक से उनकी बातचीत

मीठी आवाज के साथ साथ मोहक व्यक्तित्व के धनी राजन साजन से मुलाकात स्मरणीय हो जाती है.
अव्वल तो वे दोनों खुद को दो कहलाना पसंद नहीं करते. इस जोड़ी को कोई अलग-अलग नाम से बुलाता भी नहीं है. कोई पंडित राजन मिश्र या पंडित साजन मिश्र नहीं कहता. लोग इन्हें राजन साजन के नाम से ही पुकारते हैं. दोनों की उम्र में पांच साल का फर्क है. लेकिन दिल की आयु समान है वे इस कदर आपस में  मिले हुए हैं कि एक की तबियत खराब हो तो तकलीफ दूसरे को होती है.
 लगभग पचास वर्षों से दोनों भाई साथ साथ गा रहे हैं , चाहे वह मंच हो या फिर अभ्यास स्थल. वे सिर्फ गा ही नहीं रहे बल्कि साथ-साथ खा भी रहे हैं. तेजी से बदलते समाज में दोनों भाईयों का परिवार अब भी संयुक्त परिवार की विचारधारा का है. देश के बदलते सामाजिक हालातों के बारे में राजन साजन का एकमत है की प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में कम से कम २ वर्ष संगीत का अभ्यास जरूर करना चाहिए  इससे उसकी प्रवृति में प्रेम के साथ साथ सबके साथ चलने का विचार और मन तैयार होता है इससे देश में बढ़ रहे वैमनस्य को भी खत्म किया जा सकता है .
ये भैरव से भैरवी तक का कॉन्सेप्ट किसका है ?

इस सवाल के जवाब में बड़े भाई यानी पंडित राजन मिश्र बताते हैं- भैरव सुबह का राग है और भैरवी रात का, इन दोनों के बीच में कई सारे राग हैं. दोपहर के, शाम के, रात के. इन दोनों रागों के बीच दूसरी रागों का बड़ा स्पेक्ट्रमहै. इससे पहले जर्मनी, मुंबई और अहमदाबाद में इस तरह की थीमपर हम दोनों भाई गा चुके थे. वो कार्यक्रम 7-7 घंटे के थे. ऐसी इच्छा हुई कि इस तरह का कार्यक्रम लेकर पूरी दुनिया का दौरा किया जाए. एक रोज सलोनी गांधी (आयोजक) के साथ इस पर चर्चा हुई. उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा तय की और अब 18 तारीख से इस विश्व दौरे की शुरूआत हो चुकी  है.

पंडित राजन-साजन मिश्र से इस सवाल को पूछने का कोई मायने ही नहीं है कि इस विश्व दौरे की शुरूआत बनारस से क्यों ? ऐसा इसलिए क्योंकि एक पूरा का पूरा बनारस तो इनके दिल में हमेशा जीता है. बनारस में पैदा होने से लेकर, कबीर चौरा में गुजारे बचपन तक. यहीं से वो संस्कार मिले जो संयुक्त परिवार की भारतीय परंपरा को कायम रखे हुए हैं.

पंडित साजन मिश्र याद करके बताते हैं- लोग कई बार सोचते हैं कि हम भाईयों में कभी खटपट नहीं होती, इसके पीछे भी एक कहानी है. हमारे गुरु ने शिक्षा दी थी कि उनके जाने के बाद राजन मिश्र, साजन मिश्र के गुरु होंगे. तब से लेकर आज तक भैया ही मेरे गुरु हैं. मजे की बात ये है कि मैं उनसे बैठ कर शिक्षा नहीं लेता बल्कि स्टेज पर जब वो गाते हैं तो मैं उनसे सीखता हूं. मुझे याद है कि पिता जी के सामने हम दोनों भाई एक साथ रियाज करते थे. कई बार ऐसा होता था कि पिता जी छोटा होने के नाते मुझे इशारे से कहते थे कि सुनो-सुनो. कई बार तो मुझे गुस्सा भी आता था कि एक तो कान पकड़कर गाने के लिए ले आए, अब गाने बैठे तो कहते हैं कि सुनो-सुनो. लेकिन अब अहसास होता कि जो सुनने की क्षमता उन्होंने बढ़ाई उससे मेरा सीखना आसान हो गया.

इन जगहों पर होगा कार्यक्रम
कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में पंडित साजन मिश्र विस्तार से बताते हैं- भैरव से भैरवी तक पूरे एक साल तक चलने वाला कार्यक्रम है. बनारस से शुरू करने के बाद अगला कार्यक्रम अहमदाबाद में आयोजित किया जाएगा. कोलकाता, दिल्ली, बैंगलोर, पुणे, मुंबई, भोपाल, लुधियाना, पटना में भी इस सीरीज में कार्यक्रम प्रस्तुति किए जाएंगे. इसके बाद विश्व दौरे का कारवां अगले साल मार्च में साउथ ईस्ट एशिया के अलग अलग देशों में कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे. अप्रैल, मई, जून का समय कनाडा और अमेरिका के कार्यक्रमों में बीतेगा. इसके बाद दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से होकर इस विश्व दौरे का समापन होगा.

यूं तो इस फेहरिस्त में तमाम देश ऐसे हैं जहां इन दोनों भाईयों की प्रस्तुतियां कई बार हो चुकी हैं, लेकिन इस विश्व दौरे को लेकर कितना उत्साह है? यह पूछने पर पंडित राजन मिश्र कहते हैं, ‘पूछिए मत. बड़ा एक्साइटमेंटहै, ‘चैलेंजिंगभी है लेकिन हम अपने श्रोताओं, गुरुओं की शुभकामनाओं के साथ इसे शुरू करने के लिए तैयार हैं. इस बात का और ज्यादा गर्व है कि कंबोडिया में जो हिंदुओं का सबसे बड़ा अंकोरवाट मंदिर है, हम वहां भी इस दौरान कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे. शायद पहली बार ये अवसर होगा जब किसी भारतीय कलाकार की वहां प्रस्तुति हो रही हो.


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