नेहरू : एक पत्रकार

आज हम अपने घरों में बैठकर ढेरों विदेशी चैनल देखते हैं, तरह तरह की पत्रिकाएं पढ़ते हैं. घरों में कई समाचार पत्र आते हैं, दर्जनों वेबसाइट, ब्लॉग, सोशल मीडिया, हमारी जिंदगी का अहम भाग हैं.

लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि भारत में इस स्वतंत्र प्रेस की नीवं रखने में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. १४ नवम्बर नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है और उन्हें चाचा नेहरू के नाम से भी संबोधित किया जाता है. लेकिन आज हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस दिन को मीडिया डे के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि नेहरू चाचा होने के साथ साथ एक पत्रकार भी थे.

नेहरू प्रेस की स्वतंत्रता के पक्षधर थे. वे मानते थे कि मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और लोकतंत्र में वॉचडॉग की भूमिका निभाता है. नेहरू ने अपने शासनकाल में देखा कि मीडिया एक विपक्षी पार्टी की तरह व्यवहार करता है और सत्ता पक्ष को उसकी कमियां बताता है. उन्होंने मीडिया और पत्रकारिता को आगे बढ़ाने में काफी योगदान दिया. उनसे पूर्व किसी भी नेता ने पत्रकारों और पत्रकारिता के लिए इस प्रकार नहीं सोचा था. उन्होंने प्रेस के लिए वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट बनाया. साथ ही प्रेस की स्वतंत्रता, कर्तव्य निश्चित करने के लिए प्रेस कमीशन की स्थापना भी की.

यूं तो नेहरू के द्वारा लिखे हुए हर वाक्य, हर पत्र को अलग अलग संग्रहों में प्रकाशित किया जा चुका है परंतु उनकी लिखी हुई चुनिंदा पुस्तकें आज भी ज्ञानवर्धक और लोकप्रिय हैं. जिनमें ग्लिम्पसीज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री (१९३४), ऑटोबायोग्राफी (१९३६) एवं डिस्कवरी ऑफ इंडिया (१९४६) प्रसिद्घ हैं. डिस्कवरी ऑफ इंडिया पुस्तक पर श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित धारावाहिक दूरदर्शन पर प्रसारित हो चुका है.

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