नीलू की सूझबूझ


नीलू अपनी माँ के साथ रूपये निकलने गयी थी वंहा आए चोर से बचने के लिए उसने अपनी सूझबूझ को काम में लेकर उसे पुलिस को पकड़वा दिया- डॉ. डी. एन. गुप्ता

नीलू दरवाजा बंद कर लो , मैं थोड़ी देर मेँ आती हूँ माँ की आवाज़ आई . नीलू कहानी की पुस्तक पढ़ रही थी . माँ आप कहाँ जा रहीं हैं ? नीलू ने पुस्तक से नज़र हटाते हुए पूछा .

बेटा , तीन दिन के सरकारी अवकाश चल रहे हैं ,बैंक बंद हैं , और घर में रूपये समाप्त हो गए हैं सोच रही हूँ पास वाले ए. टी. एम. से ज़रूरत के रुपए निकाल लाती हूँ. माँ ने नीलू को बताया. माँ , मैं भी चलूँ आपके साथ ? नीलू ने पूछा ?

ठीक है चलो , तुम भी थोड़ा घूम लोगी और समझ भी लोगी कि ए. टी. एम. से रूपये कैसे निकाले जाते हैं. मां ने मुस्कुराते हुए कहा.नीलू शीघ्र ही तैयार होकर माँ के साथ चल दी.नीलू ने इस वर्ष छटी कक्षा की परीक्षा पास की है और वह सातवीं कक्षा में आई है वह एक कुशाग्र बुद्धि की लड़की है कक्षा में प्रथम आती है ,वह बुद्धिमान होने के साथ-साथ समझदार भी है इन दिनों उसके ग्रीष्मावकाश चल रहे हैं जिससे वह घर पर ही रहती है उसके पिताजी दूसरे शहर में नौकरी करते हैं वह अपनी माँ के साथ यहाँ रहती है शीघ्र ही नीलू और उसकी माँ ए. टी. एम. पर पहुँच गए.वहाँ जाकर नीलू की माँ ने उसे बताया कि ए. टी. एम. से पैसे कैसे निकाले जाते हैं और उसे कोड भी दिया.जब नीलू और उसकी माँ ए. टी. एम. से रूपये निकाल रहे थे तभी एक व्यक्ति दरवाजा खोलकर अंदर आ गया ” ये रूपये मुझे दे दो , उसने धमकी भरे स्वर में कहा “.

” मम्मी , हमें तो दस हज़ार रूपये निकालने हैं न ?” नीलू ने धमकी के स्वर को अनसुना करते हुए मम्मी से पूछा. माँ नीलू का इशारा समझ गयी. तुरंत बोली ” हाँ, मैं तो भूल ही गयी थी, पांच हज़ार रूपये और निकाल लो ” ,इधर नीलू बचने की तरकीब सोच रही थी. उसने ए. टी. एम. के की- बोर्ड को देखा ऐसा कोई बटन नहीं था जिसे दबाने पर खतरे की घंटी बज़ जाए या फिर कोई संकेत पुलिस को चला जाए. तभी पीछे से धमकी का स्वर दुबारा गूंजा “जल्दी करो मुझे भी रूपये निकालने हैं “. “जी, अंकल “, नीलू ने धीरे से कहा, तभी उसे कुछ याद आ गया. उसने वहाँ आसपास चोर निगाहों से देखा सामने कुछ लिखा हुआ था. उसने ध्यान से देखा फिर कार्ड को स्वाइप करा कर बोली “अंकल यह ए. टी. एम. कार्ड नहीं ले रहा है एक बार और कोशिश करती हूँ “. “जल्दी कर वह आदमी जोर से बोला “.”जी “, कहते हुए नीलू ने कार्ड स्वाईप किया अपने कोड डाले ए. टी. एम. के की -बोर्ड पर पांच हज़ार रूपये लिख दिए. ए. टी. एम. का रूपये निकालने वाला दरवाज़ा खुला, आधे नोट बाहर आये, आधे नोट अंदर रह गए. उस आदमी ने नीलू और उसकी माँ को धक्का दिया “चल हट” , फिर नोट की और लपका , मगर नोट मशीन में ही फंस गए थे. उसने खींचने की कोशिश की लेकिन नोट बाहर नहीं आये आदमी को गुस्सा आ गया. “चलो, चुपचाप अपने पास के नोट निकालो” उस ने नीलू की गरदन पकड़ ली नीलू की माँ ने पर्स में रखे पांच हज़ार रूपये निकाल कर दे दिए, आदमी पलटा उसे खतरे का आभास हो चुका था.वह दरवाजे की ओर लपका मगर दरवाजा बंद हो चुका था. आदमी ने जोर से दरवाजा खींचा ,मगर दरवाजा नहीं खुला वह तुरंत पलटा नीलू से ए. टी. एम. कार्ड छीन कर दरवाजे के पास गया उसे दरवाजे में फंसाया मगर दरवाजा लॉक हो चुका था. वह नहीं खुला तभी पुलिस के सायरन की आवाज़ आई. ए. टी. एम. के सामने पुलिस की जीप आकर रुकी ” अब तुम्हारा खेल खत्म हो चुका है इंस्पेक्टर ने जीप से उतरते हुए कहा ,तब तक बैंक अधिकारी भी आ चुके थे. उन्होने ए. टी. एम. का दरवाज़ा खोला “शाबाश बेटा , आज तुम्हारी होशियारी से ये ए. टी. एम. लुटेरा पकड़ा गया है” इंस्पेक्टर ने नीलू को शाबाशी देते हुए कहा.नीलू माँ के साथ घर वापस आ गयी तब तक सारी कॉलोनी में ये बात पता लग चुकी थी कि नीलू ने एक चोर को पकड़वाया है सब बच्चे उसके घर पर एकत्र हो चुके थे. वे ये जानने को आतुर थे कि उसने बदमाश को कैसे पकड़वाया .नीलू की मम्मी ने भी जब ये जानना चाहा तब नीलू ने बताया “मैं अपने बचने के लिए इधर -उधर देख रही थी ,तभी मेरी नज़र ए. टी. एम. के सामने लगी सूचना पर चली गयी थी “उस में लिखा हुआ था कि जब आप ए. टी. एम. में हों और आप को कोई खतरा हो अथवा लूट का भय हो तो सबसे पहले अपने कार्ड को स्वाइप कराएं. फिर अपने गोपनीय कोड को उलटे क्रम में अंकित कर दें जैसे मेरा कोड 9876 है उसे मैंने उलटे क्रम में 6789 टाइप कर दिया था. इस से ए. टी. एम. ने खतरा भाँपा. इस के बाद इस ने नोट तो निकाले मगर वे ए. टी. एम. मशीन में आधे फँस गए , साथ ही उसने एक सूचना बैंक और पुलिस थाने पहुंचा दी कि यहाँ इस ए. टी. एम. में कोई खतरा है बस फिर क्या था ? पुलिस और बैंक अधिकारी तुरंत पहुँच गए.

सभी ने नीलू की भूरी भूरी प्रशंसा की. अगले दिन नीलू की फोटो उस की सूझबूझ की कहानी के साथ शहर के समाचारपत्रों में छपा.

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