नहले पर दहला


फिल्में देखने के शौकीन सुहास को जिंदगी में हर चीज फिल्मी चाहिए थी चाहे कपड़े हों, उसका कमरा हो या उसका अपना नाम! – डॉ.डी.एन .गुप्ता.
उसे अपने नाम से बहुत शिकायत थी माँ व पिताजी से शिकायत करता कितना बोरिंग नाम रखा है आपने मेरा, कुछ  रोमांचक नाम नहीं रख सकते  थे जैसे रणबीर या अक्षय!
सुहास! ये भी कोई नाम हुआ भला आखिरकार उसने दोस्तों के बीच में अपना नाम मीका रख लिया.
माँ- पिताजी ने बहुत समझाया बेटा नाम में क्या है पर सुहास माने तब ना ! आखिर वो सुहास से मीका बन ही गया. ïमीका यानि सुहास, के कमरे की दीवारें फिल्मी अभिनेता, अभिनेत्रियों के पोस्टर से भरी हुई थी यहाँ तक की छत पर भी उसने उनके ही फोटो चिपका रखे थे, सुहास के पिताजी की खिलौने बनाने की फैक्ट्री थी माँ घर की सार संभाल करती थी सुहास की एक छोटी बहन भी थी. कालेज की पढ़ाई खत्म होते ही पिताजी के दबाव में मीका को पिताजी के साथ फैक्ट्री में जाना पड़ा, वर्ना पिताजी ने चेतावनी दी थी कि उसका सारा खर्चा पिताजी बंद कर देगें.
अब उसकी शादी की बातचीत शुरू हो चुकी थी . फिल्मी दिखने वाली पत्नी की चाहत रखने वाला मीका हर लडक़ी में मीन मेख  निकालता और नापसंद कर देता माता पिता अत्यंत परेशान हो चुके थे एक दिन सुहास के मामा अदिती का रिश्ता लेकर आए जो की सुहास की बिना सहमति लिए माँ-पिता ने तय कर दिया .
सुहास लडक़ी से मिलने की जिद करने लगा. वह अकेले ही उसके घर चला गया. वहाँ उसका शानदार स्वागत हुआ अदिती सामने आई गोरा रंग, मध्यम कद और भरा हुआ शरीर, सुहास झुंझला उठा फिल्मी हिरोइनों की तरह लहराते बाल, लम्बा पतला शरीर, लम्बी मुस्कान ऐसा कुछ भी तो नहीं था, सुहास निराश हो गया.
अदिती के माता व पिताजी ने दोनों को बातचीत के लिए अकेला छोड़ दिया वह तुरंत बोला आप नाम बदल लें. अदिती चौंक गई यह कैसी बात थी! उसने धीमे से कहा नाम में क्या दिक्कत है? ये कुछ बहनजी जैसा साउंड करता है नाम कुछ फिल्मी होना चाहिए लाइक रवीना, दीपिका, केटरीना, ऐसा करते है आप का नाम करीना रख देते हैं सुहास बोला.
अदिती चुप रही बाद में अदिती के माता पिता से बात करते हुए सुहास पूरे समय उन्हें सलाह देता रहा कि विवाह समारोह में कैसे सब कुछ फिल्मी होगा, अदिती के माता-पिता आश्चर्य से सुहास का चेहरा देखते रहे सुहास के जाने के पश्चात उन्होंने सुहास के माता-पिता से बात की उन्होंने उन्हें सुहास की आदत के बारे में विस्तार से बताया अदिती के माता-पिता सब कुछ समझ गए और उन्होंने आपस में विचार करके इस रिश्ते को आगे बढ़ाने का फैसला लिया. कुछ ही समय बाद सुहास और अदिती का विवाह धूमधाम से संपन्न हो गया. विवाह सुहास की पसंद के अनुसार फिल्मी तरीकों से न होने के कारण सुहास खुश नहीं था इस वजह से वह अपनी झुंझलाहट किसी ना किसी रूप में दर्शा रहा था. विवाह की रस्मों के पश्चात अदिती, सुहास की झुँझलाहट और बार बार ताने देने की वजह से परेशान रहने लगी उसे इस समस्या का कोई हल नजर नहीं आ रहा था.
सुहास के दोस्त उससे शादी की पार्टी मांग रहे थे. सुहास ने शनिवार को होटल में पार्टी देना तय किया, उसने अदिती को बता दिया शनिवार को अदिती समय से पार्टी के लिए तैयार हो गई सुहास और अदिती पार्टी में पहुंचे तो सुहास काफी खुश था पार्टी पूरी फिल्मी थी संगीत की धुन पर सभी थिरक रहे थे परतुं अदिती शांत बैठी रही उसके व्यवहार के ग्लैमर और आकर्षण से न भरा होने के कारण सुहास उखड़ गया घर आने के पश्चात दोनों में काफी कहा सुनी हुई. रात को अदिती काफी देर तक जागती रही, नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी अगले दिन सुबह होने तक उसने फैसला ले लिया उसने अपनी योजना में माँ पिताजी को भी शामिल कर लिया. नीलम भी उसकी योजना से सहमत और खुश थी. आखिरकार उन्होंनें योजना की शुरुआत उसी शाम से करने का फैसला किया सुहास शाम को घर आया तो अदिती घर पर नहीं थी ‘‘अदिती कहाँ है’’ ? सुहास ने पूछा ‘‘पता नहीं बेटा बताकर नहीं गई ’’ माँ ने थके हुए स्वर में जवाब दिया. सुहास ने अदिती को फोन लगाया, अदिती का फोन स्विच ऑफ आ रहा था. काफी देर से अदिती घर आई.
‘‘कहाँ थी अदिती? तुम्हारा फोन भी स्विच ऑफ आ रहा था’’ सुहास ने पूछा, ‘‘मैनें तुम्हारी इच्छानुसार डांस क्लॉस ज्वाइन की है वहीं पर थी, वहाँ फोन स्विच ऑफ रखना होता है ’’
‘‘ये तो ठीक है पर ये क्लॉस तुम दोपहर को भी तो कर सकती हो, क्योंकि शाम को नाश्ता ,खाना सब कुछ माँ को करना पड़ा,’’  ‘‘नहीं सुहास दोपहर के समय मैने ब्यूटी और फिटनेस क्लॉस ज्वाइन की है फिर स्टाइल स्पिकिंग क्लॉस है इसलिए डांस के लिए यही समय बचा है’’.
सुहास से कुछ  बोलते न बना, अब अदिती अक्सर रात को देर से  घर आती. उसकी कई सहेलियाँ बन गई थीं जिनके साथ वह कई बार रात का खाना भी बाहर ही खा लेती. छुट्टी के दिन पूरे समय उसकी सहेलियों के फोन आते रहते इधर घर के कार्यों का दबाव बढऩे से माँ अस्वस्थ रहने लगी, लगभग रोज ही घर में खाना होटल से आने लगा. सुहास  रोज-रोज बाहर का खाना खाकर तंग आ गया था. स्वाद और सेहत दोनों ही खराब हो रहे थे उस दिन रविवार था सुहास की नींद खुली तो देखा अदिती अभी तक सो रही थी सुबह के दस बज रहे थे उसने अदिती को हिलाया ‘‘अदिती, उठो दस बज रहे हैं ’’  ‘‘सोने दो, मीका कल नई डांस स्टेप सीखे हैं जिससे काफी थक गई हँू’’ सुहास झुँझलाकर रह गया बाहर आया तो माँ बोली ‘‘सुहास अदिती को बोलो आज खाना वो बना ले मेरी कमर में बहुत दर्द हो रहा है’’ सुहास कमरे में वापस गया तो अदिती बाथरूम में जा चुकी थी, बाथरूम से आने के बाद अदिती अपने नाखूनों को संवारने में  व्यस्त हो गई. ‘‘अदिती रसोई में खाना बना लो, माँ की तबियत ठीक नहीं है’’ सुहास बोला.
‘‘न बाबा, मैं नहीं बना सकती, मेरे नेल्स खराब हो जाएगें’’  ‘‘तो क्या हम खाना नहीं खाएंगे?’’  ‘‘ऐसा मैने कब कहा, होटल से मंगा लो.’’
‘‘अदिती काफी समय से देख रहा हूँ तुम घर में बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही हो न ही तुम्हें मेरा ध्यान है,घर की सार संभाल तो दूर तुम खाना तक नहीं बनाती हो ’’ ‘‘तुम्हें फिल्मी पत्नी चाहिए थी इसलिए मैं ये सब कर रही हूँ और तुम्हें ऐसा चाहिए तो मुझसे ये सारे कामों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, मैं तुम्हारी इच्छानुसार ही अपने आप को बदल रही हूँ तुम्हें तो खुश होना चाहिए न कि शिकायत ’’
सुहास का चेहरा देखने लायक था उसका दाँव उस पर उल्टा पड़ गया था उसने हार कर दोनों हाथ जोड़ेे और अदिती से बोला ‘‘ माफ करो मुझे नहीं चाहिए कोई फिल्मी पत्नी मैं अपनी पहले वाली अदिती से ही खुश हूँ’’
‘‘फिर से सोच लो एक बार, कुछ समय बाद दुबारा तुम्हारी पसंद बदल गई तो ?’’
‘‘न बाबा , ऐसा नही होगा,’’ सुहास ने कान पकड़ते हुए कहा.
अदिती जोर से हँसी फिर बाहर आकर माँ- पिताजी  के पास जाकर जोर से बोली माँ ‘‘मिशन सक्सेज’’ अब आश्चर्य की बारी सुहास की थी, कौनसा मिशन? कैसा मिशन?
‘‘तुम्हारा फिल्मी राग छुड़ाने का मिशन’’ पिताजी बोले
‘‘दरअसल ये अदिती की योजना थी और ये किसी क्लॉस में नहीं जातीं थीं वरन अपनी एक सहेली के घर जाकर कुकिंग क्लॉस चलाती थीं क्योंकि मेरी बहु को नए-नए व्यंजन बनाने में विशेषज्ञता हासिल है.’’ माँ ने हसते हुए कहा
 ‘‘ओ हो तो आप सभी अपनी बहु की टीम में शामिल थे ’’ कहते हुए सुहास सबकी हँसी में शामिल हो गया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *