द क्वार्क


मंजिल तू अपनी पूरी ताकत से दौड़ मुझसे दूर जाने क लिए, मैं अपनी दौड़ तुझसे दुगुनी रखूंगा, तुझे पाने के लिए…….

पँक्तियों को चरितार्थ कर दिखाते हैं वे लोग, जो खाली हाथ जीवन शुरू करते हैं और अपने ही जीवनकाल में अपनी सफलता को नए कीर्तिमानों से हर रोजï छोटा कर देते हैं.

बिहार के चंपारण जिले से आए रवि आर. कुमार को सूरत में वो मंजिल मिली जिसकी उन्होंने हर जगह तलाश की. आईआईटी, जेईई की प्रसिद्ध कोचिंग क्लॅासेज क्वार्क के संचालक रविकुमार से जानी असफलता से सफलता की परीकथा. बात शुरू होती है उत्तरप्रदेश से जहां उनके पिताजी वकील थे (आज वे उच्च न्यायालय में वकालात करते हैं) इनकी माता सरल स्वभाव की गृहिणी हैं, इन्होंने विज्ञान सेï (पोस्ट ग्रेज्युएट) स्नातकोत्तर की शिक्षा वनस्पति विज्ञान (बॉटनी) में प्राप्त की. इसके पश्चात इन्दिरा गांधी ओपन विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का डिप्लोमा प्राप्त किया. अपने व्यवसायिक कैरियर की शुरूआत में उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईसीएस, आईएएस) की तैयारी करवाना शुरू किया. इसमें वे सामान्य ज्ञान (जनरल नॉलेज) की कोचिंग देते थे.

सन 1996-97 में उन्होंने जीटीवी के लिए क्राइम रिर्पोटिंग करके पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा परंतु इस क्षेत्र में आर्थिक सुरक्षा न होने की वजह से उन्होंने वापस अपने कदम शिक्षण की तरफ किए, इस दौरान उन्होने कई जगह विजिटिंग फैकल्टी की तरह पढ़ाने का काम किया और इसके लिए उन्होंने देश भर के विभिन्न शहरों में क्लॅासेज ली. जिसमें अहमदाबाद, इलाहाबाद, पटना, रांची जैसे शहरों के नाम उल्लेखनीय हैं इस बीच विवाह हो जाने के कारण जीवन व्यवसाय में स्थिरता और सफलता की मांग कर रहा था. तब उन्होंने इसकी शुरुआत दिल्ली में आईआईटी, जेईई की क्लॅासेज संचालित करने से प्रारंभ की. इसमें उन्हें बहुत सफलता भी हासिल हुई, पर ये सफलता विद्यार्थियों के चयन होने में थी, न कि आर्थिक रूप में, तब उन्होंने नारायणा समूह (आंध्रप्रदेश का मशहूर कोचिंग समूह) के साथ मिलकर सूरत में आईआईटी, जेईई की कोचिंग शुरू की.

सन 2000 से सूरत में शुरू हुई ये कोचिंग अत्यंत सफल साबित हुई, पर कुछ मतभेदों के कारण उन्होंने सन 2009, 27 जनवरी में अपने आपको उससे अलग करके द क्वार्क नाम से कोचिंग संस्थान की शुरूआत की. आज ये कोचिंग संस्थान सूरत में उन सफलतम कोचिंग संस्थानों में गिना जाता हैं, जहां लोग कोचिंग का नाम पढ़कर सीढ़िया चढ़ते हैं. कोचिंग में हाल फिलहाल आईआईटी, जेईई की तैयारी कराई जाती है. उनकी योजना इसके अतिरिक्त अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने की भी हैं. रवि कुमार द क्वार्क के पहले दिन को कभी नहीं भूलते हैं वे उसे अपना सबसे प्रेरणास्पद दिन बताते हुए याद करते हैं जब मैं नारायणा समूह से अलग हुआ था तब आर्थिक परेशानी होने के बावजूद मैने अपनी अलग और नई कोचिंग खोलने का निर्णय लिया जो काफी ज्यादा खतरनाक था परंतु फिर भी मैने हार नहीं मानी और अखबारों में अपने नारायणा समूह से अलग होने और नई कोचिंग खोलने के विज्ञापन दिए. वे याद करते हुए कहते हैं कि 27 जनवरी की सुबह 9 बजे मैं अपनी पत्नी व स्टॅाफ के साथ कोचिंग क्लास पर पहुंच गया, तब तक एक भी विद्यार्थी का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ था और हम सभी असमंजस में थे पता नहीं क्या होगा? आज कोई एडमिशन नहीं है फिर कोचिंग कैसे शुरू होगी? पर उनकी अब तक की सूरत में की गई मेहनत रंग लाई, और 9.30 बजे से विद्यार्थियों के समूह आने लगे और पहले दिन ही उनके पास 40 विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन हुआ. कोचिंग केवल व्यवसाय नहीं उनके लिए उनकी पहचान भी है, उसकी सफलता के लिए वे अथक मेहनत करते हैं, आज उनकी कोचिंग की दो शाखाएं हैं जहां सैकड़ो की संख्या में विद्यार्थी और बेहतर स्टाफ हैं. रवि आर. कुमार को उनके भविष्य की उड़ान के लिए महक की ओर से ढेरों शुभकामनाएं.

मीत स्मार्त.

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