दोस्ती जो दिल को छू गयी

1) मेरी सहेली बड़ी भुलक्कड़ थी. एक दिन खाने की तैयारी कर रही थी . उसके पति ने फरमाइश की आलू टमाटर की सब्जी बना दो .उसने सब्जी काटी जब सब लोग खाना खाने बैठे तब वो सब्जी कुछ अजीब सी और ज़्यादा खट्टी लग रही थी . पति ने खाते हुए पूछा “यह सब्जी किस चीज़ की है “. सहेली ने कहा टमाटर आलू की तभी उसके बच्चे ने कहा ” मम्मी सब्जी में टमाटर तो हैं पर आलू नही हैं.” तब उसे ध्यान आया की उसने सब्जी में आलू तो डाला ही नही ,सिर्फ टमाटर की सब्जी बनाई है जब उसने घर के लोगो को अपने भुलक्कडपन की बात बताई तो सब हँसते हँसते लोटपोट हो गए . — निधि सक्सेना

2) मेरी नई नई शादी हुई थी .मेरी एक सहेली जिसका विवाह मुझसे एक वर्ष पूर्व हुआ था , वो भी अपने मायके आई हुई थी . मैं भी उस समय अपने पहले पगफेरे पर मायके आई हुई थी .उसने मुझे अपने घर खाने पर आमंत्रित किया. जब मैं, मेरे पति के साथ उसके घर पहुँची तो उसके घर उसके पति और छोटी बहन मस्ती कर रहे थे.वहाँ हमारा आमंत्रण जैसा हमें कुछ नहीं लगा. इसी तरह बातचीत करते हुए हमें एक घंटे से ज़्यादा का समय गुज़र गया. मेरे पति को भूख लग रही थी . उन्होनें इशारों में मुझे कहा तो मैनें अपनी सहेली से बातचीत मे पूछा वो आश्चर्य से बोली ” अरे हम तो भूल ही गए की मैनें तुझे भोजन पर आमंत्रित किया था .” अब हमारा चहेरा देखने लायक था . — ज्योति माखीजा

3) बात मेरी शादी के बाद की है मेरी पत्नी गर्भवती थी और मुझे अपनी एक कजन बहन की शादी का निमंत्रण मिला. शादी में जाकर आने में एक सप्ताह का समय लगना था पत्नी की तबीयत ठीक नहीं रहती थी साथ ही उसे गर्भ संबंधी कुछ समस्याएँ भीं थीं. तभी मेरे एक दोस्त सुशील जो की बज़ाज़ फ़ाइनेंस में काम करते थे ने मेरी परेशानी को देखते हुए मुझे सुझाव दिया कि मैं अपनी पत्नी को उनके घर छोड़ दूँ वे पूरा ख्याल रखेंगे और मैं निष्फिक्र होकर जा सकता हूँ .सप्ताह भर मेरी पत्नी उनके घर रही, उन्होनें उस का पूरा ख्याल रखा . आज भी उन कि यह साहयता याद दिलाती है कि दोस्ती किसे कहते हैं —- संजीव मित्तल

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