दोस्ती जो दिल को छू गई


बात उन दिनों की हे जब मैं मेडिकल कि तैयारी कर रही थी मुझे ट्यूशन के लिए पैसों की जरुरत थी मेरे परिवार की स्थिति नहीं थी कि वे इसके लिए खर्च कर सकें ऐसे में एक लड़का जो की मेरे साथ ही ट्यूशन पर आता था उसने मेरी पूरी फीस जमा कर दी और दुबारा इस बारे में कभी कोई बात नहीं की हम दोनों ने ही एंट्रेंस पास किया लेकिन दोनों का एडमिशन अलग अलग जगह हुआ हम फिर कभी नहीं मिले। लेकिन आज भी मेरा दिल उसके लिए ह्रदय से आभारी है

हम जब स्कूल में पढ़ा करते थे तब गर्मियों की छुट्टियों में हमारे से बड़े बच्चे हमारे साथ मिलकर समूह बनाकर तरह तरह के खेल खेला करते थे एक बार गुड्डे गुड़िया की शादी करना तय हुआ उसके लिए पूरी कॉलोनी के बच्चों को दो समूहों में बांटा गया सब के ऊपर कोई न कोई जिम्मेदारी डाली गयी कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 11 बजे बारात चलनी थी और 2 बजे के आस पास खाना था जिसके लिए सभी को अपने घर से कोई न कोई डिश बनाकर लानी थी मेरी जिम्मेदारी रायता लाने की थी मेरी मां ने आधी बाल्टी रायता बनाकर दिया। मैं लगातार रोती रही मुझे ज्यादा रायता चाहिए उन्होंने समझाया ये ज्यादा हे लकिन मैं मानी नहीं और मां की नज़र बचकर उसमें ढेर सारा पानी डाल दिया नतीजा , जब सब रायता खा चुके तो भी वो आधी बाल्टी बच गया आज भी ये याद करके हंसी चेहरे पर आ जाती है

बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी एक बार ट्यूशन से लौटते हुए रात के 8 बज़ गए सर्दियों के दिन थे लिहाज़ा रात बहुत गहरी लग रही थी रास्ता सुनसान था हम तीन सहलियां लौट रहीं थीं हमें घबराहट हो रहीथी उस समय मोबाइल भी नहीं होते थे हमने हिम्मत की और एक दूसरे का हाथ कसकर पकड़ा और तेज़ क़दमों से चल दिए तभी उस रस्ते पर एक टेम्पो आया जो की मज़दूर पुरुषों और महिलाओं से भरा हुआ था हम भी उसी में जगह बनकर खड़े हो गए और जब उस टैम्पो ने मुख्य रस्ते पर उतारा तब जाकर हमारी जान में जान आई।

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