दीपावली की आप सभी को शुभकामनाएँ -महक प्रवाह

किसी भी समाज का आईना उसका साहित्य होता है, समाज की परंपराओं, सोच एवं व्यवस्था का सही प्रतिरूप उसके साहित्य में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है. परंतु आज के आधुनिक युग में जहां उंगलियां दिनभर मोबाइल और कम्पयूटर के बटनों से खेलती रहती हैं, वहां पुस्तकें कहीं खो सी गई हैं.
आज सभी अधिकांश वक्त टेलीविजन या फिर सोशल नेटवर्किंग साइट्स के साथ गुजारते हैं. ये दुनिया आभासी दुनिया बनती जा रही है. जहां कुछ भी वास्तविक नहीं है न प्रेम ,न भावनाएं, न बातचीत, न रिश्ते, सभी एक फ्रैन्ड शब्द में समा गए हैं. हम सभी बेहतर रूप से जानते हैं कि पुस्तकों का स्थान जीवन में कोई नहीं ले सकता है, फिर भी दिन ब दिन उनसे दूर हो रहे हैं. नतीजा समाज में बढ़ती आधुनिकता के नाम पर फूहड़ता, ढीले होते सामाजिक बंधन, खत्म होती लंबी चर्चाएं. लुप्त होती गोष्ठियां, क्योकिं पुस्तकें जीवन से खो गई हैं. अब खुशी के लिए छोटी-छोटी स्क्रीन ढूंढते हैं चाहे वे कम्प्यूटर की हों या मोबाइल की.
नई तकनीक को अपनाना गलत नहीं है, वरन् अत्यावश्यक है. समय के साथ मनुष्य का विकास है. परंतु यदि ये भौतिक विकास, मानवीय मूल्यों के बदले होगा तो समाज को नुकसान उठाना पड़ेगा.
वसुधैव कुटुम्बकम की बात करने वाले भारतीय मात्र भाषा, धर्म, जाति, प्रांत यहां तक कि शहरों के आधार पर अपनी पहचान बना रहे हैं. ये शोचनीय स्थिति है, जहां सारा विश्व हमारा है, वहां हम एक छोटे से गांव या शहर के नाम के आधार पर अपनी पहचान बना रहे हैं. आगे बढ़िए, सार्थक पढ़िए, सार्थक चर्चा कीजिए और अगली पीढ़ी को सही मूल्य दीजिए. जो जाति, धर्म, भाषा आधारित न होकर विश्व मूल्य हों. विश्व संस्कार हों सत्य, प्रेम और विकास.
इन्हीं मूल्यों के साथ महक आपके सामने अपने खूबसूरत कलेवर में आ रही है. उम्मीद है आप सभी खुले मन से इसका स्वागत करेंगे.
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक दीपावली की आप सभी को शुभकामनाएँ प्रकाशोत्सव आपके जीवन में सत्य और प्रेम का प्रकाश लेकर आए ऐसी हमारी कामना हें.
किरन संजीव

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