तेरे बच्चे मेरे बच्चे

बच्चे तो सबको अपना मानते हैं वे नहीं जानते अपने और दूसरे क्या होते हैं बच्चे तो बच्चे होते हैं तेरे बच्चे या मेरे बच्चे नहीं – डी. एन. गुप्ता

खाने की मेज़ साफ करते हुए प्रतिमा सोच रही थी बस अब जाकर थोड़ा कमर सीधी करेगी उसने घड़ी की ओर देखा साढ़े तीन बज़ रहे थे सुबह का काम निबटाते खाते समय इतना हो गया . सुबह छ: बजे से उठकर रसोई में जो लगी तो अब जाकर कार्य समाप्त हुआ है हर बार ग्रीष्मावकाश में दोनों ननदें ,प्रतिमा और उसकी जेठानी शीतल कुछ दिनों के लिए एक साथ माँ पिताजी के पास एकत्रित होते हैं इस से माँ पिताजी को अच्छा लगता था और सभी बड़ों व बच्चों को कुछ दिन एक साथ रहने का अवसर मिलता था काम के साथ सभी अपने सुख दुख की बातें करते भविष्य की योजनाएं बनाते . इधर बच्चे भी इकट्ठे होकर खूब धमाल करते दिन भर खेल कूद करते.

बड़ी दीदी के बच्चों को छोड़कर सभी समवय के थे कुछ दो एक बरस बड़े या छोटे . सभी बच्चों में झलक सबसे बड़ी थी साकेत उसका छोटा भाई बड़ी है जबकि अभिनव और सनी छोटी ननद के बच्चे थे जेठानी के दोनों लड़कियां थी मीता और नीता , तरुण और हनी प्रतिमा के बच्चे थे . छोटे बच्चे दिन भर शोर करते, साकेत और झलक या तो टी॰वी॰ देखते या फिर अपने मोबाइल पर व्यस्त रहते . माँ पिताजी भी कभी कभी इन बच्चों के शोर से तंग आ जाते. इधर बच्चों का शोर इधर टी.वी. की आवाज़ . एसे मैं कभी कभी वे भी झल्ला जाते . प्रतिमा ने मेज़ साफ की बचे हुए खाने को फ्रिज में रखा और पीछे के कमरे में रखे पलंग पर लेट गयी थकान की वजह से लेटते ही उसे झपकी लग गयी थी अचानक तेज़ आवाजों से उसकी नींद खुल गयी ध्यान से सुना तो छोटी ननद की किसी को डांटने की आवाज और कुछ बच्चों के शोर की आवाज़ आ रही थी कुछ समय वह लेटी रही लेकिन आवाजें निरंतर तेज़ होती जा रही थीं कुछ सोचकर वह उसी ओर बाहर की तरफ चल दी अमिता दीदी तरुण पर नाराज़ हो रहीं थीं. तरुण अभिनव की कार से खेल रहा था खेलते समय कार गेट से बाहर सड़क पर चली गयी थी उस पर नजर पड़ते ही अमिता दीदी बोली प्रतिमा भाभी तरुण को बिलकुल तमीज़ नहीं है जब दूसरों के खिलौनों से खेलें तो किस तरह से खेलना चाहिए और किसी के खिलौने लो भी तो संभालकर खेलें . प्रतिमा ने हँसते हुए कहा ठीक है दीदी मैं उसे समझा दुंगी तभी पाँच वर्षीय तरुण मासूमियत से बोला लेकिन माँ मैनें किसी दूसरे की कार नहीं ली ये तो अभिनव भैया की कार है वो तो मेरे भैया हैं न ? प्रतिमा ने कुछ उत्तर न देकर तरुण को प्यार से अपने पास बुला लिया और उसे दूसरी जगह ले गयी बात आई गयी हो गयी.

रात को जब सब लोग खाना खाने बैठे तब अमिता दीदी बोलीं अभिनव और सनी तो कुरकुरे का पैकेट लाए हैं वे नहीं खाएँगे, ये देखकर तरुण और हनी भी कुरकुरे खाने की जिद करने लगे अमिता दीदी बोलीं देखो सब अपने अपने मम्मी पापा से बोलो साकेत और झलक को देखो वो किसी से कुछ नहीं मांगते. इस पर झलक बोली ” नहीं मौसी ये बात नहीं है दरअसल हम बड़े हो गए हैं और हमें मालूम है की कुरकुरे नुकसान करते हैं ” इस पर अमिता को चुप होना पड़ा अगले दिन सुबह नौ बजे का समय था अमिता जल्दी जल्दी नहा धोकर तैयार हो गयी थी जेठानी शीतल ने पूछा अमिता कहाँ चल दीं सुबह सुबह . मंदिर जा रही हूँ भाभी, तभी जेठानी की छोटी बेटी नीता और तरुण भी कहने लगे “हम भी बुआ के साथ जाएंगे ” “दीदी इनको भी तैयार कर दूँ ” प्रतिमा ने पूछा न बाबा इतना प्यार नहीं है इनसे, अपने साथ ले जाना और भाभी इन्हें सिखाओ अपने माँ पापा के साथ जाया करें और कुछ भी जिद हो अपने माँ पिता से करें दूसरों से नहीं, मैं मेरे बच्चों को ले जाऊंगी आप अपने बच्चों को ले जाएँ. प्रतिमा चुप रह गयी जेठानी शीतल बड़बड़ाने लगी “है तो छोटी, पर जबान ऐसे चलती है जैसे कतरनी, हमें सिखा रही है बच्चों को क्या सिखाएं और क्या न सिखाएं. तभी प्रतिमा के फ़ोन की रिंग बजी उस तरफ प्रतिमा की छोटी बहन सीमा थी वे लोग कहीं घूमने जा रहे थे कल वे इसी शहर से निकलने वाले थे तो उन्होंने यहां घूमने का कार्यक्रम बना लिया था सीमा ने बताया वे लोग अपनी कार से आ रहे हैं इसलिए सुबह प्रतिमा भी तैयार रहे वे उसे भी साथ ले लेंगे और सब मिलकर शाम तक शहर घूमेंगे फिर रात को उनका कर्यक्रम उनके एक मित्र जो की इसी शहर में रहते थे के घर पर रुकने का था और अगले दिन चले जाने का था सीमा के पास भी दो छोटे बच्चे थे

प्रतिमा ने अपना कर्यक्रम सास ससुर को बता कर सहमति ले ली. प्रतिमा के पति संदीप और सीमा के पति नवीनजी की अच्छी बनती थी इसी लिए संदीप को भी सीमा और नवीनजी से मिलने की उत्सुकता थी अगले दिन सुबह प्रतिमा ने जल्दी जल्दी नाश्ते का काम खत्म किया और तरुण व हनी को तैयार करके स्वयँ भी तैयार हो गई थोड़ी देर बाद ही सीमा की कार आ गयी क्योंकि कार काफी बड़ी थी उसमे एक साथ आठ से दस लोग बैठ सकते थे प्रतिमा और संदीप ने सीमा व नवीनजी का स्वागत किया सास ससुर भी बैठक कक्ष में बैठकर सीमा व नवीन से बातचीत करने लगे तभी जेठानी की दोनों लड़कियां नीता और मीता भी उनके साथ घूमने जाने की जिद करने लगे इस पर सीमा ने शीतल से कहा हाँ, हाँ चलो कार में काफी जगह है वरन, दीदी आप भी चलिए बड़ा मज़ा आएगा “तुम्हें दिक्कत तो नहीं होगी” नहीं दीदी दिक्कत कैसी असली मज़ा तो सबके साथ आता है कहकर वह ज़ोर से हंस पड़ी. जब वे सब चलने लगे तो अमिता के दोनों बच्चे भी रोने लगे हम भी जाएंगे सब बच्चे जा रहे हैं अमिता उन्हें समझाने की असफल चेष्ठा कर रही थी ये देखकर सीमा बोली आप दोनों भी आ जाओ तभी नीता तुरंत बोल उठी “नहीं मौसी बुआ कहतीं हैं सभी बच्चों को सिर्फ अपने माँ पापा के साथ घूमना चाहिए और उन्हीं से जिद करनी चाहिए” ये सुनकर अमिता का चेहरा शर्म और क्रोध से लाल हो उठा. इस पर प्रतिमा बोली अमिता दीदी अभिनव और सन्नी को हम साथ ले जायेंगे.

बच्चे तो सबको अपना मानते हैं वे नहीं जानते अपने और दूसरे क्या होते हैं बच्चे तो बच्चे होते हैं तेरे बच्चे या मेरे बच्चे नहीं.

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