तू डाल डाल मैं पात पात


राजीव ने निश्चय कर लिया था वो विवाह के मामले में क्रांतिकारी कदम उठाएगा , लेकिन बाबूजी उससे भी दो कदम आगे निकले और उसकी सारी योजना रखी रह गयी — डॉ. डी. एन . गुप्ता

सोनल को देखते हुए राजीव मुस्कुरा दिया. उसका गोरा रंग और ब्वायकट कटे हुए बाल यही तो दो कारण हैं जिसकी वजह से उसने सोनल से विवाह करने का निश्चत किया है . राजीव ने कॉलेज में पढ़ते समय ही निश्चय कर लिया था वो विवाह के मामले में क्रांतिकारी कदम उठाएगा. इसलिए उसने अपने पारंपरिक परिवार के लिए उनकी इच्छा के विपरीत, लडक़ी का चयन अपने विवाह के लिए किया था. राजीव पारंपरिक दक्षिण भारतीय परिवार से संबंधित था. उनके परिवार में महिलाएं घरेलू और पारंपरिक कार्यों में पारंगत होती थीं लेकिन राजीव कुछ नया करना चाहता था जिससे परिवार में सभी उसके बारे में बातें करें , वह सभी की चर्चा का विषय बनना चाहता था.

यही कारण था कि उसने गोरी, फैशनपरस्त सोनम को अपने लिए पसंद किया था. उसे पूरा विश्वास था कि बालों को लंबा पसंद करने वाले उनके परिवार में ब्वायकट बालों वाली सोनम को बिल्कुल भी पसंद नहीं किया जाएगा. मां बाबूजी उस पर नाराज होंगे और फिर वो गुस्से में घर छोडक़र निकल जाएगा.

अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार सोनम को लेकर शाम छह बजे वह घर पहुंच गया. इस समय तक बाबूजी दफ्तर से घर वापस आ जाते थे और छोटा भाई व बहन वे दोनों भी घर पर ही होते थे.

राजीव ने दरवाजे की घंटी बजाई. छोटी बहन जया ने दरवाजा खोला. भाई के साथ एक लडक़ी को देखकर नमस्ते किया और अंदर आने को कहकर मां को बताने चली गई.

राजीव ने सोनल को सोफे पर बैठने को कहा, तभी अंदर से मां बाबूजी बैठक में आ गए. सोनल ने बैठे बैठे ही उनसे ” हाय” किया. मां बाबूजी कुछ देर सोनल को देखते रहे, फिर उसके साथ बातें करने लगे. राजीव सोनल को देखते हुए मां से बोला ” मां , ये सोनल है. इसके माता पिता नहीं हैं. ये अकेली ही छात्रावास में रहती है मैं इससे शादी करने वाला हूं . “

मां बाबूजी ने कुछ जबाव नहीं दिया . सोनल के जाने के बाद राजीव मन ही मन खुश हो रहा था कि बस, अब मां बाबूजी उससे नाराज होंगे, उस पर चिल्लाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. मां उसकी तरफ देखती हुई बोली ” सोनल बहुत ही प्यारी और सुंदर लडक़ी है. ” ” मुझे भी लडक़ी अच्छी लगी है. बाबूजी ने कहा.

राजीव आश्चर्य में पड़ गया. ये क्या हुआ ? उसकी योजना तो फेल हो गई. लेकिन वो इतनी जल्दी हार नहीं मानेगा. उसने कहा ” मां, मैंने और सोनल ने कोर्ट मैरेज करने का निर्णय लिया है. ” ये सुनते ही मां बोली ” मैं पहले से ही जानती थी लडक़ी समझदार है .सही है तुम्हारा फैसला. दिखावे में फालतू का धन खर्च करना अच्छी बात नहीं है. रूपया बचेगा तो वह तुम्हारे भाई बहन के भविष्य पर खर्च होगा. “

अब तो राजीव का चेहरा देखने लायक था. यहां तो सारे ही पासे उलटे पड़ रहे थे. मां बाबूजी किसी बात से नाराज ही नहीं हो रहे थे. ऐसे तो वह चर्चा का विषय कैसे बनेगा ?

उसकी परेशानी बढ़ती जा रही थी. अंत में उसने एक अंतिम दांव खेलने का निर्णय किया. सोनल के साथ मिलकर उसने सारी योजना बना ली. मां बाबूजी को बिना बताए एक दिन वो और सोनम मंदिर चले गए वहां उन्होंने विवाह करने की योजना बनाई थी. उस विवाह की राजीव ने अपने किसी भी मित्र या रिश्तेदार , मां-बाबूजी , बहन , भाई को अपनी तरफ से भनक नहीं लगने दी.

पंडित ने तय समय पर विवाह प्रारंभ कर दिया. रस्मों के दौरान पंडित ने कहा ” किसी बड़े सदस्य को बुलाइये. ” राजीव कुछ कहता इससे पहले बाबूजी की आवाज आई “बोलिए पंडितजी क्या करना है.” राजीव ने पीछे मुडक़र देखा मां बाबूजी के साथ भाई बहन और काफी लोग थे. राजीव ने कुछ कहने की कोशिश की तभी सोनल ने उसका हाथ दबाते हुए कहा ” शादी हो जाने दो बाद में बात करना, अभी मेरा मूड खराब मत करो. ” राजीïव चुप रहा . विवाह में कन्या की तरफ से रस्में करने के लिए भी बाबूजी ने एक अधेड़ वय के दंपत्ति को आगे कर दिया.

विवाह की रस्में खत्म होते ही राजीव और सोनल ने मां बाबूजी के पैर छुए. बाबूजी ने आशीर्वाद देते हुए, दंपत्ति, जिन्होंने सोनल के पक्ष की तरफ से रस्में अदा की थीं की तरफ इशारा करते हुए कहा “राजीव इनसे भी आशीर्वाद लो, ये सोनल के माता पिता हैं.” राजीव कुछ समझ पाता उससे पहले ही सोनल उस दंपत्ति की स्त्री के गले लगकर खुशी से बोली “मां” राजीव आश्चर्य से सभी को देख रहा था. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था. तब राजीव की बहन जया बोली “भैया ये सोनल भाभी के माता पिता हैं जो बंगलौर में रहते हैं.” “असल में आप की इच्छा सभी जानते थे इसलिए मां बाबूजी ने सोनल को पहले ही आपके लिए पसंद कर लिया था. फिर सोनल भाभी को आपसे मिलने और आगे की योजना पर काम करने के लिए कहा.”

“आप की सभी योजना सेानल भाभी हमें पहले ही बता देतीं थीं. असल में आप सोनल भाभी के साथ प्लानिंग नहीं कर रहे थे बल्कि आप बाबूजी की योजना के अनुसार काम कर रहे थे. वो आगे बोली “इसीलिए जब आप सोनल भाभी को घर लाए तो हम सभी को वो पहले से ही पसंद थीं. उनके बाल तो मां ने पहले ही उनसे कटवाने को कह दिया था जिससे आप उन्हें पसंद कर लें ” हंसी को रोकते हुए जया बोली “और आज आप यहां शादी करने वाले हैं इसकी पूरी जानकारी हमें थी. ये पंडितजी भी पिताजी ने ही तय करके भेजें हैं.”

सभी रिश्तेदार, मित्र जोर जोर से हंस रहे थे. सोनल मुस्कुरा रही थी. पंडितजी हंसते हुए बोले “बेटा अब दक्षिणा तुम दोगे या तुम्हारे पिताजी से लें. “

बाबूजी राजीव के पास आए और मंद मंद मुस्कुराते हुए बोले ” शाम को स्वागत समारोह है, उस में सभी लोग आमंत्रित हैं. अब आप कुछ नया करने की कोशिश न करें. क्योंकि मैं तुम्हारा बाप हूं, तू डाल डाल, तो मैं पात पात.” राजीव का चेहरा देखने लायक था.

डॉ. डी. एन . गुप्ता

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