तारक मेहता


पूरे भारत को गुजरात की संस्कृति से परिचित करने वाले तारक भाई मेहता आज 1 मार्च 2017 को  हमारे बीच नहीं रहे हैं . सब टीवी पर आने वाले धारावाहिक तारक मेहता का उल्टा चश्मा के लेखक मुख्य तौर पर कॉलमनिस्ट थे.  

मार्च 1971 से गुजराती भाषा की पत्रिका चित्रलेखा में उनका नियमित कॉलम दुनिया ना ऊंधा चश्मा प्रकाशित होता रहा है जिसमें वे तात्कालिक और सामाजिक समस्याओं पर हास्य व्यंग लिखते रहे हैं.  मुख्य तौर पर कॉमेडी जोनर के लिए लिखने वाले तारक मेहता ने कई हास्य व्यंग के नाटक लिखे हैं 26 दिसंबर 1929 को जन्मे तारक लंबे समय तक अहमदाबाद में ही रहे और उसके बाद सन 2000 में वे मुम्बई चले गए. इंदु तारक मेहता उनकी दूसरी पत्नी हैं उन दोनों की वय में पूरे 14 वर्ष का अंतर है जो की उनके प्रेम में किसी तरह का अवरोध नहीं बल्कि समझ को बढ़ाता है . 
तारक मेहता का उल्टा चश्मा के सभी किरदार उनके आस- पास के माहौल से ही निकले हैं और यही कारण है की उसमें गुजराती संस्कृति का तड़का बार बार लगता रहता है चाहे वह व्यंजनों में शामिल जलेबी फाफड़ा हो या काठियावाड़ी व्यंजनों की बात या फिर गरबे की धूम हो. उन्होनें लगभग 80 किताबें लिखी हैं भाषाई साहित्य में उनके योगदान के लिए भारत सरकार द्वार उन्हें वर्ष 2015 में पद्मश्री के सम्मान से नवाज़ गया हमारी महक की ओर से तारक मेहता जी को विनम्र श्रद्धांजलि.

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