तापी किनारे गलियारों सा ये शहर.

सूरत
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तापी किनारे गलियारों सा ये शहर.
ताना बाना बुनते बुनकरों का,
पत्थर को हीरे में बदलते जादुई हाथों का,
मीनारों सी बिल्डिंगों का शहर.
घाची दर घाची लोचे की खुश्बू से महकता,
खमन सा भुरभुरा और नरम,
नीरा की महक से सुबह की अंगड़ाई लेता शहर.
तापी से निकलता सुबह का उजाला,
तापी में ही खोता दिन का भरम,
तापी से करते संगम मंदिरों और मस्जिदों का शहर.
बेगमों की चूड़ियों की खनखनाहट सपनों में समेटता,
डुमस की लहरों की खिलखिलाहट सुनता,
नींदों में भी नाचता गाता ये शहर.
घाचियों में गूंजता गणपति बाप्पा मोरिया,
घेरैया के थाप पर थिरकते क़दमों की ताल,
मेरा ये हँसता मुस्कुराता शहर.

तापी किनारे गलियारों सा ये शहर.

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