ढाई आखर फ़ेसबुक पर

कक्षा से बहार या कक्षा से अंदर , सारे विद्यार्थी अपने मोबाइल पर इस तरह व्यस्त रहते जैसे वहां किसी ख़ज़ाने का नक्शा चिपका हुआ हे और बस अब वे उस ख़ज़ाने को पाने ही वाले हैं. इधर आजकल लोगों की मोबाइल पर बढ़ती व्यस्तता उनके हाई प्रोफाइल , आधुनिक होने , समय के साथ चलने की निशानी बनता जा रहा था. एक हम थे जो बादशाह अकबर के ज़माने की तरह अपने आप को चला रहे थे इसमें आफजाई करता था हमारा कीपैड वाला मोबाइल. हमारे शिष्य तक गाहे बघा ए हमें ताने मारने से नहीं चूकते थे ,सर अब तो नया स्मार्ट फ़ोन ले लीजिए , कोई कोई तो दो कदम आगे बढ़कर ये भी कह देता सर, इतनी कंजूसी न करें नया फ़ोन ले ही लें. ,आखिरकार हमने एक स्मार्ट फ़ोन ले ही लिया , बारह हज़ार रूपये खर्च किये जिससे हम भी लोगों की निगाह में आधुनिक और स्मार्ट नज़र आ सकें. फ़ोन लेते ही अब हर मिलने वाले का एक ही सवाल होता यार कभी एफ. बी. पर तो आओ , आपका एफ. बी. अकाउंट क्या हे यानि की हमें इस दुनिया ने आधुनिक बनाने का जिम्मा उठा ही लिया था मैने भी फेसबुक पर अपना अकाउंट खोलने का फैसला लिया लेकिन, इसका श्रेय मैं स्वयं को कम और अपने स्मार्ट आधुनिक ( हालाँकि पढ़ाई में फिसड्डी ) शिष्यों को दूंगा. आजकल के शिष्य गुरुओं से इस माने में बढ़कर होते हैं खैर, जो भी हो , फेसबुक का अकाउंट होल्डर बनने के बाद मेरे शिष्य और शिष्याओं ने मुझे समझाया कि फेसबुक का प्रयोग कैसे करना हे उन का सिखाने का अंदाज़ कुछ इस तरह था जैसे उन्हें इसमें पी. एच. डी. की डिग्री हासिल हे और मैं प्रथम कक्षा का विद्यार्थी हूँ धीरे धीरे मुझे भी इस चेहरे की दीवार पर लिखने का शौक होता चला गया , अभी इस दीवार पर मित्रों की संख्या दहाई तक भी नहीं पंहुची थी कि एक दिन एक महिला ने मित्र बनने का निवेदन (फ्रेंड रिक्वेस्ट ) भेजा. मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने प्रेम निमंत्रण भेजा हो. तत्काल और बिना सोच विचार के मैनें तुरंत उस निवेदन को स्वीकार कर लिया. उस महिला के मेरे मित्र बन जाने पर मैने उसकी दीवार पर जाकर देखा अपने दिखावे वाली फोटो पर एक बेहद खूबसूरत हसीन चेहरे वाली फोटो लगी हुई थी मैं तब तक उस हसीन चेहरे को निहारता रहा जब तक श्रीमतीजी की आवाज़ कानों में नहीं पड़ी.

रात को बिस्तर पर श्रीमतीजी खर्राटे भर कर सो रहीं थीं और हमारी आँखों से नींद कोसों दूर थी वहां फेसबुक की नई बनी मित्र की फोटो चिपकी लगी हुई थी अचानक मोबाइल पर सन्देश की धुन आई खोलकर देखा महिला

मित्र का सन्देश था. प्रेम के ढाई अक्षर नहीं थे, सिर्फ एक स्टिकर था जिसमें होठों की मुस्कान थी ,बदले में हमने भी

एक स्टिकर भेज दिया साथ में एक सन्देश भी , ” तुम प्रकृति का खूबसूरत तोहफा हो ” उधर से तुरंत जवाब आया ( वह ऑनलाइन थी ) आप तो दार्शनिक और कवि दोनों ही निकले , अपनी तारीफ सुनकर दिल फूलकर गुब्बारा हो गया और लगा की अपनी काव्य प्रतिभा का प्रदर्शन करने का इससे बढ़िया मौका और कोई नहीं हो सकता , बस तुरंत एक स्वलिखित कविता की आठ पंक्तियां उनकी खूबसूरती के कसीदे के रूप में लिख भेजीं.उनके सौंदर्य ने मुझ पर एक अनोखा जादू कर दिया था और मैं भूल गया था की मैं ४२ साल का एक कलम घसीटू शिक्षक हूँ और अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाया. उधर भी शायद यही हाल था तुरंत जवाब आया ” ओ डियर,ओ बेबी , लवली हार्ट , लव यू ” सन्देश देखते ही हाथ पांव फूल गए , पैरों के नीचे से ज़मीन सरक गयी, सब कुछ कल्पना से बाहर था, गेंद मेरे पाले मैं पड़ी थी और मैं किक मरना तो दूर की बात पैर तक ऊँचा नहीं कर पा रहा था , घबराहट बढ़ रही थी ,गुड नाइट बोलकर रात भर के लिए फेसबुक बंद किया.

सुबह आँख खुलते ही श्रीमतीजी से नज़रें बचाकर प्राइवेट स्थल पर जाकर मोबाइल पर फेसबुक खोली सन्देश मेरी प्रतीक्षा कर रहा था ” इतनी जल्दी गुड नाइट ? नींद आँखों से उड़ाकर तुम कैसे सोओगे ? जरा मिलो तो ?”

सारा दिन इसी ख्याल में निकल गया कैसे ,कब ,कहाँ मिलें ? शाम तक फिर से उस स्वप्नसुंदरी का सन्देश मौजूद था ” डियर, तुमसे मिलने की बेकरारी बढ़ रही हे ?” अब समझ आ रहा था लड़के लड़कियां हर समय पर फेसबुक पर क्यों लटके रहते हैं ऐसा स्वपन मंच , प्रेम बाती और कहाँ मिलेगी ?

जो होगा देखा जाएगा की तर्ज़ पर हमने उस नई मित्र से मिलने का मन बना ही लिया. हमने लिखा आज शाम ७ बजे होटल चिट- चैट में हम मिलेंगे ,ख्यालों में

तो हमने उस स्वप्नसुंदरी के साथ चैट शुरू भी कर दी थी.

शाम ७ बजे से पहले ही मैं होटल पहुँच चुका था कोने की एक मेज़ पकड़ी उस के सामने कुर्सी पर बैठ गया. इंतज़ार में ख्याली पुलाव भी पकाने लगे , तभी देखा सामने से हमारी श्रीमतीजी की छोटी बहन आ रहीं थीं घबराहट में कुछ समझ नहीं आ रहा था वो सीधी हमारी मेज़ की तरफ आईं और मुस्कुराते हुए कुर्सी खींचकर बैठ गईं. हम आशचर्य से उन्हें देख रहे थे “तो

जीजाजी ,कहिये क्या खिला रहे हैं ? आपने बुलाया और हम आ गए, ” ” हमने ? हमने आपको कब बुलाया ?” ” फेसबुक पर आप हमसे ही चैट शेट कर रहे थे जीजाजी” जोर की खिलखिलाहट के साथ उन्होंने राज़ खोला,” हमें जीजी ने बताया था की आजकल आप मोबाइल पर व्यस्त रहने लगे हैं तो हमने सोचा क्यों न जीजाजी को बेवकूफ बनने की भारतीय परंपरा को आधुनिक मोबाइल पर आधुनिक तरीके से निभाया जाये , उनकी खिलखिलाहट बढ़ती जा रही थी और हम चारों खाने चित्त होकर भौंचक्के से उनको देख रहे थे।
कामिनी

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