डॉ. धनजी राजानी

आसमां का टुकडा तेरे ही हाथ आएगा, गर तू शिद्दत से उसे चाहेगा.

देश भर की तीन बड़ी निजी प्रयोगशालाओं में शामिल माइक्रोकेयर लैब के डॉ. धनजी राजानी के व्यक्तित्व और उनकी सफलता की यात्रा पर उपरोक्त पंक्तियां पूरी तरह उपयुक्त महसूस होती है.

सूरत शहर के लाल दरवाजा स्थित उनकी टयूबरकुलोसिस टेस्टिंग लैब में महक प्रतिनिधि अविनाश मिश्रा ने उनसे मुलाकात की.

सूरत में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए लोगों की एक बड़ी संख्या रहती है इसी में शामिल हैं डॉ धनजी भाई राजानी. टी बी मुक्त गुजरात का जीवन लक्ष्य रखने वाले धनजी सौराष्ट्र के एक छोटे से गांव इटवाया के निवासी हैं. धनजी भाई अपनी विद्यालय स्तर की शिक्षा के लिए भावनगर आए और भावनगर विश्वविद्यालय से विज्ञान से स्नातक किया. आगे की शिक्षा यानि की पोस्टग्रेजुएशन भी उन्होंने माइक्रोबायालोजी विषय से भावनगर विश्वविद्यालय से ही किया. यही से उन्होंने अपनी पीएचडी पूरी की एवं डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की और उज्ज्वल भविष्य की तलाश में हीरों की नगरी सूरत आ गए.

वर्ष २००६ में अपने कॉलेज के साथी एवं मित्र कल्पेश ठक्कर के साथ मिलकर एक माइक्रोबॉयलोजी लैब की शुरूआत की. प्रारंभ में काफी दिक्कतें भी आई. लोगों में माइक्रोबायलोजी टैस्ट को लेकर जागरूकता का अभाव था. लोगों को समझाना प्रारंभ किया. यहां तक कि चिकित्सकों को भी इसके लिए जागरूक करना पड़ा. धीरे धीरे मेहनत रंग लाई और कामयाबी हासिल हुई.

टयूबर कुलोसिस जिसे सामान्य भाषा में टीबी कहा जाता है इसके प्रति शहर में जागरूकता के अभाव को देखते हुए इन्हों डॉ. के. एन. शेलोदिया से मुलाकात की. डॉ शेलोदिया काफी समय से इस दिशा में सक्रिय थे. उनके मार्गदर्शन में उन्होंने वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन द्वारा गांधीनगर स्थित टीबी रिसर्च सेंटर में प्रशिक्षण लिया.

इन अनुभवों को उपयोग में लाने के लिए उन्होंने २००९ में सूरत की अपनी लैब में आधुनिक उपकरण मंगवाए और यहां टीवी की जांच , इलाज एंव उस पर शोध करना प्रारंभ किया. इसके पश्चात उन्होंने टीबी रिसर्च सेंटर चेन्नई में भी टीबी के उपचार और उस पर शोध का प्रशिक्षण लिया.

धनजी भाई के अभी तक ४५ से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं. इस क्षेत्र में ७ पेटेंट की उपलब्धि भी इनके नाम पर दर्ज हैं. वर्ष २०१४ में धनजी भाई को वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के शोध विभाग में गाइड के रूप में शामिल किया गया है.

धनजी भाई की लैब गुजरात की एकमात्र निजी बड़ी लैब है जिसमें अत्याधुनिक तौर तरीकों से टीबी की सूक्ष्म तौर पर जांच की जाती है.

धनजी भाई के परिवार में उनकी पत्नी व दो पुत्रियों हैं उनकी पत्नी एसोसिएट प्रोफेसर हैं. काठियावाड़ी भोजन के शौकीन धनजी भाई को सामाचार पत्र पढऩा बहुत पसंद है. वे अपना खाली समय अपने परिवार के साथ बिताना पसंद करते हैं.

धनजी भाई को उनके स्वर्णिम भविष्य एवं उनके लक्ष्य टीबी मुक्त गुजरात की प्राप्ति के लिए महक की ओर से शुभकामनाएं.उनकी उड़ान इसी तरह बनी रहे इस शुभकमाना के साथ हमने उनसे विदा ली.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *