टेबल टेनिस महाकुंभ राष्ट्रमंडल चैम्पियनशिप ट्रॉफी

रहता था हमें हर पल उस लम्हे का इंतजार

जिस लम्हे तिरंगे के नीचे स्वर्ण पदक की हो खबर

15 दिसंबर की गुलाबी शाम सूरत के अठवालाइंस स्थित इंडोर स्टेडियम के एक भव्य समारोह में गुजरात राज्य के शिक्षा मंत्री भपेन्द्र सिंह चूडास्मा ने दीप प्रज्जवलित कर 20 वें अवध कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैम्पियनशिप का आगाज किया. जिसमें भारत सहित सिंगापुर, इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड, उत्तरी आयरलैंड, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, ट्रिनिदाद एवं दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने भाग लिया.

सर्वोच्च वरीयता प्राप्त भारतीय खिलाड़ी शरतकमल का आखिरी वक्त में चोटिल होना भारत के लिए बड़ा झटका था. लेकिन उनकी अनुपस्थिति में एंथनी अमलराज, सौम्यजीत घोष, जि. सथयान, देवेश कारिया और मूल सूरत निवासी हरमित देसाई एवं महिला खिलाडिय़ों में मउमा, मनिका बत्रा और अंकिता दास ने मोर्चा संभाला.

प्रतियोगिताओं के दौर में पुरूष एकल फाइनल में एंथनी अमलराज की सिंगापुर के चेंग फेंग के हाथों 2-4 से हुई पराजय ने स्वर्णपदक की उम्मीदों पर पानी फेर दिया और रजत से ही संतोष करना पड़ा. महिला एकल फाइनल में भारत की मउमा को विश्व वरीयता क्रम में 46 वें नंबर की सिंगापुर की खिलाड़ी जाओ चियान ने 4-1 से पराजित कर भारतीय चुनौतियों पर पूर्ण विराम लगा दिया.

हालांकि ये भारत की तरफ से कॉमन वेल्थ खेलों में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था जहां भारतीयों ने कुल 16 पदक जीते. जोकि दो वर्ष पूर्व हुए दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों के मुकाबले 7 पदक ज्यादा हैं. भारत ने तीन स्वर्ण, 5 रजत और 7 कांस्य पदक जीत कर पदक तालिका में सर्वोच्च स्थान हासिल किया वहीं सिंगापुर 4 स्वर्ण और 1 कांस्य के साथ दूसरा एवं इंग्लैंड ने 1 रजत और 1 कांस्य के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया. 2004 में पुरूष एकल में स्वर्ण जीतकर शरत कमल ऐसा करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने थे. शरत कमल की अनुपस्थिति में एंथनी अमलराज के लिए पुरूष एकल में स्वर्ण जीतने के अवसर मौजूद थे लेकिन उसे स्वर्ण में तब्दील करने से चूक गए. लेकिन सौम्यजीत घोष एवं हरमित देसाई की जोड़ी ने अपने ही भारतीय प्रतिद्वंद्वी जि. साथयन एवं देवेश कारिया को हराकर पुरूष युगल का स्वर्ण अपने नाम कर लिया.

जबकि महिला युगल के अंतिम दौर में पहुंची भारतीय जोड़ी मोनिका बत्रा और अंकिता दास का सामना सिंगापुर से हुआ और वे 3-0 से हार गए.

मीडिया द्वारा तवज्जो नहीं
स्थानीय समाचार पत्रों के अतिरिक्त किसी भी राष्ट्रीय मीडिया द्वारा खेल का कवरेज नहीं करना मीडिया के द्वारा खेलों में भेदभाव दर्शाता है. क्रिकेट के खिलाडिय़ों की निजी गतिविधियों को भी अतिरंजित करके दिखाया जाता है. जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर की अन्य खेल प्रतियोगिताओं की कवरेज तो दूर की बात उनकी सूचना तक राष्ट्रीय मीडिया दर्शकों को नहीं देता है. यहां भी यही सब हुआ. किसी भी राष्ट्रीय चैनल द्वारा इन खेलों का प्रसारण नहीं किया गया.

इन्डोर में आयोजन
टेबल टेनिस के इस अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए सूरत स्टेडियम को चुना गया. सूरत का इंडोर स्टेडियम खेलों के अंतराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप बेहतर श्रेणी में आता है. फिर भी इसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सूरत महानगर पालिका द्वारा पिछले एक वर्ष से इसमें पुनरूद्धार के कार्य कराए गए जिससे यह स्टेडियम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आ खड़ा हुआ सभी खिलाडिय़ों द्वारा स्टेडियम की भूरी भूरी प्रशंसा इसे चरितार्थ कर रही थी.

आयोजन
यूं तो आयोजकों ने काफी प्रयत्न किए थे फिर भी उसमें कुछ कमियाँ छूट गई थीं. जिनमें खिलाडिय़ों को प्रतिदिन एक ही प्रकार का भोजन परोसना भी शामिल था.

अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट न होना
खिलाडिय़ों को जों सबसे ज्यादा कमी महसूस हुई वह थी सीधी कनेक्टिविटी का उपलब्ध न होना था. खेलों के प्रारंभ में खिलाडिय़ों को मुंबई एयरपोर्ट से सूरत तक निजी वाहनों से लाया गया. इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजन विश्व स्तरीय कनेक्टिविटी मांगते हैं. जिस पर गुजरात सरकार को सोचना चाहिए.

आरिफ़ अंसारी 

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