जीतू वाघाणी अपनी हार से डरे : गुजरात चुनाव

जीतू वाघाणी अपनी हार से डरे : गुजरात चुनाव

दिसम्बर में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा अपने कई वर्तमान विधायकों  का टिकिट काटने का विचार कर रही है.इधर दूसरी तरफ कई विधायक  भी स्वयं चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं इसकी जगह वे पार्टी का कार्य संभालना चाहते हैं.

इस बारे में ऐसे विधायकों ने पार्टी हाई कमान को अपने विचारों से अवगत भी करा दिया है

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाघाणी ने भी चुनाव लड़ने से इंकार करके पार्टी के कार्यों को संभालने को प्राथमिकता देने की बात कही है वे विधानसभा चुनाव न लड़कर संगठन के कार्यों को संभालना चाहते हैं . इस सूचना के आने के बाद पार्टी के अंदर तर्क वितर्क शुरू हो गया है.

कारडिया राजपूतों के आंदोलन को भाजपा और जीतू वाघाणी ने अपने अहम का मुद्दा बना लिया है जबकि इस आंदोलन की शुरुआत में उन्होनें इसे नज़रअंदाज़ कर दिया था.

धीरे धीरे बढ़ते इस आंदोलन को समझने में भाजपा असफल रही.  पिछले रविवार को बावला तहसील के  भायला गांव में डेढ़ लाख से ज्यादा राजपूतों ने इकट्ठे होकर शक्ति प्रदर्शन किया तब भाजपा को इस आंदोलन की गंभीरता और इसका महत्व समझ आया आखिरकार इस स्थिति को समझकर और अपनी हार निश्चित तौर पर जानते हुए जीतू वाघाणी ने चुनाव मैदान से अपने पैर खींच लिए हैं और इस बाबत पार्टी आलाकमान को भी सूचित कर दिया है .
मज़े की बात ये है की इधर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रमुख ने  चुनाव लड़ने से इंकार किया है तो भाजपा प्रदेश प्रमुख भी चुनाव मैदान से पीछे हैट गए हैं।  कुल मिलाकर इस बार के गुजरात विधानसभा के चुनावों में पाटीदार और राजपूत अपनी  ताकत का प्रदर्शन शुरू कर चुके हैं 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *