जिग्नेश की युवा हुंकार :- निशाने पर रहे मोदी

जिग्नेश की युवा हुंकार रैली में युवाओं की भीड़ नदारद

जिग्नेश मेवाणी ने दिल्ली पुलिस की रोक के बावजूद युवा हुंकार रैली का आयोजन किया. दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पर मेवाणी सहित कन्हैया कुमार, शेहला रशीद और उमर खालिद जैसे छात्र नेताओं ने रैली में जमकर हुंकार भरी. स्वराज इंडिया के प्रशांत भूषण और दिल्ली स्वराज इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष अनुपम सहित स्वामी अग्निवेश जैसे पुराने आंदोलनकारी भी रैली में पहुंचे. रैली का आयोजन जिस तरह से किया है वह अन्ना हज़ारे के लोकपाल आंदोलन की याद दिला रहा था.

निशाने पर रहे मोदी
रैली में छात्र नेताओं ने अपने भाषण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाया. जिग्नेश ने अपने भाषण में कहा, ‘मैं भी गुजराती हूं और अब विधायक भी बन गया हूं. भ्रष्टाचार की सारी फाइलें निकलवा कर ही दम लूंगा.
यह रैली जेल में बंद भीम सेना के नेता चंद्रशेखर रावण की रिहाई को लेकर थी. लेकिन, इसमें चंद्रेशेखर का मुद्दा लगभग गायब ही रहा. रैली में लव जिहाद, बेरोजगारी और गाय के मुद्दों को ज्यादा तरजीह दी गई. लगभग सभी वक्ताओं की आलोचना में पीएम मोदी और अमित शाह ही रहे.
दिल्ली पुलिस की रोक के बावजूद हुई रैली
दिल्ली पुलिस ने इस रैली को करने की  इजाजत नहीं दी थी. एक दिन पहले ही एनजीटी गाइडलाइंस का हवाला देकर दिल्ली पुलिस ने रैली ना करने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद जिग्नेश समर्थकों ने रैली का आयोजन किया.
जिग्नेश मेवाणी की इस रैली में भीड़ नदारद रही. खासकर छात्रों का भीड़ से गायब होना अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहा है. आयोजन स्थल पर काफी कुर्सियां खाली थीं. रैली के शुरुआत में कन्हैया कुमार को मंच पर आने की आवाजें लगती रहीं. कन्हैया कुमार तब तक मंच नजर नहीं आए जब तक प्रशांत भूषण मंच पर नहीं पहुंचे.
आयोजन स्थल पर जिग्नेश के समर्थक कम भीम सेना के समर्थक ज्यादा दिखे. भीम सेना के समर्थकों के हाथों में चंद्रशेखर की तस्वीरें थीं, जिस पर चंद्रशेखर की जल्द रिहाई के नारे लिखे थे.

सुरक्षा के चाक-चौबंद
दिल्ली पुलिस ने ज्यादा भीड़ जुटने की आशंका को देखते हुए पहले से ही हजारों जवानों की तैनाती कर रखी थी. नई दिल्ली जिले के एडिशनल सीपी बीके सिंह जो डीसीपी के प्रभार में हैं, उन्होंने खुद मोर्चा थाम रखा था. बड़े अधिकारी पल-पल के हालात पर नजर बनाए हुए थे. सिंह ने खासतौर पर उमर खालिद जैसे वक्ताओं के भाषण रिकॉर्ड करवाया. इसके बावजूद भी यह सवाल उठता रहा कि दिल्ली पुलिस की इजाजत के बगैर रैली कैसे हुई.

कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा और बवाल को लेकर जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद पर भड़काऊ भाषण देने का केस दर्ज हो चुका है. दिल्ली पुलिस के आला अफसर नहीं चाहते थे कि दिल्ली में भी इस तरह से कोई बवाल न हो इसी को ध्यान में रख कर रैली की इजाजत नहीं दी गई थी.


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