जिंदगी का सफर, वहाँ से यहाँ तक

मन पूरी तरह से रच- बस गया है जहां ,वह है हमारी कर्मभूमि, फिर भी नहीं भूलती यादे वहां की वो जन्मभूमि है उनकी राजस्थान.
सूरत में राजस्थान से आए बहुसंख्यक परिवार रहते है. उन्हीं में से एक सुप्रतिष्ठित परिवार है मनभरी साड़ीसंस्थान के श्री रामअवतार साबूजी.
श्री रामअवतार साबूजी का जन्म राजस्थान के सीकर जिले में हुआ, उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक बिट्स रांची से की.
इनके पिता राजस्थान से वर्षों पूर्व उत्तरप्रदेश बरेली में बस गए थे. वहां उनका गुड़ व शक्कर (चीनी) का थोक का व्यापार था. इनके परिवार में तीन चाचा व एक बुआ थी. श्री रामअवतार साबूजी का चार भाइयों का परिवार बरेली से लगभग 40 वर्ष पूर्व भारत के विभिन्न शहरों में कारोबार को विस्तार देने के सिलसिले में फैल गया. चारों भाइयों ने दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता और बैंगलोर का रूख किया, जहां उन्होंने कपड़ा व्यवसाय को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया.
बरेली में रहते हुए ही श्री रामअवतार साबूजी का विवाह श्रीमति विमला साबू से हुआ. विमला साबू का जन्म जयपुर में हुआ और यहीं से उन्होंने महारानी कॉलेज से स्तानक की शिक्षा ग्रहण की. विमला साबू के परिवार में तीन भाई व दो बहनें हंै. विमला जी के बड़े भाई जयपुर में डॉक्टर हैं जबकि दोनों छोटे भाई जयपुर और नोएडा में इंजीनियर हं.
१९७७ में सूरत आने और स्थापित होने में विशेषसहयोग रामअवतार साबू के मित्र का रहा. यहां आने पर उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरूआत राजकुमार मिल का कपड़ा बेचने से की. इस क्षेत्र में अनुभव होने के बाद उन्होने मनभरी के नाम से अपना कपड़ा व्यवसाय शुरू कर दिया.
इधर श्रीमति विमला साबू ने अपना कार्यक्षेत्र सामाजिक गतिविधियों को चुना. 1977 में सूरत में माहेश्वरी समाज के लगभग 50 घर ही थे. उन्होंने इनको एकत्रित करके माहेश्वरी महिला समाज की स्थापना की. 1994 में गुजरात माहेश्वरी महिला समाज की और 2006में अखिल भारतीय माहेश्वरी महिला समाज की अध्यक्षा निर्वाचित हुईं. इस दौरान समाज के विकास व अन्य कार्यों के सिलसिलें में उन्होंने चीन, सिंगापुर और अमेरिका की यात्राएं की. 2003 में बच्चों को सुसंस्कार देने के लिए गीता परिवार सूरत की स्थापना की. वर्तमान में वे इसके अध्यक्ष पद पर कार्य कर रही हैं.
श्री रामअवतार साबू के परिवार में दो बेटे व एक बेटी हं. बेटे नरेन्द्र व अरविंद साबू पिता के साथ व्यवसाय संभालते हं. बेटी नीता बियानी का विवाह जयपुर में हो चुका है. बहुंए नीरु व अनुपमा साबू भी सामाजिक कार्यों में अपना पूरा योगदान दे रही हैं.
नीरू सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों को व अनुपमा साबू गीता परिवार के कार्यक्रमों को संभालती हैं. परिवार की अगली पीढ़ी में 3पोते व 2 पोती हैं. जो कि अध्ययनरत हैं. राजस्थान का भोजन आज भी इनके परिवार का मुख्य भोजन है परंतु वहां बना भोजन इनके स्वाद में रचा बसा है. वहां के लोगों का अपनत्व, औपचारिकता से दूर प्रेममय वातावरण उन्हें राजस्थान से दूर नहीं होने देता है. राजस्थान की वेशभूषा, परंपराएं उन्हें आज भी सर्वाधिक पसंद हैं. परंतु कर्मभूमि सूरत भी उन्हें बेहद अपनी सी ही लगती है. गुजराती खाना भी उन्हें काफी पसंद है. माह में एक बार गुजराती खाना खाते हैं. उनके विचार में गुजराती लोग शांत और मिलनसार हैं जिनके मन में उत्तरभारतीयों या हिन्दी भाषा के प्रति किसी तरह का भेदभाव नहीं है.
साबू परिवार का मनपसंद भोजन दालबाटी है. उनके अनुसार राजस्थानी लोगों में भी व्यवहार कुशलता बहुत ज्यादा है इसलिए वे कहीं भी घुलमिल जाते हैं. वे झुकना जानते हैं, कड़ी मेहनत करते हैं यहीं उनकी सफलता का राज है और मूलमंत्र भी
1977में सूरत में माहेश्वरी महिला समाज के लगभग 50 घर ही थे उन्होंने इनको एकत्रित करके माहेश्वरी महिला समाज की स्थापना की. 1994 में गुजरात माहेश्वरी महिला समाज की और 2006में अखिल भारतीय माहेश्वरी समाज की अध्यक्षा निर्वाचित हुई.
महक डेस्क

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