जयचंद्रन कृष्णन कुट्टी

सूर्यपुत्री ताप्ती के किनारे बसा सूरत शहर एक ऐसे समुद्र के समान है जहां देश भर की सांस्कृतिक नदियां आकर मिलती हैं. देश के सभी हिस्सों से अलग भाषा अलग संस्कृति के लोग सूरत में आकर बसते हैं और अपनी पहचान बनाते हैं. परफेक्ट कोचिंग क्लॉसेज के जयचंद्रन कृष्णन कुट्टी जो कि एक दक्षिण भारतीय परिवार से हैं पूरी तरह सूरत के रंग में रंग चुके हैं. उनके परिवार को जितना दक्षिण भारतीय व्यंजन पसंद हैं उतना ही गुजराती व्यंजनों का भी वे लुत्फ उठाते हैं.
उनकी सफलता की उड़ान जानने के लिए जब मैंने उनसे मिलना चाहा तो वे सहर्ष तैयार हो गए और एक खुले आसमान और चमकती धूप वाले दिन को हमारा मिलना तय हुआ. लगभग चालीस वर्षीय जयचंद्रन कृष्णन कुट्टी को शहर भर के विज्ञान विषय के विद्यार्थी कुट्टी सर के नाम से जानते हैं.
बेहद कम आयु में उनके पिताजी उन्हें मुम्बई से सूरत ले आए थे (मूल रूप से केरल के निवासी).विज्ञान वर्ग से स्कूली शिक्षा समाप्त करके उन्होंने पीटी सइंस कालेज से स्नातक की शिक्षा ग्रहण की. इसी दौरान  उन्होंने रॉयल कोचिंग क्लॉसेज में पढ़ाना प्रारंभ कर दिया था. वे याद करते हुए कहते हैं उस समय तक रॉयल में केवल गुजराती माध्यम से ही शिक्षा दी जाती थी उन्होंने वहां पर अंग्रेजी माध्यम की शुरूआत की.
विश्वविद्यालय से एम. एससी. के दौरान ही उन्होंने अपनी दोस्त एम्बली पिल्लई के साथ मिलकर घोड़दौड़ रोड स्थित सूर्यकिरण अपार्टमेंट से परफेक्ट कोचिंग क्लॉसेज की शुरूआत की. प्रारंभ में आठवीं से दसवीं तक के विद्यार्थियों को पढ़ाया करते थे. उन दिनों का स्मरण करते हुए वे बताते हैं कि ये बात 1997 की है कोचिंग खोलने का विचार करते ही पहली समस्या जो खड़ी हुई वह थी जगह की और इसका समाधान किया उनके पिताजी के एक मित्र ने. उन्होंने ही उन्हें सूर्यकिरण अपार्टमेंट में जगह दिलवाई थी. दूसरी समस्या थी शिक्षकों की, जिसे मेरी सहयोगी के एक मित्र ने गणित विषय पढ़ाना स्वीकार करके समाधान किया.
इस समय वे अपनी कोचिंग के साथ-साथ अपने शोध निर्देशक तेजस देसाई की क्लॉस में भी केमेस्ट्री पढ़ाने जाते थे. धीरे-धीरे तेजस सर ने ग्यारहवीं के विद्यार्थियों को समयाभाव के कारण पढ़ाना छोड़ दिया और उन्हें इनके यहां कोचिंग करने भेजने लगे.
वर्ष 2009 को वे सूरत के शिक्षा क्षेत्र के लिए एक यादगार वर्ष बताते हैं. इस वर्ष सूरत के सभी बड़े क्लॉसेज ने मिलकर वन रूफ कॉनसेप्ट बनाया जिसके अंतर्गत जो शिक्षक, जिस विषय को अच्छा पढ़ाता है वह उस विषय को सभी क्लॉसेज में पढ़ाएगा. इससे बेहतर और अनुभवी शिक्षकों का एक समूह बन गया और सभी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में अच्छे शिक्षक मिलने लगे. आज उनके साथ बेहतर शिक्षकों की एक टीम है. वे अपनी टीम को अपनी सफलता का श्रेय देते हुए बताते हैं वर्ष 2015 में जिस विद्यार्थी ने सर्वाधिक अंक प्राप्त किए थे वह उन्हीं की कोंचिंग का छात्र रहा है.
मात्र 5-6 विद्यार्थियों से प्रारंभ की गई उनकी कोचिंग में आज लगभग 300 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. उनके परिवार में पिताजी अैर उनकी पत्नी रूपा व एक पुत्र रघु हैं. उनकी पत्नी फिजिक्स की शिक्षिका हैं. वे भी उनके कार्यों में उन्हें पूरा सहयोग प्रदान करती हैं.
एक अच्छी मुलाकात समाप्त करते हुए हमने उन्हें उनकी सफलता पर बधाई दी और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं. 
अविनाश मिश्रा

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